
मॉस्को पर दो दिन में सैकड़ों ड्रोन हमले, तेल रिफाइनरी में आग; रूस ने 172 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए
रूस ने 16 और 17 जून को यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमलों का सामना किया, मॉस्को के पास 60 से अधिक ड्रोन नष्ट हुए और कापोतनिया रिफाइनरी में विस्फोट से भीषण आग लगी।
रूस की राजधानी मॉस्को पर लगातार दो दिन तक यूक्रेनी ड्रोनों की भारी बौछार ने युद्ध के बढ़ते हवाई आयाम को उजागर कर दिया। मंगलवार सुबह मॉस्को के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित कापोतनिया तेल रिफाइनरी पर एक या कई ड्रोन के हमले से जबरदस्त विस्फोट हुआ और काला धुआँ उठता दिखा। यह रिफाइनरी राजधानी की करीब 40 प्रतिशत हाइड्रोकार्बन जरूरतें पूरी करती है, इसलिए आग ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि सोमवार सुबह भी एक ड्रोन ने मॉस्को ऑयल रिफाइनरी की एक इकाई को नुकसान पहुँचाया था, हालाँकि उस आग पर तुरंत काबू पा लिया गया।
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 15-16 जून की रात के दौरान कुल 172 यूक्रेनी ड्रोनों को अज़ोव सागर, काला सागर और देश के कई क्षेत्रों के ऊपर मार गिराया गया, जिनमें अकेले मॉस्को क्षेत्र की ओर बढ़ रहे 60 ड्रोन शामिल थे। इसके ठीक अगली रात यानी 16-17 जून को वायु रक्षा प्रणालियों ने 157 ड्रोन नष्ट किए, जो बेलगोरोद, ब्रयांस्क, कुर्स्क, कालूगा, तूला, ओर्योल, स्मोलेंस्क, लिपेत्स्क, त्वेर, रियाज़ान, रोस्तोव, आस्त्राखान, क्रास्नोदार, क्रीमिया और मॉस्को क्षेत्र के आसमान में घुस आए थे। मॉस्को के नज़दीक इस रात 18 से 25 ड्रोन गिराए गए, जिनका मलबा गिरने से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
हमलों का सिलसिला दिन में भी जारी रहा। 17 जून को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक पाँच घंटे की अवधि में रूसी सेना ने 11 क्षेत्रों और काला सागर के ऊपर 72 और ड्रोन मार गिराए। इसी बीच रूसी सैन्य सूत्रों ने बताया कि यूक्रेन के अंदर ‘विशेष सैन्य अभियान’ क्षेत्र में 101 ड्रोन नियंत्रण केंद्रों को ध्वस्त कर दिया गया, जिनमें ‘पश्चिम’, ‘उत्तर’ और ‘पूर्व’ समूहों की कार्रवाइयाँ शामिल थीं। यह रूस की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें ड्रोन हमलों की लहर को स्रोत पर ही कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को जैसे सघन रक्षा वाले शहर पर इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन का पहुँचना वायु रक्षा की सीमाओं और ड्रोन युद्ध की नई वास्तविकता को रेखांकित करता है। यूक्रेन ने सस्ते, छोटे और झुंड में उड़ने वाले ड्रोनों के ज़रिये रूसी प्रतिरोधक क्षमता की परीक्षा ली है, जिसका असर नागरिक बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर पड़ रहा है। दक्षिण एशिया के लिए यह घटनाक्रम एक चेतावनी है—भारत समेत इस क्षेत्र के देश सीमा पार से ड्रोन घुसपैठ और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों की आशंका से जूझ रहे हैं। मॉस्को रिफाइनरी की आग यह भी बताती है कि आधुनिक संघर्ष में ऊर्जा केंद्र कितनी आसानी से निशाना बन सकते हैं, ऐसे में निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और सक्रिय वायु रक्षा की बहुस्तरीय प्रणाली विकसित करना अब वैश्विक प्राथमिकता बन गई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी वायु रक्षा ने यूक्रेनी ड्रोनों के एक बड़े हमले को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया, एक ही रात में 150 से अधिक को मार गिराया, जिनमें मॉस्को की ओर आ रहे दर्जनों ड्रोन शामिल थे। अधिकारियों ने न्यूनतम क्षति की सूचना दी और राजधानी की सुरक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता पर जोर दिया।
रूस ने कहा कि उसने रात भर में 172 यूक्रेनी ड्रोनों को रोका और नष्ट किया, जिनमें मॉस्को क्षेत्र में 60 शामिल थे। रिपोर्टें आधिकारिक आंकड़ों तक सीमित हैं और कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करतीं, हमले को राजधानी पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक बताती हैं।
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