
पेरिस रक्षा मेले में इज़रायली स्टॉल रातों-रात बंद, भारत की बड़ी भागीदारी
यूरोसैटरी प्रदर्शनी में फ्रांस ने 12 इज़रायली कंपनियों के बूथ लकड़ी के पैनलों से ढक दिए, जबकि भारत और चीन ने अपनी रक्षा क्षमताओं का जोरदार प्रदर्शन किया।
पेरिस के निकट आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनी यूरोसैटरी 2026 के पहले दिन एक नाटकीय घटनाक्रम में फ्रांसीसी अधिकारियों ने रातों-रात 12 इज़रायली कंपनियों के स्टॉल बंद करा दिए और उन्हें लकड़ी के मोटे पैनलों से ढक दिया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ घंटे पहले ही आयोजकों ने इन्हीं कंपनियों को प्रदर्शन की अनुमति दी थी और वे फ्रांस सरकार की कठोर शर्तों—केवल रक्षात्मक हथियार प्रणालियां दिखाने—का पूरी तरह पालन कर रही थीं। इज़रायली रक्षा मंत्रालय ने इसे “सनकी और असमानतापूर्ण कदम” बताया, जो इज़रायली प्रौद्योगिकी को हाशिए पर डालने की सोची-समझी चाल है।
यह विवाद फ्रांस-इज़रायल संबंधों में पहले से मौजूद तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया। पिछले वर्ष फ्रांस ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी थी और हाल ही में दो दक्षिणपंथी इज़रायली मंत्रियों के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। फ्रांसीसी आयोजक कॉजेस इवेंट्स ने कहा कि यह निर्णय सरकारी आदेशों के तहत लिया गया, क्योंकि कंपनियां भागीदारी की शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं। हालांकि, इज़रायली पक्ष का दावा है कि उन्होंने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई के बाद फ्रांस द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का पूरा सम्मान किया और केवल रक्षात्मक उपकरण ही प्रदर्शित कर रहे थे। अरब मीडिया ने इस घटना को फ्रांस के बदलते रुख के सबूत के रूप में देखा, जिसमें इज़रायल के सैन्य अभियानों के प्रति यूरोपीय असहजता साफ झलकती है।
इस राजनीतिक तनाव के बीच, प्रदर्शनी में अन्य वैश्विक शक्तियों ने अपनी उपस्थिति से अलग कहानी लिखी। चीन की सरकारी कंपनी नोरिन्को ने एक मॉडल ड्रोन असेंबली लाइन प्रदर्शित की, जिससे संकेत मिलता है कि वह मध्य पूर्व के खरीदारों के लिए विदेशों में ड्रोन निर्माण की योजना बना रही है। इसमें बीजेडके-005ई जैसे टोही विमान शामिल थे, जो पहले से इंडोनेशिया, मॉरिटानिया और कथित तौर पर सूडान में संचालित हैं। दूसरी ओर, भारत ने इस वर्ष 31 संस्थाओं के साथ अब तक की सबसे मजबूत भागीदारी दर्ज की, जिसमें रक्षा मंत्रालय भी शामिल था। भारतीय कंपनियों ने टैंक, बख्तरबंद वाहन, संचार प्रणाली और आपदा प्रतिक्रिया समाधानों का व्यापक प्रदर्शन किया, जो वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा को रेखांकित करता है।
यह घटनाक्रम रक्षा व्यापार मेलों के बढ़ते राजनीतिकरण को उजागर करता है, जहां कूटनीतिक तनाव व्यावसायिक समझौतों पर भारी पड़ सकते हैं। इज़रायल के लिए यह एक गहरा झटका है, जो उसके रक्षा निर्यात की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है और उसे वैकल्पिक बाजारों या प्रदर्शनियों की तलाश के लिए प्रेरित करेगा। फ्रांस के लिए यह कदम द्विपक्षीय संबंधों में और कड़वाहट ला सकता है। भारत जैसे उभरते रक्षा निर्यातकों के लिए यह एक सबक है कि ऐसे मंचों पर सफलता के लिए संतुलित कूटनीतिक संबंध और राजनीतिक जोखिमों की समझ जरूरी है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, चीन और भारत दोनों की मध्य पूर्व और अफ्रीका में बढ़ती रुचि प्रतिस्पर्धा को नया आयाम देगी, जबकि भविष्य की प्रदर्शनियों में प्रतिभागियों की राजनीतिक जांच और सख्त हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
फ्रांस ने यूरोसैटरी रक्षा मेले में एक दर्जन इज़राइली स्टॉल बंद कर दिए, जिससे राजनयिक तनाव और बढ़ गया। पेरिस पहले ही फिलिस्तीन को राज्य मान चुका था और उसने दो चरम दक्षिणपंथी इज़राइली मंत्रियों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। आयोजकों ने कहा कि कंपनियाँ फ्रांसीसी अधिकारियों की शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं।
इज़राइली कंपनियों ने रातों-रात अपने स्टॉल को लकड़ी के पैनलों से बंद पाया, जबकि कुछ घंटे पहले ही मंज़ूरी मिली थी। रक्षा मंत्रालय ने इसे इज़राइली टेक्नोलॉजी को हाशिए पर डालने का सनकी क़दम बताया, जो मैक्रों की दुश्मनी से प्रेरित था—क्योंकि इज़राइल ने फ्रांस के क़रीबी सहयोगी लेबनान में हिज़्बुल्लाह पर हमले किए थे। इज़राइल का कहना है कि उसने हर शर्त पूरी की, लेकिन पेरिस की नफ़रत हावी रही।
संबंधित लेख
बेडफोर्ड के पास दो यात्री ट्रेनों की टक्कर, कई घायल; चालक की मौत की अपुष्ट सूचना
10 भाषाएँ · 30 स्रोत
भू-राजनीति और राजनीतिलेबनान में इज़रायली हमलों के चलते अमेरिका-ईरान वार्ता स्थगित, युद्धविराम समझौते पर संकट
7 भाषाएँ · 19 स्रोत
खेलअर्जेंटीना से 3-0 की हार के बाद अल्जीरिया ने मेसी के विवादित टैकल पर फीफा में दर्ज कराई शिकायत
8 भाषाएँ · 16 स्रोत