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समाज और संस्कृतिबुधवार, 1 जुलाई 2026

एकोन की बारिश में लैटिन प्रार्थनाएँ और एक नया धार्मिक विभाजन

स्विट्ज़रलैंड के एक मैदान में पारंपरिक कैथोलिक समूह ने पोप की चेतावनी को दरकिनार कर चार नए बिशपों का अभिषेक किया, जिससे स्वतः बहिष्कार और सदी का पहला बड़ा कलीसियाई विभाजन सामने आया।

बुधवार सुबह स्विट्ज़रलैंड के एकोन गाँव में आल्प्स की तलहटी में बारिश की फुहारों के बीच एक विशाल तंबू के नीचे हज़ारों लोग जमा हुए। चार घंटे तक चले इस अनुष्ठान में लैटिन भजन गूँजते रहे, धूप की सुगंध हवा में घुली रही और पुरोहितों की एक लंबी क़तार वेदी की ओर बढ़ती रही। यह कोई सामान्य प्रार्थना सभा नहीं थी—यह फ्रातेरनितास सासेरदोतालिस सांक्ती पीआई दस (एफ़एसएसपीएक्स) का वह क्षण था जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी और जिसे रोकने के लिए वैटिकन ने अंतिम क्षण तक हर संभव प्रयास किया।

समारोह के केंद्र में चार पुरोहित थे—स्विस पास्काल श्राइबर, अमेरिकी माइकल गोल्डेड, और फ़्रांसीसी मिशेल प्वाइंसिने द सिव्री और मार्क आनापिए—जिन पर बिशप अल्फ़ोंसो द गालारेता और बर्नार्ड फ़ेले ने हाथ रखकर उन्हें बिशप पद पर अभिषिक्त किया। यह कृत्य पोप लियो चौदहवें की स्पष्ट मनाही के बावजूद किया गया, जिन्होंने एक दिन पहले ही एक खुले पत्र में लिखा था: “मैं आपसे पूरे दिल से विनती करता हूँ—कृपया वापस लौट आइए!” पोप ने इसे “अत्यधिक गंभीरता का पाप” और “मसीह के निर्दोष वस्त्र को फाड़ने” जैसा बताया था। लेकिन एफ़एसएसपीएक्स के महाध्यक्ष दावीदे पाल्यारानी ने अपने प्रवचन में स्पष्ट किया: “हम कलीसिया की सेवा करना चाहते हैं, एक ऐसी माँ की तरह जो कठिनाई में है, जो पीड़ित है, जिसे कभी-कभी धोखा दिया गया है।”

यह समूह 1970 में फ़्रांसीसी आर्चबिशप मार्सेल लेफ़ेब्व्र द्वारा स्थापित किया गया था, जिन्होंने द्वितीय वैटिकन परिषद (1962-65) के आधुनिकीकरण सुधारों—विशेषकर धार्मिक स्वतंत्रता, ईसाई एकता और लैटिन के बजाय स्थानीय भाषा में मिस्सा—का कड़ा विरोध किया था। 1988 में ठीक इसी स्थान पर लेफ़ेब्व्र ने बिना पोपीय अनुमति के चार बिशप अभिषिक्त किए थे, जिसके बाद तत्कालीन पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें और नए बिशपों को बहिष्कृत कर दिया था। बाद में 2009 में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने उस बहिष्कार को वापस लेकर सुलह का प्रयास किया, लेकिन धार्मिक मतभेद कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। आज एफ़एसएसपीएक्स दुनिया भर में लगभग 600,000 अनुयायियों, 700 से अधिक पुरोहितों और 260 सेमिनरी छात्रों का दावा करता है, और यह 75 से अधिक देशों में सक्रिय है।

इस आयोजन ने वैश्विक दर्शकों को भी अपनी ओर खींचा। समारोह का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें कई भाषाओं में एक साथ अनुवाद की सुविधा थी। प्रसारण के दौरान स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड उभरा, जिससे दूर बैठे श्रद्धालु दान भेज सकते थे। इटली से कुछ दक्षिणपंथी राजनीतिक प्रतिनिधि भी वहाँ मौजूद थे, जिन्होंने इसे “परंपरा का ध्वज कभी न झुकाने” का प्रतीक बताया। वहीं वैटिकन के पूर्व सिद्धांत प्रमुख कार्डिनल गेरहार्ड म्यूलर ने एक साक्षात्कार में टिप्पणी की कि यह समूह “प्रोटेस्टेंटों से भी अधिक प्रोटेस्टेंट” जैसा व्यवहार कर रहा है, क्योंकि यह पोप को तभी स्वीकार करेगा जब पोप उनकी परंपरा की परिभाषा को मान लें।

समारोह के अंत में एक छोटी-सी लेकिन बताने लायक बात ने ध्यान खींचा: चारों नवनियुक्त बिशपों ने वही परिधान पहने थे जो 1988 में पहले विभाजन के समय इस्तेमाल किए गए थे। बारिश थम चुकी थी, और आल्प्स की पहाड़ियों पर बादल छँटने लगे थे। तंबू के बाहर एक स्टॉल पर “एकोन2026” लिखी टोपियाँ और स्मारिका स्वरूप शराब की बोतलें बिक रही थीं—हर बोतल पर बिशप की अँगूठी, क्रॉस या मुकुट जैसा कोई चिह्न अंकित था।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

10%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसअटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
आक्रोशसंदेह

The episcopal consecration carried out by the Lefebvrists in Écône is portrayed as a defiant act against papal authority, a schismatic gesture that undermines Church unity. The narrative highlights the rain and the atmosphere of isolation, almost symbolizing the break with Rome. The event is framed as an internal crisis within Catholicism, with tones of disapproval for the traditionalists' stubbornness.

अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
उदासीनताव्यंग्य

The story of the Lefebvrists ordaining bishops despite the papal ban is told with a detached tone, almost as a religious curiosity. The focus is on the internal conflict within the Church, but without taking a clear stance. The event is described as an episode of traditionalist rebellion, more picturesque than dramatic.

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लियाना की चीख: फ्रांस में यौन हिंसा के खिलाफ 110 शहरों में प्रदर्शन·ज़ेनोफोबिक हिंसा के बीच निकासी: 800 से अधिक नाइजीरियाई लौटे, मुआवज़े पर दक्षिण अफ्रीका का इनकार·विभिन्न देशों में सामने आई हिंसा की घटनाएं: किशोरियां और महिलाएं रहीं निशाना·ट्रंप बोले- 'नेतन्याहू जानते हैं बॉस कौन', ईरान परमाणु वार्ता एक हफ्ते के लिए टली·विस्मा की सामूहिक चमक, विंगेगार्ड ने पहली स्टेज में पीली जर्सी हासिल की·अर्जेंटीना को केप वर्डे ने दी कड़ी टक्कर, मेसी के सिर पर चोट और आखिरी क्षण की जीत·अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन: यूरोप पर अमेरिकी दबाव और इटली की कूटनीतिक पेंचीदगी·अल्थॉर्प की खामोश झील: हैरी की लंदन वापसी, मेगन और बच्चों के बिना·लियाना की चीख: फ्रांस में यौन हिंसा के खिलाफ 110 शहरों में प्रदर्शन·ज़ेनोफोबिक हिंसा के बीच निकासी: 800 से अधिक नाइजीरियाई लौटे, मुआवज़े पर दक्षिण अफ्रीका का इनकार·विभिन्न देशों में सामने आई हिंसा की घटनाएं: किशोरियां और महिलाएं रहीं निशाना·ट्रंप बोले- 'नेतन्याहू जानते हैं बॉस कौन', ईरान परमाणु वार्ता एक हफ्ते के लिए टली·विस्मा की सामूहिक चमक, विंगेगार्ड ने पहली स्टेज में पीली जर्सी हासिल की·अर्जेंटीना को केप वर्डे ने दी कड़ी टक्कर, मेसी के सिर पर चोट और आखिरी क्षण की जीत·अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन: यूरोप पर अमेरिकी दबाव और इटली की कूटनीतिक पेंचीदगी·अल्थॉर्प की खामोश झील: हैरी की लंदन वापसी, मेगन और बच्चों के बिना·
अपडेट 12:16 pm3 भाषाएँ · 5 स्रोत
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बुधवार, 1 जुलाई 2026

एकोन की बारिश में लैटिन प्रार्थनाएँ और एक नया धार्मिक विभाजन

स्विट्ज़रलैंड के एक मैदान में पारंपरिक कैथोलिक समूह ने पोप की चेतावनी को दरकिनार कर चार नए बिशपों का अभिषेक किया, जिससे स्वतः बहिष्कार और सदी का पहला बड़ा कलीसियाई विभाजन सामने आया।

बुधवार सुबह स्विट्ज़रलैंड के एकोन गाँव में आल्प्स की तलहटी में बारिश की फुहारों के बीच एक विशाल तंबू के नीचे हज़ारों लोग जमा हुए। चार घंटे तक चले इस अनुष्ठान में लैटिन भजन गूँजते रहे, धूप की सुगंध हवा में घुली रही और पुरोहितों की एक लंबी क़तार वेदी की ओर बढ़ती रही। यह कोई सामान्य प्रार्थना सभा नहीं थी—यह फ्रातेरनितास सासेरदोतालिस सांक्ती पीआई दस (एफ़एसएसपीएक्स) का वह क्षण था जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी और जिसे रोकने के लिए वैटिकन ने अंतिम क्षण तक हर संभव प्रयास किया।

समारोह के केंद्र में चार पुरोहित थे—स्विस पास्काल श्राइबर, अमेरिकी माइकल गोल्डेड, और फ़्रांसीसी मिशेल प्वाइंसिने द सिव्री और मार्क आनापिए—जिन पर बिशप अल्फ़ोंसो द गालारेता और बर्नार्ड फ़ेले ने हाथ रखकर उन्हें बिशप पद पर अभिषिक्त किया। यह कृत्य पोप लियो चौदहवें की स्पष्ट मनाही के बावजूद किया गया, जिन्होंने एक दिन पहले ही एक खुले पत्र में लिखा था: “मैं आपसे पूरे दिल से विनती करता हूँ—कृपया वापस लौट आइए!” पोप ने इसे “अत्यधिक गंभीरता का पाप” और “मसीह के निर्दोष वस्त्र को फाड़ने” जैसा बताया था। लेकिन एफ़एसएसपीएक्स के महाध्यक्ष दावीदे पाल्यारानी ने अपने प्रवचन में स्पष्ट किया: “हम कलीसिया की सेवा करना चाहते हैं, एक ऐसी माँ की तरह जो कठिनाई में है, जो पीड़ित है, जिसे कभी-कभी धोखा दिया गया है।”

यह समूह 1970 में फ़्रांसीसी आर्चबिशप मार्सेल लेफ़ेब्व्र द्वारा स्थापित किया गया था, जिन्होंने द्वितीय वैटिकन परिषद (1962-65) के आधुनिकीकरण सुधारों—विशेषकर धार्मिक स्वतंत्रता, ईसाई एकता और लैटिन के बजाय स्थानीय भाषा में मिस्सा—का कड़ा विरोध किया था। 1988 में ठीक इसी स्थान पर लेफ़ेब्व्र ने बिना पोपीय अनुमति के चार बिशप अभिषिक्त किए थे, जिसके बाद तत्कालीन पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें और नए बिशपों को बहिष्कृत कर दिया था। बाद में 2009 में पोप बेनेडिक्ट सोलहवें ने उस बहिष्कार को वापस लेकर सुलह का प्रयास किया, लेकिन धार्मिक मतभेद कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। आज एफ़एसएसपीएक्स दुनिया भर में लगभग 600,000 अनुयायियों, 700 से अधिक पुरोहितों और 260 सेमिनरी छात्रों का दावा करता है, और यह 75 से अधिक देशों में सक्रिय है।

इस आयोजन ने वैश्विक दर्शकों को भी अपनी ओर खींचा। समारोह का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें कई भाषाओं में एक साथ अनुवाद की सुविधा थी। प्रसारण के दौरान स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड उभरा, जिससे दूर बैठे श्रद्धालु दान भेज सकते थे। इटली से कुछ दक्षिणपंथी राजनीतिक प्रतिनिधि भी वहाँ मौजूद थे, जिन्होंने इसे “परंपरा का ध्वज कभी न झुकाने” का प्रतीक बताया। वहीं वैटिकन के पूर्व सिद्धांत प्रमुख कार्डिनल गेरहार्ड म्यूलर ने एक साक्षात्कार में टिप्पणी की कि यह समूह “प्रोटेस्टेंटों से भी अधिक प्रोटेस्टेंट” जैसा व्यवहार कर रहा है, क्योंकि यह पोप को तभी स्वीकार करेगा जब पोप उनकी परंपरा की परिभाषा को मान लें।

समारोह के अंत में एक छोटी-सी लेकिन बताने लायक बात ने ध्यान खींचा: चारों नवनियुक्त बिशपों ने वही परिधान पहने थे जो 1988 में पहले विभाजन के समय इस्तेमाल किए गए थे। बारिश थम चुकी थी, और आल्प्स की पहाड़ियों पर बादल छँटने लगे थे। तंबू के बाहर एक स्टॉल पर “एकोन2026” लिखी टोपियाँ और स्मारिका स्वरूप शराब की बोतलें बिक रही थीं—हर बोतल पर बिशप की अँगूठी, क्रॉस या मुकुट जैसा कोई चिह्न अंकित था।

स्रोतों में मतभेद

समाज और संस्कृति · 5 स्रोत · 3 भाषाएँ

10%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र8%
निंदक92%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसअटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
आक्रोशसंदेह

The episcopal consecration carried out by the Lefebvrists in Écône is portrayed as a defiant act against papal authority, a schismatic gesture that undermines Church unity. The narrative highlights the rain and the atmosphere of isolation, almost symbolizing the break with Rome. The event is framed as an internal crisis within Catholicism, with tones of disapproval for the traditionalists' stubbornness.

अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
उदासीनताव्यंग्य

The story of the Lefebvrists ordaining bishops despite the papal ban is told with a detached tone, almost as a religious curiosity. The focus is on the internal conflict within the Church, but without taking a clear stance. The event is described as an episode of traditionalist rebellion, more picturesque than dramatic.

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