
वैश्विक उभरते बाजारों का दबदबा, इंडोनेशिया-भारत में मजबूती, ईरानी बाजार में सतर्कता
एशिया-केंद्रित उभरते बाजार सूचकांकों ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन इस सप्ताह क्षेत्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया।
पिछले 15 महीनों में एमएससीआई उभरते बाजार सूचकांक ने विकसित बाजारों के मुकाबले 55% से अधिक रिटर्न दिया है, जबकि इस अवधि में विकसित बाजार केवल 18% ही बढ़ पाए। एशियाई बाजार इस प्रदर्शन के मुख्य चालक रहे, जहां प्रौद्योगिकी और कंपोजिट क्षेत्रों का दबदबा है। 15-19 जून, 2026 के सप्ताह में इंडोनेशिया का आईएचएसजी 2.82% चढ़कर 6,177 पर और भारत का निफ्टी 1.65% बढ़कर 24,013 पर बंद हुआ। इंडोनेशिया में बाजार पूंजीकरण 264 ट्रिलियन रुपिया बढ़ा, जबकि भारत में सेंसेक्स 1.69% ऊपर 76,803 पर पहुंचा। हालांकि, इंडोनेशिया में औसत दैनिक कारोबार वॉल्यूम और मूल्य में गिरावट आई, जो कुछ सतर्कता का संकेत है।
भारतीय बाजार में कंपनी-विशिष्ट खबरों से जोरदार तेजी देखी गई। नई इंडिया एश्योरेंस (एनआईएसीएल) के शेयर 37.7% उछले, क्योंकि एनएसई ने 30,000 करोड़ रुपये के आईपीओ का मसौदा दाखिल किया और एनआईएसीएल उसमें बिक्री करने वाली शेयरधारक है। एचएफसीएल को भारतनेट परियोजना के तहत 2,666 करोड़ रुपये का ठेका मिलने से इसमें 28.1% की बढ़त रही। कार्बोरंडम यूनिवर्सल ने भी 24.4% की छलांग लगाई। इंडोनेशियाई बाजार में पीटी मेगा पेरिन्टिस (ज़ोन) 60.29% की उछाल के साथ शीर्ष लाभार्थी रहा, जबकि विदेशी निवेशकों ने साप्ताहिक शुद्ध बिक्री 904 अरब रुपिया दर्ज की, जो पिछले सप्ताह के 5.98 ट्रिलियन रुपिया से काफी कम है। फिर भी, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल शुद्ध बिक्री 68.25 ट्रिलियन रुपिया पहुंच गई है।
ईरान के बाजार में शुरुआती जोरदार खरीदारी के बाद सतर्कता हावी हो गई। 30 खोरदाद (20 जून) को तेहरान स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक 65 हजार अंक उछलकर 5.2 मिलियन के प्रतिरोध स्तर को छूने के बाद आपूर्ति दबाव में आ गया। खरीद ऑर्डरों का मूल्य 23.7 हजार अरब तोमान तक पहुंचा था, लेकिन बाद में बिक्री ऑर्डरों की संख्या खरीद ऑर्डरों से अधिक हो गई और वास्तविक निवेशकों ने मुनाफावसूली की। कारोबार के दौरान बाजार से 3,942 अरब तोमान की पूंजी निकल गई। विश्लेषकों के अनुसार, 5.2 मिलियन का स्तर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है और इसे पार करने के लिए सकारात्मक राजनीतिक या आर्थिक समाचारों की आवश्यकता होगी।
उभरते बाजारों के मौजूदा तेजी के रुझान के बीच निवेशकों को सूचकांक की संरचना पर ध्यान देना चाहिए। एमएससीआई ईएम में अब 80% से अधिक भार एशिया का है, जिसमें ताइवान (25%), चीन (23%) और कोरिया (18%) प्रमुख हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र का भार 37% तक पहुंच गया है, और टीएसएमसी, सैमसंग जैसे दिग्गजों पर सूचकांक की निर्भरता बढ़ी है। हालांकि मूल्यांकन अब भी विकसित बाजारों की तुलना में आकर्षक है, लेकिन एकाग्रता जोखिम को देखते हुए लैटिन अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका या पूर्वी यूरोप जैसे अन्य भूगोलों पर केंद्रित फंडों में विविधता लाना समझदारी होगी। अगला ध्यान देने योग्य बिंदु एनएसई का आईपीओ और वैश्विक कमोडिटी कीमतों का रुख होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Indonesia's IHSG posted a solid weekly gain of 2.82%, driven by record volumes and a market cap increase of 264 trillion rupiah. Local bourses celebrate stellar performances like ZONE's 60% surge, signaling strong domestic confidence.
Indian stock markets shone, with Nifty 50 up 1.65% and Sensex 1.69% on positive news like the NSE IPO. Stocks like NIACL and HFCL gained up to 37%, reflecting selective euphoria driven by specific catalysts.
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