
अमेरिका-ईरान हमलों पर विराम से तेल की कीमतों में 9% की भारी गिरावट
सप्ताहांत में सैन्य कार्रवाई रुकने और बातचीत की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद है।
वैश्विक तेल बाजारों में सोमवार को जोरदार बिकवाली देखी गई, जब ब्रेंट क्रूड का भाव एक समय 9.5 प्रतिशत तक लुढ़ककर 87.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट पिछले सप्ताह के उस उछाल के ठीक बाद आई, जब कीमतें मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार पहुंच गई थीं। इस तेज सुधार की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान द्वारा सप्ताहांत में आपसी हमलों को रोकना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ 'अच्छी बातचीत' चल रही है और किसी समाधान की 'अच्छी संभावना' है, जबकि ईरान ने किसी औपचारिक वार्ता से इनकार किया है।
तेल की कीमतों में यह नरमी मुख्यतः इस उम्मीद से आई कि तनाव कम होने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो सकती है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा ढोता है। हालांकि, हकीकत में यह जलमार्ग अब भी लगभग पूरी तरह बंद है—सप्ताहांत में रोजाना 10 से भी कम मालवाहक जहाज वहां से गुजरे। साथ ही, यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी की धमकी दी, जिससे निर्यात के वैकल्पिक मार्ग भी खतरे में पड़ गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राहत भ्रामक हो सकती है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार है और कोई स्थायी युद्धविराम नहीं हुआ है।
तेल की गिरावट ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को मिश्रित संकेत दिए। यूरोप में फ्रैंकफर्ट का डैक्स 1 प्रतिशत चढ़ा, जबकि लंदन और पेरिस के सूचकांक भी हरे निशान में बंद हुए। एशियाई बाजारों में टोक्यो, सियोल, हांगकांग और शंघाई सभी मजबूत रहे। इसके विपरीत, वॉल स्ट्रीट पर शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रह सकी और नैस्डैक में गिरावट रही। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए कीमतों में यह नरमी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती लागत और मुद्रास्फीति के दबाव से अस्थायी राहत का संकेत है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कोषागार की चेतावनी के अनुसार, रणनीतिक भंडार पहले ही काफी कम हो चुके हैं और बाजार पहले से अधिक संवेदनशील है।
अब सबकी निगाहें इस सप्ताह होने वाली केंद्रीय बैंकों की बैठकों पर टिकी हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दरों पर निर्णय आने वाले हैं। बाजार को उम्मीद है कि ये संस्थाएं फिलहाल दरें स्थिर रखेंगी, लेकिन तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रास्फीति के जोखिम को देखते हुए आगे दर वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगला ठोस पड़ाव वह क्षण होगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य से दोतरफा यातायात वास्तव में बहाल होता है या फिर अमेरिका-ईरान के बीच कोई लिखित समझौता सामने आता है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.30 | aligned |
The West watches the truce with caution, but Iran offers no guarantees.
It includes Iran's statement of not seeking peace talks to undermine the de-escalation narrative, creating a sense of precariousness.
It downplays diplomatic possibilities, focusing on Iran's intransigent stance.
Russia watches the market: the US stopped strikes because they were ineffective, not out of goodwill.
It uses the CENTCOM recommendation and the phrase 'limit of effectiveness' to reframe the US decision as a tactical retreat rather than a diplomatic gesture.
It omits the Omani mediation and Iran's willingness to stop attacks.
Sub-Saharan Africa hopes for détente: the pause opens the way for negotiations to reopen Hormuz.
It uses the phrase 'fresh Hormuz hopes' and Trump's envoy's words to create a narrative of diplomatic progress, downplaying the fragility of the truce.
It does not report Iran's statement of not seeking peace talks, nor the US motivation of limited effectiveness.
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