
ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान की जब्त संपत्ति लौटानी होगी, 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष की खबरों से इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि जमे हुए ईरानी धन पर वाशिंगटन का दावा नहीं है और उसे लौटाना डॉलर में वैश्विक भरोसे के लिए ज़रूरी है, जबकि खाड़ी देशों द्वारा 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष की रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया।
जी7 शिखर सम्मेलन के इतर फ्रांस में पत्रकारों से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की अरबों डॉलर की जब्त संपत्तियों को लेकर एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति की। उन्होंने कहा, "हमने उनका बहुत सारा धन ले रखा है। यह हमारा धन नहीं, उनका है।" ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका ने यह राशि एक निश्चित समय पर फ्रीज़ की थी और अब उसे लौटाना होगा। उनका यह बयान ईरानी परिसंपत्तियों की क़ानूनी स्थिति पर एक स्पष्ट स्वीकृति है, जो अक्सर प्रतिबंधों की राजनीति में उलझी रहती है। ब्राज़ील के 'वैलोर इकोनॉमिको' और ईरान के 'हमशहरी ऑनलाइन' के अनुसार, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि यह धन स्थायी रूप से रोक लिया गया तो "कोई भी दोबारा डॉलर में निवेश नहीं करेगा।" यह टिप्पणी अमेरिकी मुद्रा की वैश्विक विश्वसनीयता पर संभावित असर को रेखांकित करती है, जो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी गंभीर संकेत है, क्योंकि डॉलर-आधारित व्यापार और विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा इसी भरोसे पर टिका है।
दूसरी ओर, ट्रंप ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह झूठा बताया जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन के तहत खाड़ी के सहयोगी देश 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाएंगे। फॉक्स न्यूज़ के पीटर डूसी के सवाल पर ट्रंप ने दो बार "गलत" कहा और स्पष्ट किया, "हम निवेश नहीं कर रहे, हम 10 सेंट भी नहीं लगाएंगे।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी देश या व्यक्ति चाहे तो निवेश कर सकता है, लेकिन यह उनका अपना फ़ैसला होगा। अमेरिकी स्रोतों के अनुसार, यह खंडन व्हाइट हाउस की 'रैपिड रिस्पॉन्स' टीम द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो क्लिप के ज़रिए भी प्रसारित किया गया। इससे साफ होता है कि वाशिंगटन ईरान के पुनर्निर्माण में प्रत्यक्ष वित्तीय भूमिका से दूर रहना चाहता है, भले ही क्षेत्रीय सहयोगी आगे आएं।
ईरानी मीडिया ने ट्रंप के बयान को एक कूटनीतिक दबाव के रूप में देखा। 'हमशहरी ऑनलाइन' ने इस पर प्रमुखता से रिपोर्ट करते हुए लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया है कि जब्त धन ईरान का है और इसे लौटाना आवश्यक है। ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान परमाणु समझौते के दायरे में प्रतिबंधों में ढील देने की संभावना की ओर इशारा करता है, लेकिन साथ ही ट्रंप की चेतावनी—"जैसे ही वे अच्छा व्यवहार करेंगे, कुछ होगा"—यह दर्शाती है कि राहत शर्तों से जुड़ी रहेगी। इंडोनेशियाई मीडिया 'ट्रिब्यूनन्यूज़' ने भी इस पहलू को उठाया, जिसमें बताया गया कि अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदार एक "निश्चित सहमति योजना" विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें कम से कम 300 अरब डॉलर का फंड शामिल हो सकता है, लेकिन ट्रंप के ताज़ा बयान इस प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करते हैं।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह घटनाक्रम कई आयाम रखता है। भारत ईरान से ऊर्जा आयात और चाबहार बंदरगाह विकास में रणनीतिक हित रखता है, जो अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग है। यदि ईरानी परिसंपत्तियां वास्तव में मुक्त होती हैं और प्रतिबंधों में ढील दी जाती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। हालांकि, ट्रंप का यह रुख कि अमेरिका एक पैसा नहीं लगाएगा, यह संकेत देता है कि पुनर्निर्माण का वित्तीय बोझ खाड़ी देशों और निजी निवेशकों पर छोड़ा जा सकता है। भारत को यह आकलन करना होगा कि क्या वह ईरान में निवेश बढ़ाने के लिए तैयार है, खासकर तब जब अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
आगे की राह अनिश्चित है। ट्रंप का डॉलर की साख से जुड़ा तर्क यह दर्शाता है कि अमेरिकी नीति निर्माता वैश्विक वित्तीय प्रणाली में दीर्घकालिक विश्वास बनाए रखने को लेकर सचेत हैं। दूसरी तरफ, 300 अरब डॉलर के कोष की अफवाहों का खंडन यह स्पष्ट करता है कि वाशिंगटन ईरान को सीधे आर्थिक सहायता देने के पक्ष में नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय शक्तियों को रोकेगा भी नहीं। यह दोहरा रुख मध्य पूर्व में अमेरिकी कूटनीति की जटिलता को उजागर करता है, जहां सहयोगियों को स्वायत्तता देते हुए ईरान पर दबाव बनाए रखना है। भारत जैसे देशों के लिए यह एक नाज़ुक संतुलन है—ईरान के साथ आर्थिक संबंधों को गहरा करने की चाहत और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की मजबूरी के बीच।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ
ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि खाड़ी के सहयोगी ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण कोष का वित्तपोषण करेंगे, और इस रिपोर्ट को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब्त की गई ईरानी संपत्तियां ईरान की हैं, अमेरिका की नहीं, और उन्हें अंततः वापस करना पड़ सकता है। यह बयान जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक संवाददाता सम्मेलन में दिया गया।
ट्रंप ने स्वीकार किया कि अमेरिका के पास ईरान का बहुत सारा पैसा है और कहा कि इसे वापस करना होगा क्योंकि यह ईरान का है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक संयुक्त रूप से सहमत योजना के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बयान प्रतिबंधों में संभावित ढील का सुझाव देता है।
संबंधित लेख
गोलकीपर की चूक और रोमो की सूझबूझ: मेक्सिको बना विश्व कप 2026 के नॉकआउट में पहुंचने वाला पहला देश
10 भाषाएँ · 43 स्रोत
खेलकनाडा की ऐतिहासिक जीत पर चोट का साया: कोने की टूटी टांग ने मचाई सनसनी
10 भाषाएँ · 40 स्रोत
राजनीतिअमेरिका-ईरान समझौते पर वेंस की इज़राइल को दो टूक: 'अपने इकलौते सहयोगी पर हमला मत करो'
11 भाषाएँ · 27 स्रोत