
यूरोपीय संघ और अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध, न्यायाधीश और ज़ंजानी नेटवर्क निशाने पर
मानवाधिकार उल्लंघन और प्रतिबंध चोरी के आरोप में यूरोपीय संघ ने पांच न्यायाधीशों व एक हैकर को, जबकि अमेरिका ने बाबक ज़ंजानी से जुड़ी चार व्यक्तियों और नौ कंपनियों को प्रतिबंधित किया।
24 जुलाई 2025 को यूरोपीय संघ (ईयू) और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की। यूरोपीय परिषद के अनुसार, पांच ईरानी न्यायाधीशों और साइबर विशेषज्ञ नीमा सालेही को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए प्रतिबंधित किया गया, जबकि अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने प्रतिबंधों की चोरी के आरोप में बाबक ज़ंजानी के नेटवर्क से जुड़े चार व्यक्तियों और नौ संस्थाओं पर कार्रवाई की।
यूरोपीय परिषद के बयान के मुताबिक, ये न्यायाधीश क्षेत्रीय क्रांतिकारी अदालतों में पीठासीन थे और इन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा राजनीतिक असंतुष्टों, जिनमें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी शामिल हैं, के खिलाफ अस्पष्ट राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक आरोपों पर मुकदमे चलाए। इन अदालतों ने मौत की सज़ा, लंबी क़ैद, कोड़े और जुर्माने जैसे दंड दिए, खासकर 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद 'महिला, जीवन, आज़ादी' आंदोलन से जुड़े मामलों में। नीमा सालेही को 'आशियाने' साइबर समूह के संस्थापक के रूप में प्रतिबंधित किया गया; ईयू का आरोप है कि यह समूह पहले से प्रतिबंधित साइबर पुलिस (फ़ता) और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के साथ मिलकर आंतरिक विरोधियों और विदेशी संस्थानों पर साइबर हमले करता है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, बाबक ज़ंजानी ने डिजिटल संपत्ति लेन-देन, सोना उत्पादन और परिवहन परियोजनाओं सहित कंपनियों के एक जाल के ज़रिए ईरानी शासन को प्रतिबंधों से बचने और आईआरजीसी को वित्तपोषित करने में मदद की। ज़ंजानी, जो पहले भ्रष्टाचार के लिए ईरान में मौत की सज़ा पा चुका है, हाल ही में 'डॉट वन' समूह के तहत सार्वजनिक रूप से आर्थिक गतिविधियों में फिर से सक्रिय हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमलों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बाद अधिकतम दबाव की नीति का हिस्सा बताया।
इन नवीनतम प्रतिबंधों के साथ, ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े ईयू प्रतिबंध अब 269 व्यक्तियों और 53 संस्थाओं पर लागू होते हैं, जिनमें संपत्ति ज़ब्त करना, यात्रा प्रतिबंध और धन उपलब्ध कराने पर रोक शामिल है। अमेरिकी कार्रवाई में तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात स्थित कंपनियाँ भी निशाने पर हैं, जो डिजिटल मुद्रा विनिमय प्लेटफ़ॉर्म 'ज़ेडसेक्स' और 'ज़ेडक्सियन' का समर्थन करती थीं। दोनों ही कार्रवाइयाँ ईरान के आंतरिक दमन और बाहरी सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय चिंता को दर्शाती हैं।
ईयू की शीर्ष राजनयिक काया कैलास ने सोशल मीडिया पर कहा कि जहाँ दुनिया का ध्यान मध्य पूर्व युद्ध पर है, ईरानी शासन द्वारा अपने लोगों का दमन नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को उसके व्यवहार की भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है। ये प्रतिबंध ऐसे समय में आए हैं जब ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत रुकी हुई है और क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य ईरान की सुरक्षा संस्थाओं और अभिजात वर्ग के वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाकर शासन पर दबाव बनाना है। भविष्य में भी इसी तरह के प्रतिबंधों की संभावना है, खासकर यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं।
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