
क्रेमलिन सूत्रों का दावा: पुतिन ने शांति वार्ता ठुकराई, डोनबास पर अडिग रुख के साथ युद्ध विस्तार की तैयारी
रॉयटर्स से बात करने वाले तीन करीबी सूत्रों के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति मौजूदा अग्रिम मोर्चों पर युद्धविराम के प्रस्तावों को खारिज करते हुए आने वाले महीनों में सैन्य अभियान तेज कर सकते हैं।
क्रेमलिन के तीन वरिष्ठ सूत्रों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के साथ शांति वार्ता की सभी अपीलों को ठुकरा रहे हैं और आने वाले महीनों में संघर्ष को और भड़काने की संभावना ‘बहुत अधिक’ है। सूत्रों के अनुसार, यूक्रेनी ड्रोनों द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और ईंधन डिपो पर हाल के हमलों ने पुतिन के युद्ध जारी रखने के संकल्प को और मजबूत किया है। एक सूत्र, जो नियमित रूप से रूसी राष्ट्रपति से मिलता है, ने बताया कि पुतिन ने हाल ही में उन सलाहकारों को फटकार लगाई जिन्होंने मौजूदा अग्रिम पंक्तियों पर युद्धविराम आधारित समझौते का सुझाव दिया था। पुतिन पूर्वी यूक्रेन के शेष डोनबास क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण को ‘गैर-परक्राम्य’ लक्ष्य मानते हैं और उन्हें विश्वास है कि रूसी सेनाएं शीघ्र ही इस पर कब्जा कर लेंगी।
यह खुलासा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुतिन युद्ध समाप्त करना चाहते हैं और समाधान ‘लोगों की सोच से कहीं अधिक करीब’ है। अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद यूक्रेन को पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली के निर्माण का लाइसेंस देने और एक अलग ड्रोन समझौते पर काम शुरू करने की घोषणा की। व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेनी हमले शांति वार्ता के लिए ‘जगह बना सकते हैं’। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस दृष्टिकोण को ‘गलत’ बताते हुए कहा कि सैन्य दबाव बढ़ाने से शांति प्रक्रिया में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि ‘विशेष सैन्य अभियान’ लंबा खिंच सकता है और रूस को ‘बड़ा सुरक्षा क्षेत्र’ बनाने के लिए मजबूर करेगा।
यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों के हवाले से कीव के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुतिन शांति के बजाय युद्ध के नए चरणों की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें यूक्रेन में नए ऑपरेशन या किसी अन्य यूरोपीय देश पर संभावित हमला शामिल हो सकता है। पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, रूसी सैन्य विशेषज्ञ तेजी से सार्वजनिक रूप से बाल्टिक देशों में नाटो ठिकानों पर सीमित हमलों की चर्चा कर रहे हैं। रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (आरयूएसआई) के जैक वॉटलिंग का मानना है कि ऐसे हमलों का उद्देश्य नाटो के साथ सीधा युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर मतभेद पैदा करना और रूस के भीतर अनिवार्य सैन्य भर्ती को राजनीतिक रूप से उचित ठहराना हो सकता है।
यूक्रेन के ड्रोन अभियान ने रूस के ईंधन बुनियादी ढांचे को गंभीर झटका दिया है। स्थानीय अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक रूसी क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की राशनिंग या कमी दर्ज की गई है, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। मॉस्को ने डीजल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच, रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि एक ही रात में 73 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए गए, जबकि यूक्रेनी वायु सेना ने बताया कि रूस ने 94 लंबी दूरी के ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से 19 ड्रोन और दोनों मिसाइलों ने 13 स्थानों पर नुकसान पहुंचाया। फिलहाल, किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक शांति वार्ता का कोई ठोस प्रस्ताव मेज पर नहीं है और सभी संकेत आने वाले हफ्तों में सैन्य गतिविधियों के और तेज होने की ओर इशारा करते हैं।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
Ukraine's drone campaign is a legitimate escalation that pressures Russia's war machine and creates leverage for negotiations.
By focusing on the scale and effectiveness of Ukrainian strikes, the narrative implies that Ukraine is gaining the upper hand and that these actions are strategically sound.
The report omits the fact that Putin is reportedly rejecting peace talks and preparing escalation, which would contradict the implication that Ukraine's strikes are creating space for negotiations.
The fuel crisis in Russia shows the tangible impact of Ukraine's strikes, disrupting daily life and exposing vulnerabilities in Russia's energy infrastructure.
By detailing the fuel shortages and rationing, the narrative makes the consequences of the war concrete and relatable, emphasizing the human and economic cost to Russia.
The report omits the broader strategic context of Putin's intentions and the possibility that the strikes might provoke further escalation rather than end the war.
Putin is determined to achieve his objectives in Donbas and will not be swayed by Ukrainian attacks or Western pressure.
By citing anonymous Kremlin sources, the narrative lends authority to the claim of Putin's resolve and frames his position as uncompromising and rational from a Russian perspective.
The report omits the details of Ukraine's successful strikes and the resulting fuel crisis, which would show that Russia is under significant pressure and that the war is not going entirely as planned.
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