
दक्षिण सीरिया में इज़रायली घुसपैठ के ख़िलाफ़ आबिदीन में जनप्रतिरोध, अरब जगत ने की निंदा
इज़रायली सेना के दक्षिण सीरिया के आबिदीन गाँव में सैन्य चौकी स्थापित करने के प्रयास को ग्रामीणों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद गोलाबारी और पलायन हुआ; सीरिया और क्षेत्रीय देशों ने इसकी कड़ी निंदा की।
रविवार को दक्षिणी सीरिया के दर्रा प्रांत के आबिदीन गाँव में इज़रायली सेना की एक टुकड़ी ने तंबू लगाकर स्थायी सैन्य चौकी बनाने का प्रयास किया, तो स्थानीय निवासियों ने सड़कें जाम कर और पत्थर फेंककर उसे रोक दिया। स्थानीय प्रशासन और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इज़रायली बलों ने चेतावनी के तौर पर गोलियाँ चलाईं और बाद में गाँव के बाहरी इलाके में तोपखाने से छह गोले दागे, साथ ही रोशनी वाले फ़्लेयर छोड़े जिससे कई घरों में आग लग गई। रात तक अधिकांश ग्रामीण पलायन कर पड़ोसी बस्तियों में चले गए, जबकि इज़रायली सेना अपने तंबू जलाकर बिना चौकी स्थापित किए पीछे हट गई। यह पहला अवसर है जब किसी आबाद गाँव के भीतर इस स्तर का जनप्रतिरोध देखा गया, जिसे स्थानीय अधिकारी इज़रायल की विस्तारवादी नीति के ख़िलाफ़ एक प्रतीकात्मक मोड़ मान रहे हैं।
सीरिया के विदेश मंत्रालय ने ‘कड़ी से कड़ी शब्दों’ में इस घुसपैठ और गोलाबारी की निंदा करते हुए इसे सीरियाई संप्रभुता और 1974 के विस्थापन समझौते का ‘घोर उल्लंघन’ बताया, और संयुक्त राष्ट्र तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कार्रवाई की माँग की। वहीं इज़रायली सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि यह कार्रवाई ‘सुरक्षा क्षेत्र में सशस्त्र लड़ाकों को ख़त्म करने’ के लिए की गई, और रक्षा मंत्री यिसराइल कात्स ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इज़रायल दक्षिणी सीरिया के बफ़र ज़ोन में ‘अनिश्चित काल’ तक बना रहेगा। स्थानीय सीरियाई अधिकारियों ने इज़रायली आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि क्षेत्र में हिज़बुल्लाह या किसी सशस्त्र समूह की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं है, और ये घुसपैठें नागरिकों को आतंकित करने तथा नई सैन्य वास्तविकता थोपने का प्रयास हैं।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाओं में सऊदी अरब, क़तर, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्की ने अलग-अलग बयानों में इज़रायली कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय क़ानून और 1974 के समझौते का खुला उल्लंघन बताया। सभी ने सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया और इज़रायल से समझौते का पालन करने को कहा। हमास ने भी इसे ‘फ़लस्तीन, लेबनान और पूरे उम्माह के ख़िलाफ़ आक्रमण का विस्तार’ करार दिया। ग़ौरतलब है कि दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद से इज़रायल ने 1974 के विस्थापन समझौते को समाप्त घोषित कर बफ़र ज़ोन पर क़ब्ज़ा कर लिया था, और तब से क़ुनेइत्रा व दर्रा में लगभग रोज़ाना घुसपैठ, घरों की तलाशी, गिरफ़्तारियाँ और कृषि भूमि को समतल करने की घटनाएँ सामने आ रही हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, आबिदीन की घटना इज़रायल की सीमित सुरक्षा कार्रवाइयों से आगे बढ़कर दक्षिणी सीरिया में व्यापक सैन्य उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति को उजागर करती है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्रोतों के मुताब� एक नया सुरक्षा ढाँचा थोपना है। इससे विस्थापित हो रहे नागरिकों की मानवीय पीड़ा के साथ-साथ 1974 के समझौते का प्रभावी अंत भी स्पष्ट होता है, जो अंतरराष्ट्रीय संधियों के एकतरफ़ा उल्लंघन की मिसाल पेश करता है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह घटनाक्रम विवादित सीमाओं पर एकपक्षीय सैन्य क़ब्ज़े की प्रवृत्ति को बल दे सकता है, हालाँकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव फ़िलहाल सीरिया तक सीमित है। फ़िलहाल, सीरियाई सरकार ने संयुक्त राष्ट्र से विस्थापन समझौते को लागू कराने की अपील की है, लेकिन इज़रायली रक्षा मंत्री के अनिश्चितकालीन उपस्थिति के बयान के मद्देनज़र ठोस अंतरराष्ट्रीय क़दम की संभावना कम नज़र आती है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.90 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
The Syrian people reject the Israeli aggressor, defending national sovereignty with their own bodies.
The bloc humanizes the local resistance and presents it as an act of collective self-defense, pitting popular will against military power.
The bloc omits any Israeli justification or tactical details that could legitimize the incursion.
Iran and its allies condemn the invasion and support Syria's right to defend itself.
The bloc frames the event within a narrative of Islamic resistance, linking it to a broader struggle against Zionist imperialism.
The bloc omits any discussion of possible Syrian provocations or previous incidents that might justify the Israeli action.
The Israeli operation was a brief incursion with no lasting consequences.
The bloc minimizes the event by decontextualizing it and not assigning it strategic relevance.
The bloc omits the residents' perspective and the extent of resistance, reducing the event to a minor news item.
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