
जम्मू-कश्मीर और नागालैंड में बाढ़-भूस्खलन से 19 लोगों की मौत, कई लापता
रविवार को भारी बारिश के बाद जम्मू संभाग और मोन जिले में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, मृतक संख्या बढ़ने की आशंका के बीच राहत-बचाव कार्य जारी।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिलों तथा नागालैंड के मोन जिले में रविवार को भारी बारिश के बाद आई अचानक बाढ़ और कई भूस्खलनों ने भारी तबाही मचाई। स्थानीय प्रशासन और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लापता हैं। जम्मू संभाग में 11 से 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नागालैंड के मोन शहर में एक बड़े भूस्खलन में आठ लोग मारे गए।
पुंछ जिले के सुरनकोट तहसील में सबसे अधिक नुकसान हुआ है, जहाँ कई घर ढह गए और लोग बह गए। राजौरी में भी बाढ़ से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति पर नज़र रखने के लिए अपनी दिल्ली यात्रा रद्द कर जम्मू का रुख किया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राहत कार्यों की समीक्षा की और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस बचाव कार्यों में जुटी हैं।
नागालैंड में मोन शहर के निचले इलाके में सुबह-सुबह आए भूस्खलन ने लगभग एक दर्जन मकानों को दफन कर दिया। जिला प्रशासन के अनुसार, चार शव बरामद हो चुके हैं और चार अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण बचाव कार्यों में दिक्कत आ रही है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को 74,000 रुपये देने की घोषणा की है।
विभिन्न स्रोतों से मृतक संख्या में अंतर बना हुआ है। पुंछ के उपायुक्त ने 16 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई थी, लेकिन अभी तक 11 शव बरामद हुए हैं। नागालैंड में भी प्रारंभिक रिपोर्टों में तीन मौतों की बात कही गई थी, जो बाद में आठ हो गई। बचाव दल लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं और वास्तविक मृतक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
India faces the monsoon's fury with rescues and evacuations as the death toll rises.
The narrative focuses on individual stories of loss and the disruption of religious rituals, creating an emotional bond with the reader.
The victims in Nagaland are not mentioned, narrowing the disaster's scope to only Jammu and Kashmir.
India's monsoon kills 19 in Nagaland and Jammu & Kashmir as rescue operations continue.
The use of official sources and a death-toll structure gives an objective tone.
The suspension of pilgrimages and local details are omitted, reducing the narrative to mere statistics.
Kashmir suffers floods and landslides, with 11 dead and extensive damage.
Highlighting the tourist region of Kashmir creates an emotional proximity for Southeast Asian audiences.
The victims in Nagaland and the national death toll of 19 are omitted, focusing only on Kashmir.
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