
कजाकिस्तान में नए संविधान से राष्ट्रपति तोकायेव का कार्यकाल रीसेट, दोबारा चुनाव लड़ने का मार्ग प्रशस्त
संवैधानिक अदालत के स्पष्टीकरण के बाद कासिम-जोमार्त तोकायेव 2029 के चुनाव में फिर से उम्मीदवार हो सकते हैं, पुराने कार्यकाल की गिनती नहीं होगी।
कजाकिस्तान में 1 जुलाई 2026 से लागू नए संविधान के तहत राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव के पिछले कार्यकालों को शून्य मान लिया गया है। संवैधानिक अदालत ने स्पष्ट किया कि 1995 के पुराने संविधान के तहत चुने गए या नियुक्त व्यक्तियों को नए संविधान के लागू होने के बाद पहली बार चुना या नियुक्त माना जाएगा। इस व्याख्या के बाद तोकायेव 2029 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में फिर से उम्मीदवार बन सकते हैं, भले ही नया संविधान एक ही व्यक्ति को केवल एक सात-वर्षीय कार्यकाल की अनुमति देता है।
तोकायेव ने पहले कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे 2029 में सत्ता छोड़ देंगे और कार्यकाल बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने 2022 में संविधान संशोधनों की पहल करते हुए एक बार के सात-वर्षीय कार्यकाल का प्रावधान कराया था, जिसे राजनीतिक आधुनिकीकरण का हिस्सा बताया गया। मार्च 2026 में जनमत संग्रह के जरिए पारित नया संविधान महज 22 दिनों में तैयार किया गया था और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 87.15 प्रतिशत मतदाताओं ने इसका समर्थन किया। अब संवैधानिक अदालत के इस निर्णय ने कानूनी रास्ता खोल दिया है, जिसे कुछ आलोचक पहले से ही संभावित मान रहे थे।
मध्य एशिया के राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, कार्यकाल रीसेट करने की यह प्रक्रिया सोवियत-पश्चात अनेक देशों में देखी गई है, जिनमें रूस, बेलारूस, ताजिकिस्तान और अज़रबैजान शामिल हैं। कजाकिस्तान में 2019 में नूरसुल्तान नज़रबायेव के इस्तीफे के बाद तोकायेव सत्ता में आए थे, लेकिन 2022 की जनवरी की हिंसक घटनाओं के बाद नज़रबायेव का प्रभाव कम हुआ और तोकायेव ने संवैधानिक सुधारों की राह पकड़ी। नए संविधान में एकसदनीय संसद और उपराष्ट्रपति पद की वापसी जैसे बदलाव किए गए हैं, जिन्हें राष्ट्रपति कार्यालय की शक्ति को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
यदि तोकायेव 2029 में चुनाव लड़ते हैं और जीतते हैं, तो वे 2036 तक सत्ता में बने रह सकते हैं। कजाकिस्तान मध्य एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध है, इसलिए यहां का राजनीतिक स्थायित्व भारत, चीन और रूस जैसी क्षेत्रीय शक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत के लिए कजाकिस्तान ऊर्जा सुरक्षा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में एक प्रमुख साझेदार है। फिलहाल, तोकायेव ने दोबारा चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन संवैधानिक अदालत का निर्णय अंतिम है और अगला राष्ट्रपति चुनाव 2029 में होना तय है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.10 | neutral |
The Kazakh Constitutional Court, at the president's request, resets previous terms, allowing Tokayev to stay in power until 2036.
The decision is framed as a technical legal act, but the emphasis on Tokayev's personal request reveals a personification of state power.
It does not mention that the new constitution was approved by a referendum, an element that could have legitimized the decision.
Moscow recognizes the full legitimacy of the Kazakh Constitutional Court's decision, framing it as a normal constitutional development.
Legitimacy is built through reference to the popular referendum and legal procedure, depoliticizing the issue.
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