
विश्व कप प्रसारण में नस्लवादी टिप्पणी: 'अश्वेत खिलाड़ी 80 मिनट से ज़्यादा एकाग्र नहीं रह सकते'
सर्बियाई पूर्व फुटबॉलर राडे बोगदानोविच ने बेल्जियम-ईरान मैच की लाइव कमेंट्री के दौरान अश्वेत खिलाड़ियों की एकाग्रता पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसकी वैश्विक स्तर पर निंदा हुई।
स्टूडियो की स्क्रीन पर बेल्जियम के युवा डिफेंडर नाथन एनगोय को लाल कार्ड दिखाया गया। मैच का 67वां मिनट था, और ईरान के ख़िलाफ़ गोलरहित मुक़ाबले में एक रक्षात्मक चूक के बाद एनगोय ने विरोधी खिलाड़ी की जर्सी खींच ली थी। सर्बियाई सार्वजनिक प्रसारक आरटीएस पर कमेंट्री कर रहे पूर्व यूगोस्लाव अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राडे बोगदानोविच ने इस घटना को एक अलग ही मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा, “इस स्तर पर, अंतिम डिफेंडर होकर एक सेट पीस चूकना और फिर बाहर हो जाना… मैं हमेशा कहता आया हूं, और मैं नस्लवादी नहीं हूं, लेकिन अश्वेत खिलाड़ियों में 60 से 80 मिनट से ज़्यादा एकाग्रता बनाए रखने की क्षमता नहीं होती।” स्टूडियो में मौजूद प्रस्तोता ने तुरंत उन्हें अपने शब्द वापस लेने का मौक़ा दिया, लेकिन बोगदानोविच अपनी बात पर अडिग रहे।
56 वर्षीय बोगदानोविच का करियर अटलेटिको मैड्रिड और वेर्डर ब्रेमेन जैसे क्लबों तक फैला रहा, और अब वे एक विवादास्पद विश्लेषक के रूप में जाने जाते हैं। प्रसारण के दौरान उन्होंने अपनी बात को सही ठहराने के लिए कहा, “मैं उनके साथ खेला हूं। कभी-कभी हमें अपने ही खिलाड़ियों पर नज़र रखनी पड़ती थी ताकि वे ग़लती न करें।” यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने ऐसी टिप्पणी की हो; 2019 में उन्होंने दावा किया था कि बोरूसिया डॉर्टमुंड का पतन उस समय शुरू हुआ जब कोच ने “चार अश्वेत डिफेंडरों को लाइन-अप में रखा।” बेल्जियम के मीडिया ने इस ताज़ा बयान को नस्लवादी करार दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रेस ने इसे पूर्वाग्रह की एक स्पष्ट मिसाल बताया।
यह घटना फुटबॉल की वैश्विक प्रकृति और उसमें व्याप्त जातीय रूढ़ियों के बीच के तनाव को उजागर करती है। यूरोपीय फुटबॉल में अफ्रीकी मूल के खिलाड़ियों की बड़ी संख्या है, फिर भी पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में ऐसी धारणाएं बार-बार सामने आती हैं। दक्षिण एशिया में, जहां फुटबॉल का प्रशंसक आधार तेज़ी से बढ़ रहा है, इस प्रसारण ने खेल में नस्लवाद पर एक बार फिर बहस छेड़ दी। भारतीय दर्शकों के लिए, जो विविध पृष्ठभूमियों से आते हैं, यह टिप्पणी इस बात की याद दिलाती है कि खेल की दुनिया अभी भी ऐसे पूर्वाग्रहों से मुक्त नहीं है।
प्रसारण के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। सर्बियाई पत्रकारों ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इसे “हे भगवान” जैसे शब्दों के साथ साझा किया, जबकि ब्रिटिश और फ्रांसीसी अख़बारों ने इसे “घृणित” बताया। हालांकि, आरटीएस, बोगदानोविच या बेल्जियम फुटबॉल संघ की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। स्टूडियो की ख़ामोशी के बीच, एनगोय का लाल कार्ड और बोगदानोविच के शब्द एक स्थायी छवि बन गए—एक ऐसा क्षण जहां एक खिलाड़ी की ग़लती को उसकी त्वचा के रंग से जोड़कर देखा गया, और एक पूर्व खिलाड़ी ने अपने अनुभव के नाम पर उस धारणा को दोहराने से इनकार नहीं किया।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पूर्व खिलाड़ी ने विश्व कप प्रसारण के दौरान लाइव एक नस्लवादी टिप्पणी करके आक्रोश भड़का दिया। उसने दावा किया कि अश्वेत खिलाड़ियों में 80 मिनट से अधिक एकाग्रता नहीं होती, और त्वचा के रंग को सीधे प्रदर्शन से जोड़ दिया। लैटिन अमेरिकी मीडिया में इस घटना की व्यापक रूप से अस्वीकार्य के रूप में निंदा की गई।
विश्व कप के दौरान सर्बियाई टेलीविजन पर चौंकाने वाली नस्लवादी टिप्पणी: एक पूर्व स्ट्राइकर और अब विशेषज्ञ ने कहा कि अश्वेत खिलाड़ियों में पूरे मैच की एकाग्रता नहीं होती। इस टिप्पणी की पूरे यूरोप में तीखी आलोचना हुई और प्रसारक के हस्तक्षेप न करने पर सवाल उठाए गए। इस घटना ने फुटबॉल कमेंट्री में नस्लवाद पर बहस फिर से छेड़ दी है।
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