
स्क्रीन के साए में खिलौनों की आखिरी जंग: क्यों ‘टॉय स्टोरी 5’ बनी अभिभावकों की आईना
पिक्सर की पाँचवीं किस्त रिकॉर्ड कमाई के साथ खिलौनों और टैबलेट के बीच बचपन की उस नई सच्चाई को सामने लाती है, जिसे हर माँ-बाप जी रहे हैं।
जब ब्राज़ील के एक पिता ने अपने छोटे बेटे के साथ फ़र्श पर खिलौने बिछाए और बज़ लाइटईयर को ‘पेट्रोल कैनाइन’ की सवारी में बैठाकर उल्कापात से बचाने का खेल रचा, तो अचानक उनके मन में एक चुभन उठी—बच्चे ने तो ये सारे किरदार स्क्रीन पर देखे थे, कहीं यह सब देखना-दिखाना ज़्यादा तो नहीं हो गया? यही बेचैनी ‘टॉय स्टोरी 5’ की बुनियाद बनी।
नई कहानी में बॉनी के माता-पिता उसकी कल्पनाशीलता को दोस्त बनाने में मदद करने के लिए एक टैबलेट लिलीपैड लाते हैं, लेकिन वह स्क्रीन जल्द ही लड़की के जागते हर पल को निगलने लगती है। एक मायूस कर देने वाले दृश्य में, सालों पहले त्याग दिया गया एक खिलौना-रोबोट जेसी से कहता है, “खिलौनों का युग ख़त्म हुआ।” फ़िल्म पूरी तरह तकनीक को खलनायक नहीं बनाती—जैसा कि अमेरिकी आलोचकों ने रेखांकित किया—बल्कि इस बात पर उँगली रखती है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों के साथ जुड़े रहने का संतुलन कैसे बनाया जाए।
यह सवाल किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं है। अमेरिकी ग़ैर-लाभकारी कॉमन सेंस मीडिया के आँकड़े बताते हैं कि वहाँ 2 साल की उम्र तक 40% बच्चों के पास अपना टैबलेट होता है, और 4 साल का होते-होते यह आँकड़ा 50% पार कर जाता है। माता-पिता की चिंताएँ चारों ओर समान हैं: मानसिक स्वास्थ्य, अत्यधिक उपयोग और उम्र के विपरीत सामग्री। न्यू जर्सी की शिक्षिका जोज़फ़ीन हंट का अनुभव है कि बच्चे अपने बड़ों के हर स्क्रीन-व्यवहार को बिना किसी बारीक फ़र्क़ के दोहराते हैं, इसलिए परिवार को एक इकाई के रूप में आत्म-निरीक्षण करना होगा।
दर्शकों ने इस अपराधबोध और स्वीकारोक्ति के मिश्रण को ज़ोरदार हामी भरी। फ़िल्म ने अमेरिकी बॉक्स-ऑफ़िस पर 160 मिलियन डॉलर कमाकर साल की सबसे बड़ी ओपनिंग दर्ज की और विदेशी बाज़ारों में 152 मिलियन डॉलर जोड़कर पूरी फ्रैंचाइज़ी के रिकॉर्ड तोड़ दिए। विश्लेषक डेविड ए. ग्रॉस ने इसे ‘पिक्सर की किसी भी सीक्वल के लिए एक और सनसनीखेज़ शुरुआत’ बताया। उल्लेखनीय यह कि ख़बरों में महज़ आँकड़े नहीं थे—फ़िल्म के सिनेमास्कोर ‘A’ ने संकेत दिया कि यह केवल नोस्टैल्जिया का खेल नहीं, बल्कि एक सामूहिक सच्चाई की पुष्टि है।
अंत में एक ऐसी छवि रह जाती है जहाँ कमरे में सदियों का साथ निभाने वाले खिलौने कोने में खामोश पड़े हैं, जबकि बॉनी की उँगलियाँ एक चमकते टैबलेट पर थिरक रही हैं। यह दृश्य किसी फ़ैसले की माँग नहीं करता, सिर्फ़ यह पूछता है: क्या इस चमक के पार भी खिलौनों की साँसें बची रहेंगी?
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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टॉय स्टोरी 5 बच्चों के स्क्रीन टाइम की चिंता को बिना टेक्नोलॉजी को बदनाम किए संबोधित करता है। फिल्म बताती है कि असल समस्या उपकरण नहीं, बल्कि अति है, और यह संदेश माता-पिता को गहराई से छूता है।
टॉय स्टोरी 5 ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी, घरेलू बाजार में 160 मिलियन डॉलर के साथ साल की सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल की। इस नई किश्त ने फ्रैंचाइज़ी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, और सीरीज़ की स्थायी अपील को एक बार फिर साबित कर दिया।
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