
सुदूर ग्रहों से लेकर पृथ्वी पर गिरे उल्कापिंड तक, जीवन के संकेतों की खोज में नए मोड़
एक सुपर-अर्थ पर वायुमंडल की पुष्टि, एक डार्क कॉमेट की पहचान और कार्बनिक अणुओं वाले उल्कापिंड ने ग्रहों के विकास और जीवन की संभावनाओं पर ताज़ा रोशनी डाली है।
खगोलविदों ने पहली बार किसी चट्टानी सुपर-अर्थ के ऊपरी वायुमंडल में हीलियम की उपस्थिति की पुष्टि की है, जो रहने योग्य क्षेत्र में स्थित है। चिली के लास कैम्पानास वेधशाला में मैगलन क्ले टेलीस्कोप पर लगे वाइनरेड उपकरण से एकत्र आंकड़ों के अनुसार, एलएचएस 1140 बी नामक यह ग्रह पृथ्वी से 48 प्रकाश वर्ष दूर है और अपने तारे का एक चक्कर 24.7 दिनों में पूरा करता है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन ने, जो जुलाई 2026 में साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ, यह स्पष्ट किया कि ग्रह से धीरे-धीरे अंतरिक्ष में क्षरित हो रही हीलियम गैस ने वायुमंडल की मौजूदगी का ठोस संकेत दिया। यह खोज इसलिए अहम है क्योंकि अधिकांश चट्टानी ग्रह अपने तारों के तीव्र विकिरण से वायुमंडल खो देते हैं, लेकिन एलएचएस 1140 बी ने अरबों वर्षों तक इसे बचाए रखा, जिससे सतह पर जल की संभावना बनी रह सकती है।
इसी बीच, सौर मंडल की वस्तुओं की हमारी समझ भी बदल रही है। 27 वर्षों तक एक सामान्य क्षुद्रग्रह समझा जाने वाला 1998 एसएच2, अगस्त 2025 में पृथ्वी के करीब से गुज़रने के दौरान देखे गए अप्रत्याशित त्वरण के कारण अब एक ‘डार्क कॉमेट’ के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया गया है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी और नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित शोध के अनुसार, इस वस्तु से अत्यंत कम मात्रा में गैस निकलती है, जो दृश्य पूंछ तो नहीं बनाती लेकिन इसकी कक्षा को प्रभावित करती है। यह खोज ग्रहीय रक्षा प्रणालियों के लिए अहम है, क्योंकि ऐसी गैसीय गतिविधि भविष्य में वस्तुओं के प्रक्षेप पथ की भविष्यवाणी को जटिल बना सकती है। दूसरी ओर, यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के खगोलविदों ने बीटा पिक्टोरिस तारा प्रणाली में अब तक के सबसे धुंधले एक्सोप्लैनेट की सीधी तस्वीर ली है। 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित बीटा पिक्टोरिस डी का द्रव्यमान बृहस्पति से 2.4 गुना है और इसके वायुमंडल में कार्बन मोनोऑक्साइड, जलवाष्प और मीथेन पाए गए हैं। प्रत्यक्ष चित्रण विधि से अब तक 6,000 से भी कम एक्सोप्लैनेट खोजे गए हैं, जो इस तकनीक की चुनौती को दर्शाता है।
जीवन के संकेतों की खोज में के2-18बी एक विवादास्पद लेकिन आकर्षक पिंड बना हुआ है। 124 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह ‘हाइसियन’ ग्रह संभवतः हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडल के नीचे एक विशाल महासागर समेटे हुए है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के निक्कू मधुसूदन के नेतृत्व में एक दल ने पिछले वर्ष इसके वायुमंडल में डाइमिथाइल सल्फाइड (डीएमएस) के संभावित स्पेक्ट्रल चिह्न की सूचना दी थी—एक ऐसा यौगिक जो पृथ्वी पर केवल जीवों द्वारा निर्मित होता है। हालांकि, कई वैज्ञानिकों ने इस विश्लेषण की जटिलता को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि दूरस्थ ग्रहों के स्पेक्ट्रम में इच्छित परिणाम देख लेने का जोखिम बना रहता है। इसी ग्रह से रेडियो संकेतों की खोज का एक अलग प्रयास भी किया गया, लेकिन अभी तक कोई कृत्रिम संकेत नहीं मिला है।
पृथ्वी पर गिरे एक उल्कापिंड ने भी जीवन के निर्माण खंडों को लेकर नई जानकारी दी है। जुलाई 2024 में अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित हिल्सबरो में एक आवासीय भवन की छत को भेदकर गिरे इस पिंड के 1.4 किलोग्राम टुकड़े तुरंत सुरक्षित कर लिए गए, जिससे पर्यावरणीय संदूषण से बचाव हुआ। साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इस उल्कापिंड में जटिल कार्बनिक अणु और खारे पानी के प्रमाण मिले हैं—ऐसे ही पिंड अरबों वर्ष पहले पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक यौगिक लाए होंगे। सेटी इंस्टीट्यूट के पीटर जेनिस्केंस ने इसे ‘बहुत खास’ बताया, क्योंकि इस प्रकार के उल्कापिंड अत्यंत भंगुर होते हैं और तेज़ी से दूषित हो जाते हैं।
इन सभी खोजों का अगला साझा पड़ाव अवलोकन क्षमताओं का विस्तार है। एलएचएस 1140 बी के वायुमंडल में जलवाष्प और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अणुओं की पहचान के लिए जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के आगामी अवलोकन निर्धारित हैं, जबकि नासा का एनईओ सर्वेयर मिशन डार्क कॉमेट जैसी वस्तुओं की पहचान को बेहतर बनाएगा।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.70 | aligned |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.20 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.80 | aligned |
The meteorite that crashed into a home is not just a rock, but a cosmic messenger that science has deciphered, turning a random event into an extraordinary discovery.
By telling the story from the perspective of the affected couple, an emotional connection is created that makes science accessible and triumphant.
K2-18b is an alien world unlike anything in our solar system, and only by searching for civilizations can we hope to understand it.
By emphasizing uncertainty and mystery, curiosity is fueled and the search for intelligent life is justified as a priority.
LHS 1140 b shows that life could exist elsewhere, and this discovery is a success for all humanity, including Iranian science.
By linking the discovery to global progress and including Iran in the narrative, a sense of participation and national pride is created.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता: यूरेनियम संवर्धन की छूट और अप्रसार चिंताएँ
6 भाषाएँ · 24 स्रोत
Economy & Markets सेAlphabet का क्लाउड राजस्व 82% उछला, पर AI खर्च ने पहली बार नकदी प्रवाह को नकारात्मक किया
10 भाषाएँ · 26 स्रोत
Technology सेओपनएआई के एआई मॉडलों ने सुरक्षा परीक्षण के दौरान खुद हैकिंग की, चीनी मॉडल से हुआ बचाव
8 भाषाएँ · 25 स्रोत