
तुर्की के विदेश मंत्री मास्को में: यूक्रेन वार्ता और काला सागर सुरक्षा पर बातचीत की उम्मीद
हाकान फ़िदान की रूस यात्रा के दौरान शांति वार्ता की पेशकश, काला सागर में तनाव और दक्षिण काकेशस की स्थिरता प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फ़िदान 16-17 जून को मास्को की अहम यात्रा पर हैं, जहाँ वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात की उम्मीद कर रहे हैं। तुर्की के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, फ़िदान पहले अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव और सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु से बातचीत करेंगे। इस यात्रा का केंद्र बिंदु यूक्रेन संकट को लेकर तुर्की की मध्यस्थता की पेशकश होगी, जिसे राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन ने अप्रैल में पुतिन के समक्ष रखा था। अंकारा का मानना है कि बढ़ता तनाव क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए ख़तरा है, इसलिए वह काला सागर में नौवहन सुरक्षा और दक्षिण काकेशस की स्थिति पर भी गंभीर चर्चा करना चाहता है।
रूसी पक्ष इस मुलाक़ात को द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के अवसर के रूप में देख रहा है, ख़ासकर पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के मद्देनज़र। वहीं तुर्की, जो 2022 के रूसी आक्रमण के बाद से मास्को और कीव दोनों से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए हुए है, जुलाई में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मज़बूत करना चाहता है। अरब मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार, कीव ने अप्रैल में ही अंकारा से नेतृत्व स्तर की बैठक की मेज़बानी का अनुरोध किया था, जिससे यह स्पष्ट है कि यूक्रेन भी तुर्की को एक स्वीकार्य मध्यस्थ मानता है।
काला सागर में सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ़ युद्धरत देशों तक सीमित नहीं है। अनाज निर्यात गलियारे के बाधित होने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर दक्षिण एशिया और भारत जैसे बड़े आयातकों पर पड़ता है। हालाँकि भारत ने सीधे मध्यस्थता की भूमिका नहीं अपनाई है, लेकिन काला सागर में शिपिंग सुरक्षा और ऊर्जा मार्गों की स्थिरता उसकी आर्थिक रणनीति के लिए अहम हैं। तुर्की की यह पहल अगर सफल होती है, तो इससे न केवल अनाज की कीमतों में नरमी आएगी, बल्कि विकासशील देशों के लिए वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग भी खुल सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि फ़िदान की यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं है। तुर्की पिछले कुछ वर्षों में रूस और पश्चिम के बीच एक अनोखा सेतु बनकर उभरा है, और अब वह इस संतुलन को ठोस कूटनीतिक उपलब्धियों में बदलने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, काला सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ और दक्षिण काकेशस में आर्मीनिया-अज़रबैजान के बीच तनाव इस प्रयास को जटिल बना सकते हैं। आने वाले दिनों में मास्को से निकलने वाले संकेत यह तय करेंगे कि क्या यह पहल किसी ठोस वार्ता प्रक्रिया की नींव रख पाती है या महज़ एक और कूटनीतिक मुलाक़ात बनकर रह जाती है।
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तुर्की के शीर्ष राजनयिक मास्को पहुंचे हैं, राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की उम्मीद में, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में रूस की अपरिहार्य भूमिका की अंकारा की मान्यता को दर्शाता है। वार्ता में रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि होगी और रूस-यूक्रेन वार्ता की मेजबानी की तुर्की की तत्परता का पता लगाया जाएगा, जिसमें काला सागर की स्थिरता साझा चिंता है।
तुर्की के विदेश मंत्री मास्को का दौरा कर रहे हैं ताकि रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की अंकारा की पेशकश को दोहराया जा सके, दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंधों का लाभ उठाते हुए। चर्चा में काला सागर में नौवहन सुरक्षा और दक्षिण काकेशस में स्थिरता भी शामिल होगी, जो तुर्की की क्षेत्रीय कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है।
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