
होर्मुज में मालवाहक जहाज पर हमला: एक भारतीय लापता, भारत ने निंदा की
हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर तीसरी बार हमले किए, ईरान ने जलडमरूमध्य बंद कर खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया; भारत ने तत्काल डी-एस्केलेशन की मांग की।
ओमान के तट के पास रविवार सुबह साइप्रस-ध्वज वाले कंटेनर जहाज जीएफएस गैलेक्सी पर हमला हुआ, जिसमें सवार 11 भारतीय नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया और एक—तृतीय इंजीनियर हेरंब करमरकर—लापता है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए इसे “गंभीर चिंता” का विषय बताया और तत्काल तनाव कम करने तथा कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ओमानी अधिकारियों के साथ खोज-बचाव अभियान में जुटा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इस हमले के लिए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे “स्पष्ट हमला” करार दिया। सेंटकॉम के अनुसार, इंजन रूम में आग और क्षति से जहाज बेकाबू हो गया, जिसके बाद चालक दल ने उसे छोड़ दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर इस सप्ताह तीसरी बार हमले करते हुए लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं, आईआरजीसी ने दावा किया कि जहाज ने बिना अनुमति वाले मार्ग का उपयोग किया, इसलिए चेतावनी के तौर पर गोली चलाई गई, और फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को “अगली सूचना तक” बंद कर दिया, साथ ही बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए।
ईरान के हमलों से खाड़ी क्षेत्र में अलर्ट जारी हुए—जॉर्डन में तीन मिसाइलें गिरीं, कतर में मलबा गिरने से एक बच्चा घायल हुआ, और बहरीन में सायरन बजाए गए। भारत ने एक बार फिर वाणिज्यिक नौवहन और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर रोक और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में मुक्त आवाजाही की बहाली की मांग की। भारत के लिए यह जलडमरूमध्य ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, क्योंकि देश का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी से आयातित कच्चे तेल और गैस पर निर्भर है। यह कोई पहली घटना नहीं: जून 2026 में अमेरिकी हमले में टैंकर सेटेबेलो पर तीन भारतीय मारे गए थे, मार्च में टैंकर स्काईलाइट पर हमले में चार घायल हुए थे जिसमें 15 भारतीय सवार थे।
कूटनीतिक स्तर पर, ईरानी विदेश मंत्री ने पाकिस्तानी उप विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की, जिसमें पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में जून 2026 में हुए समझौता ज्ञापन के तहत संयम और डी-एस्केलेशन का आग्रह किया। ओमान के समुद्री सुरक्षा केंद्र के अनुसार, 23 चालक दल सदस्यों को बचाकर इलाज मुहैया कराया गया, एक की खोज जारी है। हमले के बाद जहाज में आग और क्षति की स्थिति का आकलन बाकी है। ओमान ने जलडमरूमध्य में यातायात सुचारु रखने के लिए दो गलियारों का प्रस्ताव रखा—उत्तरी (ईरानी नियंत्रण) और दक्षिणी (ओमानी नियंत्रण)—लेकिन अभी कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.40 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.60 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.10 | neutral |
India condemns the attack and mobilizes to rescue its citizens, projecting an image of a protective state.
By focusing on the nationality of the crew, India turns a maritime incident into a matter of sovereignty and duty to its citizens.
India omits attributing the attack to Iran, avoiding a direct condemnation of Tehran.
Gulf media advocate for a diplomatic solution to the US-Iran conflict, stressing regional stability.
By framing the attack in the context of the US-Iran conflict, these media legitimize the need for mediation and de-escalation.
Latin American media adopt the US perspective, attributing the attack to Iran's Revolutionary Guard.
By citing US sources without presenting alternative versions, these media portray the attack as a unilateral Iranian act.
They omit the Iranian version and the context of prior tensions.
The Russian press merely reports the facts, without taking a stance.
By reporting only the official Indian statement, it avoids engaging in the conflict narrative.
It omits attribution to Iran and the context of the US-Iran conflict.
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