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न्याय और कानूनसोमवार, 29 जून 2026

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की अपील खारिज की, कैरोल मामले में 5 मिलियन डॉलर का हर्जाना अंतिम

सुप्रीम कोर्ट के इनकार से 5 मिलियन डॉलर का फैसला अंतिम हो गया, जबकि 83.3 मिलियन डॉलर का एक अन्य मानहानि मामला अभी भी अपील में लंबित है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने लेखिका ई. जीन कैरोल के यौन उत्पीड़न और मानहानि के मामले में 2023 के जूरी फैसले को चुनौती दी थी। बिना कोई कारण बताए जारी संक्षिप्त आदेश के साथ ही 5 मिलियन डॉलर का हर्जाना अंतिम हो गया, और ट्रंप को यह राशि कैरोल को चुकानी होगी। यह फैसला न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखता है, जिसमें जूरी ने पाया था कि ट्रंप ने 1990 के दशक के मध्य में मैनहटन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर के ट्रायल रूम में कैरोल का यौन उत्पीड़न किया और बाद में 2022 में उनके आरोपों को झूठा बताकर मानहानि की।

ट्रंप के कानूनी दल ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया था कि ट्रायल जज लुईस कापलान ने साक्ष्य के संघीय नियमों का उल्लंघन करते हुए गलत तरीके से दो अन्य महिलाओं की गवाही और सन् 2005 का ‘एक्सेस हॉलीवुड’ वीडियो जूरी के सामने पेश करने दिया, जिसमें ट्रंप महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार की डींगें मार रहे थे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मामले को ‘फर्जी केस’ और ‘कानून का राजनीतिक हथियारीकरण’ करार दिया, तथा न्यूयॉर्क राज्य द्वारा पुराने यौन उत्पीड़न के मामलों में मुकदमे की अनुमति देने वाले कानून को विशेष रूप से उन्हें निशाना बनाने के लिए बनाया गया बताया। दूसरी ओर, कैरोल की अटॉर्नी रोबर्टा कापलान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जूरी के सर्वसम्मत निर्णय की अंतिम पुष्टि बताते हुए कहा कि ट्रंप द्वारा जवाबदेही से बचने के सभी प्रयास विफल हो गए हैं।

यह निर्णय ऐसे दिन आया जब सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में राष्ट्रपति को स्वतंत्र नियामक आयोगों के अधिकारियों को बिना कारण बर्खास्त करने के व्यापक अधिकार प्रदान किए, जिसे ट्रंप ने ‘पिछले 100 वर्षों में राष्ट्रपति शक्ति में सबसे बड़ी वृद्धि’ बताया। हालांकि, कैरोल मामले में मिली कानूनी झटके के समानांतर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप के न्याय विभाग ने कैरोल के खिलाफ एक आपराधिक जांच शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या उन्होंने दीवानी मुकदमों के दौरान झूठी गवाही दी थी। यह जांच विशेष रूप से इस दावे पर केंद्रित है कि कैरोल को मुकदमे के लिए बाहरी वित्तीय सहायता नहीं मिली, जबकि बाद में खुलासा हुआ कि अरबपति रीड हॉफमैन ने उनके कानूनी खर्चों का एक हिस्सा वहन किया था।

कैरोल से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। जनवरी 2024 में एक अलग जूरी ने ट्रंप को 2019 में राष्ट्रपति रहते हुए कैरोल के खिलाफ की गई मानहानिकारक टिप्पणियों के लिए 83.3 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया था। ट्रंप ने इस फैसले के खिलाफ अपील कर रखी है, और उनके वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को भी सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। फिलहाल, 5 मिलियन डॉलर की राशि ट्रंप द्वारा पहले ही अदालत की निगरानी वाले खाते में जमा करा दी गई थी, जिससे कैरोल को यह भुगतान शीघ्र मिलने की उम्मीद है। 83.3 मिलियन डॉलर वाले मामले में अगली सुनवाई 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में अपीलीय अदालत में होने की संभावना है।

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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की अपील खारिज की, कैरोल मामले में 5 मिलियन डॉलर का हर्जाना अंतिम

सुप्रीम कोर्ट के इनकार से 5 मिलियन डॉलर का फैसला अंतिम हो गया, जबकि 83.3 मिलियन डॉलर का एक अन्य मानहानि मामला अभी भी अपील में लंबित है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने लेखिका ई. जीन कैरोल के यौन उत्पीड़न और मानहानि के मामले में 2023 के जूरी फैसले को चुनौती दी थी। बिना कोई कारण बताए जारी संक्षिप्त आदेश के साथ ही 5 मिलियन डॉलर का हर्जाना अंतिम हो गया, और ट्रंप को यह राशि कैरोल को चुकानी होगी। यह फैसला न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखता है, जिसमें जूरी ने पाया था कि ट्रंप ने 1990 के दशक के मध्य में मैनहटन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर के ट्रायल रूम में कैरोल का यौन उत्पीड़न किया और बाद में 2022 में उनके आरोपों को झूठा बताकर मानहानि की।

ट्रंप के कानूनी दल ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया था कि ट्रायल जज लुईस कापलान ने साक्ष्य के संघीय नियमों का उल्लंघन करते हुए गलत तरीके से दो अन्य महिलाओं की गवाही और सन् 2005 का ‘एक्सेस हॉलीवुड’ वीडियो जूरी के सामने पेश करने दिया, जिसमें ट्रंप महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार की डींगें मार रहे थे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मामले को ‘फर्जी केस’ और ‘कानून का राजनीतिक हथियारीकरण’ करार दिया, तथा न्यूयॉर्क राज्य द्वारा पुराने यौन उत्पीड़न के मामलों में मुकदमे की अनुमति देने वाले कानून को विशेष रूप से उन्हें निशाना बनाने के लिए बनाया गया बताया। दूसरी ओर, कैरोल की अटॉर्नी रोबर्टा कापलान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जूरी के सर्वसम्मत निर्णय की अंतिम पुष्टि बताते हुए कहा कि ट्रंप द्वारा जवाबदेही से बचने के सभी प्रयास विफल हो गए हैं।

यह निर्णय ऐसे दिन आया जब सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में राष्ट्रपति को स्वतंत्र नियामक आयोगों के अधिकारियों को बिना कारण बर्खास्त करने के व्यापक अधिकार प्रदान किए, जिसे ट्रंप ने ‘पिछले 100 वर्षों में राष्ट्रपति शक्ति में सबसे बड़ी वृद्धि’ बताया। हालांकि, कैरोल मामले में मिली कानूनी झटके के समानांतर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप के न्याय विभाग ने कैरोल के खिलाफ एक आपराधिक जांच शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या उन्होंने दीवानी मुकदमों के दौरान झूठी गवाही दी थी। यह जांच विशेष रूप से इस दावे पर केंद्रित है कि कैरोल को मुकदमे के लिए बाहरी वित्तीय सहायता नहीं मिली, जबकि बाद में खुलासा हुआ कि अरबपति रीड हॉफमैन ने उनके कानूनी खर्चों का एक हिस्सा वहन किया था।

कैरोल से जुड़ा दूसरा बड़ा मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है। जनवरी 2024 में एक अलग जूरी ने ट्रंप को 2019 में राष्ट्रपति रहते हुए कैरोल के खिलाफ की गई मानहानिकारक टिप्पणियों के लिए 83.3 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया था। ट्रंप ने इस फैसले के खिलाफ अपील कर रखी है, और उनके वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को भी सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। फिलहाल, 5 मिलियन डॉलर की राशि ट्रंप द्वारा पहले ही अदालत की निगरानी वाले खाते में जमा करा दी गई थी, जिससे कैरोल को यह भुगतान शीघ्र मिलने की उम्मीद है। 83.3 मिलियन डॉलर वाले मामले में अगली सुनवाई 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में अपीलीय अदालत में होने की संभावना है।

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