
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद समझौते के अनुपालन का आग्रह किया, सऊदी अरब ने भी अमेरिका-ईरान तनाव पर चिंता जताई
विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान और अमेरिका से जून 2026 के समझौता ज्ञापन के तहत संयम बरतने को कहा, जबकि क्षेत्रीय शक्तियों ने मध्यस्थता प्रयासों को समर्थन दिया।
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी समकक्ष अब्बास अराकची के साथ दूरभाष वार्ता में कहा कि अमेरिका और ईरान को तनाव घटाने का मार्ग अपनाना चाहिए और जून 2026 में हस्ताक्षरित इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) में निहित प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के बयान में बताया गया कि डार ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम और कूटनीति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। इसी क्रम में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ भी बातचीत हुई, जिसमें दोनों देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते द्वंद्व पर गहरी चिंता व्यक्त की और इस बात पर सहमति जताई कि नया संघर्ष किसी के हित में नहीं है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर राज्य के दृष्टिकोण को साझा करते हुए तनाव घटाने और निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इससे पहले ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग बातचीत की थी, जिसका उद्देश्य अमेरिका-ईरान वार्ता को पुनर्जीवित करना था। इस्लामाबाद एमओयू 18 जून को संपन्न हुआ था और 21 जून को स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की बातचीत हुई, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका में थे। फिलहाल इस समझौते के बावजूद हालात बिगड़ने से क्षेत्रीय शांति को खतरा पैदा हो गया है।
तनाव में वृद्धि की पृष्ठभूमि में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए गए नए हमले हैं, जो एक साइप्रस-ध्वज वाले व्यापारिक जहाज पर ईरानी हमले की प्रतिक्रिया में किए गए। ईरानी मीडिया के अनुसार, संसदीय राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रजई ने कहा कि तेहरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने पुष्टि की है कि हमले जारी रह सकते हैं। इन घटनाक्रमों ने जून के शांति प्रयासों को कमजोर कर दिया है और मध्यस्थता के लिए समय और स्थान की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को क्षेत्रीय मान्यता मिल रही है। मालदीव की विदेश मंत्री इरुतिशाम आदम ने डार के साथ बातचीत में ईरान-अमेरिका विवाद में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। दक्षिण एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों पर कोई भी व्यवधान व्यापार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सभी पक्षों से संयम की अपील जारी है, और राजनयिक स्रोतों के अनुसार आगामी दिनों में पाकिस्तान एवं कतर की संयुक्त मध्यस्थता से वार्ता को पटरी पर लाने के प्रयास तेज हो सकते हैं।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
Iran denounces US strikes while tightening the Strait of Hormuz; Pakistan mediates but violations continue.
By presenting facts of military actions from both sides, the bloc creates a narrative of symmetric conflict in which Iran is not the sole aggressor.
The Iranian bloc omits Saudi Arabia's involvement and the explicit reference to the Islamabad memorandum of understanding, preferring to describe military actions alone.
Pakistan and Saudi Arabia warn: the US-Iran escalation destabilizes the entire Middle East.
By emphasizing the threat to regional stability and the role of mediators like Pakistan and Saudi Arabia, the bloc legitimizes the call for restraint.
The Indian-South Asian bloc omits description of military hostilities (Strait of Hormuz closure, missile strikes) and focuses solely on diplomatic appeals.
Russia records the diplomatic dialogue between Iran and Pakistan and emphasizes that only diplomacy can resolve the crisis.
By reporting the phone call without emotional emphasis, the bloc lends authority to the diplomatic position as the only viable path.
The Russian bloc omits information on military actions and Saudi involvement, presenting a purely diplomatic situation.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ऋण, जनसांख्यिकी और नीति: दुनिया के आवास बाजारों में तीन बड़े बदलाव
4 भाषाएँ · 6 स्रोत
Technology सेओपनएआई का नया एआई एजेंट ChatGPT Work लॉन्च, एटलस ब्राउज़र का अंत
7 भाषाएँ · 7 स्रोत
Science & Health सेसुलावेसी की गुफा कला ने मानव सभ्यता की समयरेखा को 67,800 साल पीछे धकेला, अंटार्कटिका से अर्जेंटीना तक नई खोजों ने इतिहास को फिर से लिखा
5 भाषाएँ · 6 स्रोत