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अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप की जुबानी चूकें: ज़ेलेंस्की को 'पुतिन' और ईरान को 'जापान' कहाजब 'व्हेन यू नो' की गूंज खामोश हुई: जैक एंटोनॉफ और मार्गरेट क्वाली का अलगावफ्लैगशिप फीचर्स अब बजट फोन में: स्मार्टफोन बाजार का नया समीकरणट्रेन में नंगे बदन, समुद्र तट पर पाबंदी: यूरोप के गाँव पर्यटकों को सिखा रहे तौर-तरीकेलीवा रेगिस्तान की सुनहरी रेत पर लौटा 'ड्यून' का आखिरी अध्यायसऊदी अरब की इज़राइल को दरकिनार करने की योजना, कनाडा का व्यापारिक रुख और खाड़ी में स्वास्थ्य-तकनीकी विस्तारमेक्सिको की विश्व कप विदाई के बाद राफा मार्केज़ ने संभाली कमान, अगुइरे का युग समाप्तट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम ख़त्म किया, ख़ुद को 'नंबर वन' निशाना बतायाअंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप की जुबानी चूकें: ज़ेलेंस्की को 'पुतिन' और ईरान को 'जापान' कहाजब 'व्हेन यू नो' की गूंज खामोश हुई: जैक एंटोनॉफ और मार्गरेट क्वाली का अलगावफ्लैगशिप फीचर्स अब बजट फोन में: स्मार्टफोन बाजार का नया समीकरणट्रेन में नंगे बदन, समुद्र तट पर पाबंदी: यूरोप के गाँव पर्यटकों को सिखा रहे तौर-तरीकेलीवा रेगिस्तान की सुनहरी रेत पर लौटा 'ड्यून' का आखिरी अध्यायसऊदी अरब की इज़राइल को दरकिनार करने की योजना, कनाडा का व्यापारिक रुख और खाड़ी में स्वास्थ्य-तकनीकी विस्तारमेक्सिको की विश्व कप विदाई के बाद राफा मार्केज़ ने संभाली कमान, अगुइरे का युग समाप्तट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम ख़त्म किया, ख़ुद को 'नंबर वन' निशाना बताया
खेलमंगलवार, 30 जून 2026

मार्टिनेली का अंतिम क्षणों में गोल: ब्राजील ने जापान को हराकर 88 साल बाद नॉकआउट में पिछड़ने के बाद जीत दर्ज की

गेब्रियल मार्टिनेली के इंजरी टाइम गोल ने ब्राजील को जापान पर 2-1 की नाटकीय जीत दिलाकर विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया, जबकि एशियाई टीम का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।

ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में मैच का 95वां मिनट चल रहा था, जब गेब्रियल मार्टिनेली ने ब्रूनो गुइमारेस के पास पर एक सधा हुआ शॉट लगाकर गेंद को जापानी गोलकीपर ज़ायन सुज़ुकी की पहुंच से दूर कोने में पहुंचा दिया। यह गोल ब्राजील की 2-1 की जीत का निर्णायक क्षण बना, जिसने पांच बार के विश्व चैंपियन को 2026 फीफा विश्व कप के अंतिम-16 में पहुंचा दिया। जापानी खिलाड़ी मैदान पर गिर पड़े, जबकि स्टैंड में मौजूद एक जापानी प्रशंसक का भावुक रोना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया — यह तस्वीर एशियाई फुटबॉल की उस निराशा का प्रतीक बन गई जो एक बार फिर बड़े मंच पर अंतिम कदम उठाने से चूक गई।

मुकाबले की शुरुआत में जापान ने चौंका दिया था। 29वें मिनट में काइशू सानो ने ब्राजील की ढीली पास को इंटरसेप्ट किया, तेजी से आगे बढ़े और बॉक्स के बाहर से दाएं पैर का शानदार शॉट लगाकर गोलकीपर एलिसन बेकर को छकाया। यह सानो का पहला अंतरराष्ट्रीय गोल था और इसने सामुराई ब्लू को पहले हाफ में 1-0 की बढ़त दिला दी। ब्राजील के पास 69 प्रतिशत गेंद पर नियंत्रण था, लेकिन जापान की पांच-खिलाड़ियों वाली रक्षात्मक दीवार ने पहले 45 मिनट तक सेलेकाओ को बेअसर रखा। कार्लो एंचेलोटी ने हाफ टाइम पर रणनीति बदली: उन्होंने खिलाड़ियों से धैर्य रखने और अधिक क्रॉस डालने को कहा। 56वें मिनट में कासेमीरो ने गेब्रियल मैगलहेस के क्रॉस पर हेडर से बराबरी का गोल दागा, जिसके बाद विनीसियस जूनियर का शॉट पोस्ट से टकराकर लौटा। अंत में मार्टिनेली, जो 66वें मिनट में स्थानापन्न के रूप में उतरे थे, ने अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में जीत का गोल कर ब्राजील को 1938 के बाद पहली बार विश्व कप नॉकआउट मैच में पिछड़ने के बाद वापसी कर जीत दिलाई।

एशियाई मीडिया ने जापान के प्रदर्शन को साहसिक और ऐतिहासिक बताया, लेकिन साथ ही इस हार को उस अंतर की याद दिलाने वाला बताया जो अभी भी शीर्ष टीमों और एशिया के बीच मौजूद है। जापानी कोच हाजीमे मोरियासु ने कहा, “हमारे और ब्राजील जैसी शीर्ष टीमों के बीच की दूरी अब कम हो रही है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टीम ने सब कुछ झोंक दिया और यह अनुभव भविष्य के लिए मजबूती देगा। वहीं, ब्राजीलियाई मीडिया ने एंचेलोटी की सूझबूझ और कासेमीरो के नेतृत्व की सराहना की। एंचेलोटी ने बताया कि उन्होंने नेमार को अतिरिक्त समय के लिए बचाकर रखा था, लेकिन सामान्य समय में ही गोल हो जाने से उन्हें उतारने की जरूरत नहीं पड़ी। यूरोपीय विश्लेषकों ने ब्राजील की उम्रदराज टीम की कमजोरियों की ओर इशारा किया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि अनुभव ने ही टीम को इस दबाव से निकाला।

भारतीय संदर्भ में देखें तो यह मैच एशियाई फुटबॉल के लिए एक सबक है। जापान ने दिखाया कि यूरोपीय क्लबों में खेलने वाले खिलाड़ियों की बदौलत तकनीकी और सामरिक स्तर पर बराबरी की जा सकती है, लेकिन नॉकआउट मैचों में जीत के लिए मानसिक मजबूती और अवसरों को भुनाने की कला अभी भी विकसित करनी होगी। जापान के पास 2006 के मुकाबले अब कहीं अधिक यूरोपीय अनुभव है, फिर भी वे पहली नॉकआउट जीत से वंचित रहे। दूसरी ओर, ब्राजील ने साबित किया कि विश्व कप में वापसी की परंपरा अभी भी जीवित है — यह उनकी 16वीं वापसी जीत थी, जो जर्मनी के रिकॉर्ड की बराबरी है।

इस जीत के साथ ब्राजील अब 5 जुलाई को मेटलाइफ स्टेडियम में नॉर्वे और आइवरी कोस्ट के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगा। जापान की विदाई के साथ ही एशिया की एक और उम्मीद टूट गई, लेकिन मोरियासु ने वादा किया कि टीम 2030 विश्व कप के लिए और मजबूत होकर उभरेगी।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
अक्ष: Vincitore vs. Sconfitto
61%उच्च
3 ब्लॉक · स्थिति −0.70 से +0.80 तक
Delusione giapponeseTrionfo brasiliano
LATSEAEUR
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
लैटिन अमेरिकी प्रेस+0.80aligned
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.70critical
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस0.00neutral
लैटिन अमेरिकी प्रेस+0.80
स्वर

Brazil won with an epic finish, proving that willpower overcomes any obstacle.

तंत्रepopea sportiva

Builds a narrative of destiny and overcoming, emphasizing the last-minute drama as proof of greatness.

विजयअत्यावश्यकता
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.70
स्वर

Japan deserves praise for the performance, but fate was cruel and the defeat is bitter.

तंत्रtragedia sportiva

Emphasizes the injustice of the result and the wasted effort, evoking empathy for the defeated team.

पीड़ितभावआक्रोश
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस0.00
स्वर

The match was hard-fought, but Brazil capitalized on the last chance.

तंत्रcronaca distaccata

Reports facts without emotional charge, presenting the result as a logical consequence of play.

उदासीनताव्यावहारिकता

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मंगलवार, 30 जून 2026

मार्टिनेली का अंतिम क्षणों में गोल: ब्राजील ने जापान को हराकर 88 साल बाद नॉकआउट में पिछड़ने के बाद जीत दर्ज की

गेब्रियल मार्टिनेली के इंजरी टाइम गोल ने ब्राजील को जापान पर 2-1 की नाटकीय जीत दिलाकर विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया, जबकि एशियाई टीम का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।

ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में मैच का 95वां मिनट चल रहा था, जब गेब्रियल मार्टिनेली ने ब्रूनो गुइमारेस के पास पर एक सधा हुआ शॉट लगाकर गेंद को जापानी गोलकीपर ज़ायन सुज़ुकी की पहुंच से दूर कोने में पहुंचा दिया। यह गोल ब्राजील की 2-1 की जीत का निर्णायक क्षण बना, जिसने पांच बार के विश्व चैंपियन को 2026 फीफा विश्व कप के अंतिम-16 में पहुंचा दिया। जापानी खिलाड़ी मैदान पर गिर पड़े, जबकि स्टैंड में मौजूद एक जापानी प्रशंसक का भावुक रोना सोशल मीडिया पर वायरल हो गया — यह तस्वीर एशियाई फुटबॉल की उस निराशा का प्रतीक बन गई जो एक बार फिर बड़े मंच पर अंतिम कदम उठाने से चूक गई।

मुकाबले की शुरुआत में जापान ने चौंका दिया था। 29वें मिनट में काइशू सानो ने ब्राजील की ढीली पास को इंटरसेप्ट किया, तेजी से आगे बढ़े और बॉक्स के बाहर से दाएं पैर का शानदार शॉट लगाकर गोलकीपर एलिसन बेकर को छकाया। यह सानो का पहला अंतरराष्ट्रीय गोल था और इसने सामुराई ब्लू को पहले हाफ में 1-0 की बढ़त दिला दी। ब्राजील के पास 69 प्रतिशत गेंद पर नियंत्रण था, लेकिन जापान की पांच-खिलाड़ियों वाली रक्षात्मक दीवार ने पहले 45 मिनट तक सेलेकाओ को बेअसर रखा। कार्लो एंचेलोटी ने हाफ टाइम पर रणनीति बदली: उन्होंने खिलाड़ियों से धैर्य रखने और अधिक क्रॉस डालने को कहा। 56वें मिनट में कासेमीरो ने गेब्रियल मैगलहेस के क्रॉस पर हेडर से बराबरी का गोल दागा, जिसके बाद विनीसियस जूनियर का शॉट पोस्ट से टकराकर लौटा। अंत में मार्टिनेली, जो 66वें मिनट में स्थानापन्न के रूप में उतरे थे, ने अतिरिक्त समय के पांचवें मिनट में जीत का गोल कर ब्राजील को 1938 के बाद पहली बार विश्व कप नॉकआउट मैच में पिछड़ने के बाद वापसी कर जीत दिलाई।

एशियाई मीडिया ने जापान के प्रदर्शन को साहसिक और ऐतिहासिक बताया, लेकिन साथ ही इस हार को उस अंतर की याद दिलाने वाला बताया जो अभी भी शीर्ष टीमों और एशिया के बीच मौजूद है। जापानी कोच हाजीमे मोरियासु ने कहा, “हमारे और ब्राजील जैसी शीर्ष टीमों के बीच की दूरी अब कम हो रही है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टीम ने सब कुछ झोंक दिया और यह अनुभव भविष्य के लिए मजबूती देगा। वहीं, ब्राजीलियाई मीडिया ने एंचेलोटी की सूझबूझ और कासेमीरो के नेतृत्व की सराहना की। एंचेलोटी ने बताया कि उन्होंने नेमार को अतिरिक्त समय के लिए बचाकर रखा था, लेकिन सामान्य समय में ही गोल हो जाने से उन्हें उतारने की जरूरत नहीं पड़ी। यूरोपीय विश्लेषकों ने ब्राजील की उम्रदराज टीम की कमजोरियों की ओर इशारा किया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि अनुभव ने ही टीम को इस दबाव से निकाला।

भारतीय संदर्भ में देखें तो यह मैच एशियाई फुटबॉल के लिए एक सबक है। जापान ने दिखाया कि यूरोपीय क्लबों में खेलने वाले खिलाड़ियों की बदौलत तकनीकी और सामरिक स्तर पर बराबरी की जा सकती है, लेकिन नॉकआउट मैचों में जीत के लिए मानसिक मजबूती और अवसरों को भुनाने की कला अभी भी विकसित करनी होगी। जापान के पास 2006 के मुकाबले अब कहीं अधिक यूरोपीय अनुभव है, फिर भी वे पहली नॉकआउट जीत से वंचित रहे। दूसरी ओर, ब्राजील ने साबित किया कि विश्व कप में वापसी की परंपरा अभी भी जीवित है — यह उनकी 16वीं वापसी जीत थी, जो जर्मनी के रिकॉर्ड की बराबरी है।

इस जीत के साथ ब्राजील अब 5 जुलाई को मेटलाइफ स्टेडियम में नॉर्वे और आइवरी कोस्ट के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगा। जापान की विदाई के साथ ही एशिया की एक और उम्मीद टूट गई, लेकिन मोरियासु ने वादा किया कि टीम 2030 विश्व कप के लिए और मजबूत होकर उभरेगी।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
अक्ष: Vincitore vs. Sconfitto
61%उच्च
3 ब्लॉक · स्थिति −0.70 से +0.80 तक
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LATSEAEUR
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दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.70critical
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस0.00neutral
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Brazil won with an epic finish, proving that willpower overcomes any obstacle.

तंत्रepopea sportiva

Builds a narrative of destiny and overcoming, emphasizing the last-minute drama as proof of greatness.

विजयअत्यावश्यकता
दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस−0.70
स्वर

Japan deserves praise for the performance, but fate was cruel and the defeat is bitter.

तंत्रtragedia sportiva

Emphasizes the injustice of the result and the wasted effort, evoking empathy for the defeated team.

पीड़ितभावआक्रोश
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस0.00
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