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खेलरविवार, 28 जून 2026

3-3 की रोमांचक बराबरी के बीच ईरान का विश्व कप सपना टूटा, ऑस्ट्रिया-अल्जीरिया पर लगे मिलीभगत के आरोप

ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया के बीच रोमांचक मुकाबला 3-3 की बराबरी पर छूटा, जिससे दोनों टीमें अगले दौर में पहुंच गईं और ईरान बाहर हो गया। कोचों ने सांठगांठ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फुटबॉल की जीत बताया।

अमेरिका के कैनसस सिटी स्थित एरोहेड स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-जे के इस निर्णायक मुकाबले ने फुटबॉल प्रेमियों को अंत तक बांधे रखा। ऑस्ट्रिया दो बार आगे हुआ लेकिन अल्जीरिया ने दोनों बार बराबरी कर ली। मार्को अर्नाटोविच और मार्सेल साबित्जर के गोलों के जवाब में रफीक बेलगाली और रियाद महरेज ने गोल दागे। निर्धारित समय तक स्कोर 2-2 था और लग रहा था कि दोनों टीमें इसी नतीजे से संतुष्ट हैं। लेकिन इंजरी टाइम के 93वें मिनट में अल्जीरियाई कप्तान महरेज ने एक शानदार गोल से टीम को 3-2 की बढ़त दिला दी। यह गोल न सिर्फ अल्जीरिया की जीत का संकेत था बल्कि इससे ईरान की उम्मीदें भी जिंदा हो गई थीं। मगर फुटबॉल तब तक खत्म नहीं हुई थी। मैच के आखिरी क्षणों में ऑस्ट्रिया के स्थानापन्न खिलाड़ी साशा कलाइदजिक ने 3-3 की बराबरी कराकर सनसनी मचा दी। इस ड्रॉ ने ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया को अगले दौर में पहुंचा दिया और ईरान की विश्व कप यात्रा का अंत कर दिया।

इस मैच से पहले ही समीकरण साफ थेः ग्रुप-जे में ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया दोनों को दूसरे और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान के तौर पर क्वालीफाई करने के लिए ड्रॉ की जरूरत थी। वहीं ईरान को अगले दौर में जाने के लिए इनमें से किसी एक की जीत अनिवार्य थी। ईरान अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा था और उसे उम्मीद थी कि यह मैच उसके पक्ष में जाएगा। लेकिन जब 60 मिनट बाद स्कोर 2-2 हुआ तो दोनों टीमों ने जोखिम न लेते हुए गेंद को अपने पास रखना शुरू कर दिया। एक समय अल्जीरिया ने लगातार 110 से अधिक पास खेले और स्टेडियम में दर्शक हूटिंग करने लगे। यह नजारा 1982 के 'गिजोन अपमान' की याद दिला रहा था जब पश्चिम जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने मिलीभगत कर अल्जीरिया को बाहर कर दिया था। विडंबना यह कि इस बार अल्जीरिया उसी रणनीति का लाभ उठाता दिख रहा था। लेकिन अंतिम मिनटों की उथल-पुथल ने सारे समीकरण बदल दिए। महरेज के गोल से ईरान एक पल के लिए खुश हुआ, लेकिन कलाइदजिक ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

मैच खत्म होते ही ईरानी मीडिया और प्रशंसकों ने दोनों टीमों पर सांठगांठ का आरोप लगाना शुरू कर दिया। अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया के खिलाड़ियों पर दांव-सट्टे और मैच फिक्सिंग जैसे शब्द इस्तेमाल हुए। हालांकि दोनों टीमों के कोचों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा, '3-3 के नतीजे वाले मैच में कोई यह नहीं कह सकता कि सांठगांठ थी, खासकर आखिरी 90 सेकंड को देखने के बाद।' उन्होंने कहा कि '40 साल के कोचिंग करियर में मैंने इतनी नाटकीय और अप्रत्याशित बढ़त वाला मैच नहीं देखा।' अल्जीरियाई कोच व्लादिमीर पेटकोविच ने भी कहा कि 'फुटबॉल आखिरकार जीत गया और 3-3 का नतीजा अपने आप में सब कुछ बयां करता है।' इन बयानों के बावजूद ईरानी जनता और मीडिया का एक तबका इसे 'बिस्कुट' (इतालवी फुटबॉल शब्दावली में ऐसा मैच जो दोनों टीमों के लिए फायदेमंद हो) करार देता रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस खेल में रणनीति और अवसरवाद का मेल देखने को मिला। गेम थ्योरी के 'नैश संतुलन' की तरह, दोनों टीमों ने ऐसा खेल दिखाया जिसमें कोई भी बड़ा जोखिम उठाकर अपनी क्वालीफिकेशन की संभावना खत्म नहीं करना चाहता था। लिहाजा ड्रॉ एक तार्किक परिणति थी, साजिश नहीं। इतिहास गवाह है कि इस तरह के हालात में टीमें अपने हित में खेलती हैं। फिलहाल ऑस्ट्रिया का सामना अगले दौर में यूरोपीय चैंपियन स्पेन से होगा, जबकि अल्जीरिया की टक्कर स्विट्जरलैंड से होगी। ऑस्ट्रिया 44 साल बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचा है और उसके कोच ने इसे सपने जैसा बताया। ईरान के लिए यह टूर्नामेंट निराशा लेकर आया, लेकिन उसकी यह विदाई इस बात का सबक है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में किस्मत दूसरों के हाथों में छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

48%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसमहाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
पीड़ितभावआक्रोशचेतावनी

ईरानी मीडिया ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया के बीच मिलीभगत का संदेह जताते हुए 3-3 की बराबरी को एक सुनियोजित 'बिस्कोटो' बता रही है। ऑस्ट्रियाई कोच के खंडन के बावजूद, आक्रोश हावी है और ईरान को खेल अन्याय का शिकार बताया गया।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
उदासीनताव्यावहारिकतासंदेह

यूरोपीय महाद्वीपीय मीडिया इस मैच को तटस्थता से कवर करते हुए 3-3 की रोमांचक बराबरी और रांगनिक के किसी सांठगांठ से इनकार को रिपोर्ट करते हैं। दोनों टीमों का आगे बढ़ना मैदानी अफरा‑तफरी का नतीजा बताया गया, षड्यंत्र के सिद्धांतों पर संदेह और तथ्यों व आधिकारिक बयानों पर ध्यान दिया गया।

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अपडेट 09:33 pm1 भाषा · 4 स्रोत
4 स्रोत|1 भाषा|4 मिनट पढ़ना
रविवार, 28 जून 2026

3-3 की रोमांचक बराबरी के बीच ईरान का विश्व कप सपना टूटा, ऑस्ट्रिया-अल्जीरिया पर लगे मिलीभगत के आरोप

ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया के बीच रोमांचक मुकाबला 3-3 की बराबरी पर छूटा, जिससे दोनों टीमें अगले दौर में पहुंच गईं और ईरान बाहर हो गया। कोचों ने सांठगांठ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फुटबॉल की जीत बताया।

अमेरिका के कैनसस सिटी स्थित एरोहेड स्टेडियम में खेले गए ग्रुप-जे के इस निर्णायक मुकाबले ने फुटबॉल प्रेमियों को अंत तक बांधे रखा। ऑस्ट्रिया दो बार आगे हुआ लेकिन अल्जीरिया ने दोनों बार बराबरी कर ली। मार्को अर्नाटोविच और मार्सेल साबित्जर के गोलों के जवाब में रफीक बेलगाली और रियाद महरेज ने गोल दागे। निर्धारित समय तक स्कोर 2-2 था और लग रहा था कि दोनों टीमें इसी नतीजे से संतुष्ट हैं। लेकिन इंजरी टाइम के 93वें मिनट में अल्जीरियाई कप्तान महरेज ने एक शानदार गोल से टीम को 3-2 की बढ़त दिला दी। यह गोल न सिर्फ अल्जीरिया की जीत का संकेत था बल्कि इससे ईरान की उम्मीदें भी जिंदा हो गई थीं। मगर फुटबॉल तब तक खत्म नहीं हुई थी। मैच के आखिरी क्षणों में ऑस्ट्रिया के स्थानापन्न खिलाड़ी साशा कलाइदजिक ने 3-3 की बराबरी कराकर सनसनी मचा दी। इस ड्रॉ ने ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया को अगले दौर में पहुंचा दिया और ईरान की विश्व कप यात्रा का अंत कर दिया।

इस मैच से पहले ही समीकरण साफ थेः ग्रुप-जे में ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया दोनों को दूसरे और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान के तौर पर क्वालीफाई करने के लिए ड्रॉ की जरूरत थी। वहीं ईरान को अगले दौर में जाने के लिए इनमें से किसी एक की जीत अनिवार्य थी। ईरान अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रहा था और उसे उम्मीद थी कि यह मैच उसके पक्ष में जाएगा। लेकिन जब 60 मिनट बाद स्कोर 2-2 हुआ तो दोनों टीमों ने जोखिम न लेते हुए गेंद को अपने पास रखना शुरू कर दिया। एक समय अल्जीरिया ने लगातार 110 से अधिक पास खेले और स्टेडियम में दर्शक हूटिंग करने लगे। यह नजारा 1982 के 'गिजोन अपमान' की याद दिला रहा था जब पश्चिम जर्मनी और ऑस्ट्रिया ने मिलीभगत कर अल्जीरिया को बाहर कर दिया था। विडंबना यह कि इस बार अल्जीरिया उसी रणनीति का लाभ उठाता दिख रहा था। लेकिन अंतिम मिनटों की उथल-पुथल ने सारे समीकरण बदल दिए। महरेज के गोल से ईरान एक पल के लिए खुश हुआ, लेकिन कलाइदजिक ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

मैच खत्म होते ही ईरानी मीडिया और प्रशंसकों ने दोनों टीमों पर सांठगांठ का आरोप लगाना शुरू कर दिया। अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया के खिलाड़ियों पर दांव-सट्टे और मैच फिक्सिंग जैसे शब्द इस्तेमाल हुए। हालांकि दोनों टीमों के कोचों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा, '3-3 के नतीजे वाले मैच में कोई यह नहीं कह सकता कि सांठगांठ थी, खासकर आखिरी 90 सेकंड को देखने के बाद।' उन्होंने कहा कि '40 साल के कोचिंग करियर में मैंने इतनी नाटकीय और अप्रत्याशित बढ़त वाला मैच नहीं देखा।' अल्जीरियाई कोच व्लादिमीर पेटकोविच ने भी कहा कि 'फुटबॉल आखिरकार जीत गया और 3-3 का नतीजा अपने आप में सब कुछ बयां करता है।' इन बयानों के बावजूद ईरानी जनता और मीडिया का एक तबका इसे 'बिस्कुट' (इतालवी फुटबॉल शब्दावली में ऐसा मैच जो दोनों टीमों के लिए फायदेमंद हो) करार देता रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस खेल में रणनीति और अवसरवाद का मेल देखने को मिला। गेम थ्योरी के 'नैश संतुलन' की तरह, दोनों टीमों ने ऐसा खेल दिखाया जिसमें कोई भी बड़ा जोखिम उठाकर अपनी क्वालीफिकेशन की संभावना खत्म नहीं करना चाहता था। लिहाजा ड्रॉ एक तार्किक परिणति थी, साजिश नहीं। इतिहास गवाह है कि इस तरह के हालात में टीमें अपने हित में खेलती हैं। फिलहाल ऑस्ट्रिया का सामना अगले दौर में यूरोपीय चैंपियन स्पेन से होगा, जबकि अल्जीरिया की टक्कर स्विट्जरलैंड से होगी। ऑस्ट्रिया 44 साल बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचा है और उसके कोच ने इसे सपने जैसा बताया। ईरान के लिए यह टूर्नामेंट निराशा लेकर आया, लेकिन उसकी यह विदाई इस बात का सबक है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में किस्मत दूसरों के हाथों में छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है।

स्रोतों में मतभेद

खेल · 4 स्रोत · 1 भाषा

48%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र40%
निंदक60%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसमहाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
पीड़ितभावआक्रोशचेतावनी

ईरानी मीडिया ऑस्ट्रिया और अल्जीरिया के बीच मिलीभगत का संदेह जताते हुए 3-3 की बराबरी को एक सुनियोजित 'बिस्कोटो' बता रही है। ऑस्ट्रियाई कोच के खंडन के बावजूद, आक्रोश हावी है और ईरान को खेल अन्याय का शिकार बताया गया।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
उदासीनताव्यावहारिकतासंदेह

यूरोपीय महाद्वीपीय मीडिया इस मैच को तटस्थता से कवर करते हुए 3-3 की रोमांचक बराबरी और रांगनिक के किसी सांठगांठ से इनकार को रिपोर्ट करते हैं। दोनों टीमों का आगे बढ़ना मैदानी अफरा‑तफरी का नतीजा बताया गया, षड्यंत्र के सिद्धांतों पर संदेह और तथ्यों व आधिकारिक बयानों पर ध्यान दिया गया।

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