
जी7 में ट्रंप का ईरान समझौते पर जोर: आर्थिक तबाही टालने और परमाणु दीवार खड़ी करने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि युद्ध जारी रहने से वैश्विक मंदी आ सकती थी, अब हरमुज़ जलडमरूमध्य खुलेगा और ईरान समृद्ध यूरेनियम सौंपेगा।
फ्रांस के एवियां-ले-बैं में बुधवार को संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए अंतरिम समझौते का पुरज़ोर बचाव किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि यदि संघर्ष जारी रहता तो दुनिया आर्थिक तबाही की चपेट में आ सकती थी। ट्रंप ने 1929 की महामंदी के दौरान राष्ट्रपति रहे हर्बर्ट हूवर का हवाला देते हुए चेताया कि लंबा युद्ध वैश्विक बाज़ारों को ध्वस्त कर सकता था, जिससे ऊर्जा कीमतें आसमान छूतीं और मुद्रास्फीति बेकाबू हो जाती। उनका यह बयान ऐसे समय आया जब दुनिया भर के बाज़ार महीनों के संघर्ष के कारण बाधित तेल आपूर्ति और प्रमुख जहाज़रानी मार्गों पर मंडराते ख़तरे के प्रभावों का आकलन कर रहे थे।
समझौते की शर्तों पर प्रकाश डालते हुए ट्रंप ने बताया कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम सौंपेगा, जिससे परमाणु हथियार बनाने की उसकी क्षमता पर हमेशा के लिए रोक लग जाएगी। उन्होंने इसे 'परमाणु हथियार के ख़िलाफ़ एक दीवार' करार दिया। साथ ही, हार्मुज़ जलडमरूमध्य — जो वैश्विक तेल व्यापार की धमनी है — को फिर से खोलने की बात कही, जिसके बंद रहने से एशियाई और यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि समझौते के तहत ईरान को 300 अरब डॉलर के कोष तक पहुंच तभी मिलेगी जब वह 'अच्छा व्यवहार' करेगा, और एक स्पेनिश भाषा की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इसे 'शासन परिवर्तन' जैसी उपलब्धि बताया।
विभिन्न भू-राजनीतिक क्षेत्रों में इस समझौते को लेकर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। यूरोपीय नेताओं, विशेषकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस पहल का स्वागत किया, जबकि लैटिन अमेरिकी मीडिया ने परमाणु अप्रसार पहलू को रेखांकित किया। मध्य पूर्व के विश्लेषकों का ध्यान आर्थिक स्थिरता पर केंद्रित रहा, वहीं भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से अहम है। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, और हार्मुज़ मार्ग में रुकावट से उसकी आयात लागत और महंगाई बढ़ने का सीधा ख़तरा था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह समझौता राहत की संभावना लेकर आया है। यदि हार्मुज़ जलडमरूमध्य सुचारू रूप से खुलता है तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है, जिससे मुद्रास्फीति के दबाव से जूझ रहे केंद्रीय बैंकों को सांस लेने का मौका मिलेगा। हालांकि, विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि यह अंतरिम सहमति अभी औपचारिक संधि से दूर है और ईरान द्वारा यूरेनियम की वास्तविक सौंप प्रक्रिया तथा धन के उपयोग की निगरानी जटिल होगी। ट्रंप का 'शासन परिवर्तन' वाला बयान तेहरान में नई तनातनी पैदा कर सकता है, लेकिन फ़िलहाल वैश्विक बाज़ारों और दक्षिण एशिया की ऊर्जा-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने ईरान समझौते का बचाव करते हुए कहा कि इससे वैश्विक आर्थिक तबाही टल गई। उन्होंने तर्क दिया कि लंबा युद्ध बाजारों को झटका दे सकता था, और यह समझौता स्थिरता के लिए ज़रूरी था।
ट्रंप ने ईरान समझौते को एक जीत के रूप में सराहा जो आर्थिक तबाही को टालता है और सभी लक्ष्यों को 'और भी बहुत कुछ' हासिल करता है। उन्होंने 'परमाणु हथियार के खिलाफ दीवार' का वादा किया, बताया कि तेहरान समृद्ध यूरेनियम सौंपेगा, और कहा कि ईरान 300 अरब डॉलर तक तभी पहुँच सकता है जब वह अच्छा व्यवहार करे।
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