
दो दिन में गायब हुई 'सतलुज', दिलजीत ने अंधेरे को दी चुनौती
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' ZEE5 पर रिलीज़ के 48 घंटे बाद हटा दी गई, जिसके बाद अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर लिखा 'मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं'।
रविवार की शाम, एक दर्शक स्क्रीन पर जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी देख रहा था, तभी फिल्म अचानक बीच में ही रुक गई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यही अनुभव साझा किया—'सतलुज' का प्रसारण ठिठक गया था, और कुछ ही देर में वह ZEE5 के भारतीय कैटलॉग से पूरी तरह गायब हो गई। यह कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी फिल्म का अचानक अदृश्य हो जाना था जो तीन साल के सेंसरशिप संघर्ष के बाद महज दो दिन पहले ही रिलीज़ हुई थी।
हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी यह फिल्म मूलतः 'पंजाब 95' शीर्षक से बनी थी, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा ने 1990 के दशक में पंजाब में हुए हजारों अवैध शवदाह और गुमशुदगियों की जांच की थी, और 1995 में पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद वह कभी नहीं लौटे। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने इस फिल्म के लिए 127 कट्स की मांग की थी, जिनमें खालड़ा का नाम, तरनतारन जैसे स्थान और 'मानवाधिकार' जैसे शब्दों को हटाने का सुझाव शामिल था। इसी वजह से फिल्म 2023 के टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव से भी हटा ली गई थी। अंततः बिना किसी कट के, केवल शीर्षक बदलकर 'सतलुज' करके इसे 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज़ किया गया।
ZEE5 ने फिल्म हटाए जाने की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि "वर्तमान घटनाक्रमों के मद्देनज़र" फिल्म भारत में अगली सूचना तक अनुपलब्ध रहेगी। प्लेटफॉर्म ने दर्शकों के "अत्यधिक प्रेम" के लिए आभार जताया और यह भी कहा कि वह फिल्म और इसके रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ खड़ा है। इसके कुछ ही घंटों बाद, दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक दृश्य साझा किया जिसमें लिखा था "मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं"। कैप्शन में उन्होंने पंजाबी में लिखा, "सतलुज के साथ वही हुआ जो खालड़ा साहब के साथ हुआ।" खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने पहले एक बयान में कहा था कि परिवार ने फिल्म के इसी संस्करण को मंजूरी दी है और इसकी "मूल आत्मा और सच्चाई सुरक्षित रखी गई है।"
यह फिल्म भारत से हटाए जाने के बावजूद ZEE5 ग्लोबल पर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए उपलब्ध बनी हुई है। पूर्व क्रिकेटर और सांसद हरभजन सिंह ने इसे "ज़रूर देखी जाने वाली फिल्म" बताया था। ZEE5 ने अपने पोस्ट में लिखा, "सतलुज भले थम गई हो, लेकिन इसने जो बातचीत शुरू की है, वह नहीं रुकी।" स्क्रीन पर अचानक आए ठहराव और दिलजीत के उस चुनौती भरे वाक्य के बीच, जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है—न दिखाई गई, न दबाई गई, बस एक अधूरे विराम पर टंगी हुई।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
The Indian press reports the removal of Satluj from ZEE5 as a fresh blow to a film already battered by years of censorship. Diljit Dosanjh's defiant 'I challenge the darkness' post is presented as a heroic stand against opaque forces. The narrative emphasizes the film's troubled history and the platform's vague statement, leaving the impression of an unjust silencing.
Gulf media report the removal of Satluj from ZEE5 in a brief, factual manner, noting the film's long certification struggle and the platform's commitment to restore it. No emotional commentary or actor's reaction is included, maintaining a detached observer stance.
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