
एमबापे ने पेनाल्टी से दिलाई जीत, बोले- 'हम गंदा खेलना भी जानते हैं'
विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस की 1-0 से जीत के बाद कप्तान एमबापे ने विरोधियों की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टीम ज़रूरत पड़ने पर कठोर खेल खेलने में सक्षम है।
फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में शनिवार को फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया। करीब 70 मिनट तक पैराग्वे की कसी हुई रक्षा ने फ्रांसीसी आक्रमण को बांधे रखा, लेकिन डिएगो गोमेज़ द्वारा डेज़िरे डूए पर फाउल के बाद मिली पेनाल्टी को एमबापे ने गोल में बदल दिया। यह इस टूर्नामेंट में उनका सातवां गोल और विश्व कप करियर का 19वां गोल था, जिससे वे लियोनेल मेस्सी के साथ शीर्ष स्कोरर की सूची में आ खड़े हुए।
मुकाबला पूरे 90 मिनट तक शारीरिक टकराव और उकसावे से भरा रहा। पैराग्वे के खिलाड़ियों ने एमबापे को खासतौर पर निशाना बनाया—धक्कामुक्की, बहस, और पेनाल्टी स्पॉट को बिगाड़ने की कोशिश भी की गई। रेफरी ने केवल तीन पीले कार्ड दिए, तीनों फ्रांस के खिलाफ, जो इस उबलते माहौल में अनुशासन की विचित्र तस्वीर पेश करता है। दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इस गर्मी और वाकयुद्ध पर फोकस किया, जबकि एशियाई और यूरोपीय रिपोर्टों में फ्रांस की हर माहौल में ढलने की क्षमता को रेखांकित किया गया।
जीत के बाद एमबापे बेलाग लहजे में बोले: “हमें पता था ऐसा ही मैच होने वाला है। अगर वे हमें गाली देते हैं, तो हम भी उन्हें गाली देते हैं।” उन्होंने साफ कहा कि फ्रांस सिर्फ आकर्षक हमलावर फुटबॉल नहीं खेलता: “उन्होंने सोचा था हम सूट-बूट पहनकर आएंगे और सिर्फ खूबसूरत चालें दिखाएंगे, पर हम गंदा फुटबॉल खेलना भी जानते हैं। ज़रूरत पड़ी तो हम हाथ गंदे करने से नहीं हिचकिचाएंगे।” कोच देसाँ ने भी बताया कि अंतिम मिनटों में उन्होंने दो मज़बूत खिलाड़ियों को एमबापे की सुरक्षा के लिए तैनात किया, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि पैराग्वे के खिलाड़ी उन्हें गिराने की कोशिश कर सकते हैं।
यह जीत फ्रांस को लगातार चौथी बार विश्व कप के अंतिम-8 में ले गई। अब उनका सामना बोस्टन में मोरक्को से होगा—2022 सेमीफाइनल की पुनरावृत्ति, जहां एमबापे के सामने उनके दोस्त अशरफ हकीमी होंगे। मैच के बाद एमबापे ने एक्स पर ‘Un jour au boulot...’ (कामकाजी दिन) लिखा, जो इस संघर्षपूर्ण प्रदर्शन को एक पेशेवर दिनचर्या की तरह देखने की मानसिकता दर्शाता है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
European football masquerades as fair but admits its own dirtiness: Mbappé confessed what South Americans have always known.
An isolated admission is turned into systemic proof of hypocrisy, generalizing one player's remark to an entire football culture.
The tactical context of the match (fouls suffered, provocations from Paraguay) that could explain Mbappé's reaction is omitted.
The result and Mbappé's statement are news facts, not fodder for moral crusades.
A detached, descriptive tone is adopted, avoiding any judgment or contextualization that could politicize the episode.
Any reference to the traditional rivalry between European and South American football, which emerges in other blocs, is omitted.
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