
सिक्किम: निर्माणाधीन सुरंग में विस्फोट, सात-दस श्रमिकों की मौत, कई फंसे
नामची जिले में एनएचपीसी परियोजना की सुरंग में मीथेन गैस रिसाव के बाद हुए हादसे में मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं हो पाई है, बचाव दल जहरीली गैस से जूझ रहे हैं।
सिक्किम के नामची जिले में सोमवार दोपहर एनएचपीसी की तीस्ता चरण-छह जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में विस्फोट और भूस्खलन के बाद कम से कम सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 15 से 27 लोगों के अभी भी फंसे होने की आशंका है। जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मृतकों के शवों को सिंगताम, गंगटोक और नामची के अस्पतालों में रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के भीतर करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर जमा मीथेन गैस को निकालने के प्रयास के दौरान विस्फोट हुआ, जिससे भूस्खलन शुरू हो गया और सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया। राज्य आपदा प्रबंधन निदेशक राजीव रोका ने कहा कि विस्फोट का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभवतः यह प्राकृतिक कारणों से हुआ। भूमिगत चट्टानों से लगातार रिस रही जहरीली मीथेन गैस और कम ऑक्सीजन स्तर के चलते बचाव अभियान बुरी तरह बाधित हो रहा है।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस और अग्निशमन सेवाओं की टीमें मौके पर मौजूद हैं, लेकिन केवल ऑक्सीजन उपकरणों से लैस विशेषज्ञ ही सुरंग में प्रवेश कर पा रहे हैं। पड़ोसी पश्चिम बंगाल से खनन दुर्घटनाओं में प्रशिक्षित एक विशेष टीम भी बुलाई गई है। सोमवार शाम से जारी बचाव कार्य में कई जवानों को चक्कर आने और बेहोशी की शिकायतें हुई हैं।
फंसे हुए श्रमिकों की सही संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोतों से भिन्न आंकड़े मिल रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण 25-27 लोगों के फंसे होने का अनुमान लगा रहा है, जबकि कुछ अधिकारी 15 से 18 के आसपास होने की बात कह रहे हैं। हिमालयी क्षेत्र में हाल के दिनों में हुई मूसलाधार मानसूनी बारिश ने भी स्थिति को जटिल बना दिया है। फिलहाल जांच जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| चीनी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
India mobilizes rescue teams and the Prime Minister offers condolences, emphasizing the priority of human life.
By citing official sources and highlighting the central government's response, the framing turns the disaster into a matter of state responsibility, reinforcing institutional trust.
The detail of charred bodies and statements about slim survival chances, present in other blocs, are omitted.
China reports the incident with detachment, emphasizing the slim survival chances and the state-owned nature of the project.
The use of probabilistic estimates and the absence of emotional commentary create a narrative of inevitability, defusing political tension.
Any reference to the Indian Prime Minister's condolences or ongoing rescue operations, present in Indian coverage, is omitted.
The Arab world records the incident as a distant tragedy, mentioning heavy rains as a possible cause.
By attributing the incident to natural factors (rains) and omitting technical details, the framing reduces the perception of human or systemic responsibility.
The mention of a methane explosion and the exact number of trapped workers, present in other sources, is omitted.
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