
हार के बाद इक्वाडोर-कुरासाओ की अहम जंग, पहली जीत की तलाश में दोनों टीमें
ग्रुप ई में दूसरे मुकाबले में इक्वाडोर और कुरासाओ अपनी-अपनी हार के बाद पहली जीत दर्ज करने के इरादे से उतरेंगी, जहां दोनों के लिए यह मैच करो या मरो की स्थिति में बदल गया है।
कैनसस सिटी स्टेडियम में खेले गए ग्रुप ई के इस मुक़ाबले में हार का सामना कर चुकी दोनों टीमें अपना पहला जीत दर्ज करने को बेताब थीं। इक्वाडोर को अपने पहले मैच में कोटे डी आइवर के हाथों अंतिम क्षणों में 1-0 से हार झेलनी पड़ी थी, जिसने उसकी 19 मैचों की अजेयता का सिलसिला तोड़ दिया। वहीं विश्व कप में पदार्पण कर रही कुरासाओ को जर्मनी ने 7-1 से रौंदा, लेकिन लिवानो कोमेनेनिया के ऐतिहासिक गोल से टीम ने दुनिया की एक बड़ी ताकत के खिलाफ अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इक्वाडोर के लिए यह मुकाबला दबाव से भरा था, क्योंकि कोच सेबेस्टियन बेक्कासेसे पर आलोचनाओं के तीर चल रहे थे। टीम में एनर वालेंसिया, मोईसेस कैसदो और पिएरो हिंकापी जैसे सितारे मौजूद थे, जिनके यूरोपीय अनुभव से जीत की उम्मीद बंधी हुई थी। दूसरी ओर, कुरासाओ की टीम एक अनोखी कहानी लेकर आई थी — उसके 26 खिलाड़ियों में से 25 खिलाड़ी नीदरलैंड की धरती पर पैदा हुए थे, सिर्फ ताहित चोंग अपवाद थे। यह दल औपनिवेशिक संबंधों की खेल विरासत को दर्शाता है, जिसकी कमान 78 वर्षीय अनुभवी कोच डिक अडवोकात के हाथों में थी — जो इस टूर्नामेंट के सबसे उम्रदराज प्रशिक्षक बन गए।
मैदान पर इक्वाडोर ने आक्रामक शुरुआत की और गोल करने के लिए लगातार हमले बोले। हालांकि, कोटे डी आइवर के खिलाफ दिखी गोल मुंह की कमज़ोरी यहां भी शुरुआती मिनटों तक हावी रही। लेकिन जल्द ही इक्वाडोर के तेज़ विंगरों ने कुरासाओ की रक्षापंक्ति को खासा परेशान किया, और मैच के पहले हाफ में ही दो गोल करके उसने अपनी पकड़ मज़बूत कर ली। कुरासाओ की टीम हार के बावजूद जुझारूपन दिखाती रही, लेकिन उसका अनुभवहीनता साफ नज़र आई।
इस जीत ने इक्वाडोर के लिए अगले दौर के दरवाज़े खोल दिए, हालांकि उसका अगला मुकाबला जर्मनी जैसे सशक्त प्रतिद्वंदी से है, जो अपने पहले मैचों में दमदार प्रदर्शन कर चुका था। कुरासाओ की उम्मीदें अब बेहद धूमिल हो गईं और उसे अंतिम मैच में कोटे डी आइवर से खेलना है, जहाँ केवल एक बड़ी जीत और अन्य नतीजों का सहारा हो सकता है। ग्रुप ई की स्थिति अब रोमांचक हो गई है, जहाँ हर मैच के बाद समीकरण बदल सकते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इक्वाडोर पहले मैच में दर्दनाक हार के बाद कुराकाओ के खिलाफ अनिवार्य जीत वाले मुकाबले में उतरेगा। दो दशकों में पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचने की उम्मीदों को जीवित रखने के लिए जीत आवश्यक है, जबकि जर्मनी के खिलाफ कठिन मुकाबला सामने है।
इक्वाडोर और कुराकाओ दोनों अपने पहले मैच हारने के बाद आमने-सामने होंगे। इक्वाडोर को प्रतियोगिता में बने रहने के लिए जीतना होगा, जिससे कोच बेकाकेसे पर काफी दबाव है।
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