
युद्ध के मलबे से लेकर घर की दहलीज तक, दुनिया भर में बचपन असुरक्षित क्यों होता जा रहा है
लेबनान में विस्थापित तीन लाख बच्चों की त्रासदी और फ्रांस, अर्जेंटीना व कोलंबिया में यौन हिंसा के मामले एक साझा सच्चाई उजागर करते हैं—बच्चों की सुरक्षा के लिए बने ढाँचे हर महाद्वीप पर चरमरा रहे हैं।
बेरूत की संसदीय गलियारों से लेकर पेरिस की अदालतों और बोगोता की बालकनियों तक, पिछले कुछ दिनों ने एक असहज प्रश्न को वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है: क्या हमारे बच्चे कहीं भी सुरक्षित हैं? लेबनान में संसदीय महिला एवं बाल समिति की अध्यक्ष सांसद इनाया एज़ेद्दीन ने यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई मंत्रालयों के साथ बैठक कर एक आपातकालीन योजना की माँग की। कारण स्पष्ट है—इस्राइली सैन्य कार्रवाई के सौ से अधिक दिनों में 247 बच्चे मारे जा चुके हैं, 992 घायल हुए हैं, और लगभग तीन लाख बच्चे विस्थापित होकर स्कूलों, आश्रय स्थलों या रिश्तेदारों के यहाँ अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहे हैं। समिति ने सिफारिश की कि घायल बच्चों का अठारह वर्ष की आयु तक मुफ्त चिकित्सा और शल्य चिकित्सा जारी रहे, तथा उनकी मनोवैज्ञानिक देखभाल के लिए राष्ट्रीय कोष बने।
यह संकट केवल आँकड़ों का नहीं है। दक्षिण लेबनान की एक पत्रकार ने अपने गाँव छोड़ने की पीड़ा को शब्द दिए—कैसे हर पत्थर और पेड़ से जुड़ी यादें बमबारी में ध्वस्त हो गईं, और बेरूत जैसे शहर में विस्थापित परिवार अपनी आत्मा का एक हिस्सा पीछे छोड़ आए। शिक्षा का ढाँचा भी बिखर गया: सैकड़ों स्कूल या तो नष्ट हो गए या विस्थापितों के आश्रय में बदल दिए गए, जिससे अंतिम वर्ष के छात्रों की बोर्ड परीक्षाएँ अधर में लटक गईं। यूनिसेफ के लेबनान प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि हर दिन औसतन बारह बच्चे हताहत हो रहे हैं, और यह पीढ़ी स्थायी आघात झेल रही है।
जब मध्य-पूर्व में युद्ध बचपन को कुचल रहा है, तब यूरोप और लातीनी अमेरिका में वे जगहें असुरक्षित हो गई हैं जिन्हें सबसे सुरक्षित माना जाता था—परिवार और स्कूल। फ्रांस में एक स्कूल-पश्चात गतिविधि संचालक पर कई छोटी लड़कियों से यौन उत्पीड़न के आरोप थे, लेकिन पेरिस की अदालत ने उसे बरी कर दिया, जिससे अभिभावकों में भारी आक्रोश है और #MeTooEcole जैसे समूह सड़कों पर उतर आए हैं। इसी सप्ताह फ्रांसीसी सीनेट ने पेरिस्कूल हिंसा पर जाँच समिति की सुनवाई शुरू की, जिसकी प्रतिवेदक ने शरद ऋतु तक ठोस सिफारिशें देने का वादा किया है। अर्जेंटीना के सांता फे में एक पुलिस अधिकारी को बीस वर्षों तक अपने सात भतीजों-भतीजियों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया; पहली शिकायत एक किशोरी ने की, फिर बाकी पीड़ित सामने आए। कोलंबिया की राजधानी में एक बालकनी पर दिखे दृश्य से यौन दुर्व्यवहार की आशंका वायरल हुई, जो बाद में गलतफहमी निकली, परंतु एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेज के निदेशक ने याद दिलाया कि 90 प्रतिशत वास्तविक मामले घरेलू परिवेश में होते हैं।
ये घटनाएँ भौगोलिक दूरी के बावजूद एक ही पैटर्न की ओर इशारा करती हैं: संस्थाएँ—चाहे राज्य हों, न्यायालय हों या परिवार—बच्चों की रक्षा में विफल हो रही हैं। लेबनान में सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर है, फ्रांस में न्यायिक प्रणाली पीड़ितों के प्रति असंवेदनशील दिखती है, और लातीनी अमेरिका में पारिवारिक माहौल ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह वैश्विक तस्वीर एक चेतावनी है—यहाँ भी सशस्त्र संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों का विस्थापन और स्कूलों का सैन्य उपयोग चिंताजनक है, जबकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े बताते हैं कि बाल यौन शोषण के अधिकांश मामले परिचितों या रिश्तेदारों द्वारा ही अंजाम दिए जाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान केवल कानून कड़े करने में नहीं, बल्कि सामाजिक सतर्कता और संस्थागत पारदर्शिता में है। लेबनान की संसदीय समिति ने मनोवैज्ञानिक सहायता को आपात सेवा का दर्जा देने की बात की, वहीं फ्रांसीसी सीनेट राष्ट्रीय मानचित्रण के जरिए पेरिस्कूल हिंसा की जड़ें खोज रही है। अर्जेंटीना का मामला दिखाता है कि एक साहसी शिकायत कैसे दशकों पुराने शोषण को उजागर कर सकती है। आगे का रास्ता इन्हीं अनुभवों को जोड़कर एक ऐसी वैश्विक बाल सुरक्षा रूपरेखा बनाने का है, जो युद्ध क्षेत्र से लेकर घर के भीतर तक, हर जगह बचपन को निडर और सम्मानजनक बनाए।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
लेबनान में युद्ध ने बचपन को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है: 300,000 से अधिक विस्थापित बच्चे, 247 मारे गए, लगभग एक हज़ार घायल। महिला एवं बाल संसदीय समिति और यूनिसेफ ने नाबालिगों की सुरक्षा और विस्थापन व क्षति के आघात से निपटने के लिए आपात योजना की मांग की है। संकट को एक राजनीतिक आपातकाल के रूप में देखा जा रहा है जिसमें तत्काल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
लैटिन अमेरिका में बचपन की असुरक्षा को यौन शोषण के नज़रिए से देखा जाता है, जो अक्सर परिवार के भीतर होता है। बोगोटा के एक मोहल्ले में कथित दुर्व्यवहार के झूठे अलार्म ने वायरल गलत सूचना के जोखिमों को उजागर किया, जबकि सांता फ़े के एक मामले ने एक पुलिसकर्मी को बेनकाब किया जिसने दो दशकों तक सात भतीजियों का शोषण किया। कवरेज सावधानीपूर्वक सत्यापन और घरों के भीतर व्याप्त खतरे पर ज़ोर देती है।
संबंधित लेख
इंग्लैंड के बेडफोर्ड में दो यात्री ट्रेनें टकराईं, एक की मौत, 89 घायल
11 भाषाएँ · 42 स्रोत
मीडिया और मनोरंजनजब मेस्सी ने कैमरे को चूमा और कहा ‘ते आमो, पापा’: एक झूठी खबर, एक बीमार पिता और स्ट्रीमिंग युग का सच
6 भाषाएँ · 23 स्रोत
खेलकनाडा की ऐतिहासिक जीत पर कोने की टूटी टांग का साया, विश्व कप से बाहर
8 भाषाएँ · 17 स्रोत