
अमेरिका में खसरा: 35 साल का रिकॉर्ड टूटा, 2026 में 2318 मामले; टीकाकरण में कमी बनी बड़ी चुनौती
साल 2025 के कुल मामलों को पार करते हुए अमेरिका में खसरे के 2,318 मरीज सामने आए हैं, जो 1991 के बाद सबसे अधिक है; टीकाकरण दर में गिरावट और स्वास्थ्य मंत्री की वैक्सीन विरोधी भूमिका ने संकट को गहराया है।
अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2026 के पहले सात महीनों में ही खसरे के 2,318 पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जो पूरे 2025 के 2,289 मामलों से अधिक है। यह 1991 के बाद सबसे बड़ी संख्या है, जब 9,643 मामले सामने आए थे। इससे पहले 2000 में टीकाकरण की सफलता के बाद अमेरिका को खसरा-मुक्त घोषित कर दिया गया था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
विशेषज्ञ इस वापसी के लिए टीकाकरण दर में लगातार गिरावट को जिम्मेदार मान रहे हैं। सीडीसी के अनुसार, 2024-25 शैक्षणिक वर्ष में किंडरगार्टन के 92.5% बच्चों ने ही एमएमआर (खसरा, कण्ठमाला एवं रूबेला) का टीका लिया, जबकि सामूहिक प्रतिरक्षा के लिए 95% कवरेज आवश्यक है। 2019-20 में यह दर 95.2% थी। वैक्सीन के प्रति बढ़ते संदेह, विशेषकर स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के बयानों ने इसे हवा दी है। कैनेडी लंबे समय से टीकों की सुरक्षा पर सवाल उठाते रहे हैं और उन्होंने अप्रमाणित उपचारों को बढ़ावा दिया है।
इस साल के अब तक के मामलों में 93% संक्रमित या तो बिना टीकाकरण वाले हैं या जिनकी टीकाकरण स्थिति अज्ञात है। लगभग 49% मरीज 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जबकि 20% पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। साउथ कैरोलिना, यूटा, एरिजोना और टेक्सास में बड़े प्रकोप देखे गए, जहाँ सैकड़ों लोग बीमार हुए। 2025 में तीन मौतें हुई थीं, जिनमें दो बच्चे शामिल थे। अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने इसे 'परिहार्य संकट' बताया है जिसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है।
अगला महत्वपूर्ण पड़ाव नवंबर में होने वाली पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (पीएएचओ) की बैठक है, जहाँ अमेरिका के 'खसरा उन्मूलन' दर्जे पर फैसला लिया जाएगा। लगातार एक वर्ष से अधिक समय तक वायरस का संचरण बना रहने पर यह दर्जा खोना तय माना जा रहा है। कनाडा पिछले वर्ष यह दर्जा खो चुका है, जबकि मेक्सिको वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 प्रभावित देशों में शामिल है। दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों के लिए यह चेतावनी है, जहाँ खसरा पहले से ही एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और टीकाकरण अभियानों को मजबूत रखना आवश्यक है।
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