
दुर्लभ बीमारियों में इलाज की दौड़: ब्राज़ील में एक साल से अटका फ़ैसला, वैश्विक कोशिशों से मिली राहत
ब्राज़ील में ड्यूशेन थेरेपी पर रोक के एक साल पूरे होने पर भी अनिश्चितता बरकरार, जबकि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में समुदायों ने प्रायोगिक उपचारों के लिए धन जुटाकर उम्मीद जगाई।
जुलाई 2025 में ब्राज़ील की राष्ट्रीय स्वास्थ्य निगरानी संस्था (ANVISA) ने ड्यूशेन मस्क्युलर डिस्ट्रॉफ़ी के लिए पहले से अनुमोदित जीन थेरेपी एलेविडिस को निलंबित कर दिया था। यह क़दम अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया जिसमें दो बच्चों की मौत और यकृत पर गंभीर दुष्प्रभावों के संकेत मिले थे। ठीक एक साल बाद भी ANVISA के पास कोई निर्णय नहीं है; एजेंसी निर्माता रोशे से दस्तावेज़ों की प्रतीक्षा कर रही है। यह दवा केवल 8 वर्ष से कम उम्र के बालकों के लिए संकेतित है—लेकिन मूल्यांकन की इस लंबी अवधि में कई बच्चे आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिनके परिवार अब केवल समय गँवाने का दंश झेल रहे हैं।
इसके उलट, ऑस्ट्रेलिया में एक सामुदायिक प्रयास ने अप्रत्याशित रफ़्तार पकड़ी। माउंट बार्कर की तीन वर्षीय एल्सी एवरी को जनवरी में डिफ़्यूज़ इंट्रिन्सिक पॉन्टाइन ग्लियोमा (DIPG)—एक दुर्लभ, अघुलनशील और लाइलाज ब्रेन-स्टेम ट्यूमर—का निदान हुआ। वार्षिक रूप से ऑस्ट्रेलिया में लगभग 25 बच्चों को यह बीमारी प्रभावित करती है, और मानक उपचार सिर्फ़ विकिरण तक सीमित हैं। एल्सी के माता-पिता को कनाडा स्थित एकमात्र निर्माता से वैयक्तिकृत mRNA वैक्सीन का विकल्प मिला, परंतु 4,00,000 डॉलर की लागत चुनौती बनी। 7NEWS पर कहानी प्रसारित होने के कुछ घंटों भीतर जन सहयोग से यह राशि जुटा ली गई, जिससे प्रायोगिक टीके के निर्माण और प्रशासन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
दुर्लभ वंशानुगत बीमारियों में एक और मिसाल ब्राज़ील की चार वर्षीय लुइज़ा की है, जो SPG50 (हरेडिटरी स्पास्टिक पैराप्लीजिया टाइप 50) से ग्रस्त है—यह एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव स्थिति है जो दुनिया भर में 100 से भी कम लोगों को प्रभावित करती है। परिवार को अगस्त के प्रथम सप्ताह तक लगभग 1.85 लाख रियायस (क़रीब 35 लाख भारतीय रुपए) एकत्र करने हैं ताकि अमेरिका के डलास स्थित केंद्र में प्रायोगिक जीन थेरेपी कराई जा सके, जहाँ लंबर पंचर द्वारा आनुवंशिक सुधार की कोशिश होगी। तीन वर्षीय ब्राज़ीलियाई बालक डूडू यह उपचार पहले ही ले चुका है और परिवार ने प्रारंभिक सुधार की सूचना दी है।
इन संघर्षों के बीच शीघ्र निदान की मिसालें भी सामने आई हैं। अर्जेटीना के थिएटर निर्देशक पेपे सिब्रियन पीएसए रक्त-परीक्षण की बदौलत प्रोस्टेट कैंसर को 2016 में आरंभिक चरण में ही पकड़ पाए और शल्य चिकित्सा व रेडियोथेरेपी से स्वस्थ हो गए। संयुक्त अरब अमीरात में 24 वर्षीया श्रुति का गर्भाशय-कैंसर बिना हिस्टेरेक्टॉमी के हॉर्मोन थेरेपी द्वारा ठीक कर प्रजनन क्षमता संरक्षित रखी गई—यह सफलता आरंभिक अवस्था में पकड़ में आने से संभव हुई। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों में, जहाँ अनाथ दवाओं की मंज़ूरी और वित्त-पोषण की प्रक्रिया अक्सर जटिल रहती है, ये घटनाएँ सुदृढ़ प्राथमिक जाँच ढाँचे और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की अहमियत रेखांकित करती हैं। अगला पड़ाव: ANVISA की दस्तावेज़ समीक्षा का समापन, एल्सी का कनाडा रवाना होना, और लुइज़ा के अभियान की अंतिम तिथि—ये सब इस बात की परीक्षा लेंगे कि दुर्लभ बीमारियों के विरुद्ध वैश्विक जवाबदेही कितनी तत्परता से सक्रिय होती है।
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