
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: ट्रंप ने फिर छेड़ा साम्यवाद विरोधी अभियान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेमोक्रेटिक पार्टी को 'ईश्वरविहीन साम्यवादी' करार दे रहे हैं, जिसके पीछे वामपंथी उम्मीदवारों की हालिया जीत और चुनावी रणनीति है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले साम्यवाद विरोधी बयानबाजी तेज़ कर दी है। माउंट रशमोर और वाशिंगटन में स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को 'ईश्वरविहीन साम्यवादी' और देश के लिए 'कैंसर' बताया। यह रुख़ न्यूयॉर्क, कोलोराडो और वाशिंगटन डी.सी. में लोकतांत्रिक समाजवादी उम्मीदवारों की प्राथमिक चुनावी जीत के बाद सामने आया है, जिनमें न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी प्रमुख हैं। ट्रंप के सहयोगियों ने ऑनलाइन 'कम्युनिस्ट' शब्द के इस्तेमाल में 43 प्रतिशत की वृद्धि की है, और सदन अध्यक्ष माइक जॉनसन ने चेतावनी दी है कि 'बर्बर लोग दरवाज़े पर हैं'।
रिपब्लिकन रणनीतिकारों के अनुसार, इस मुहिम का उद्देश्य चुनाव को ट्रंप की नीतियों—महंगाई, ईरान युद्ध के नतीजों—पर जनमत संग्रह से हटाकर दो विचारधाराओं के बीच चुनाव में बदलना है। टफ़्ट्स विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञानी डैनियल ड्रेज़नर का कहना है कि कई मतदाता रिपब्लिकन पार्टी को अतिवादी मानते हैं, ऐसे में विपक्षी दल को और ज़्यादा चरमपंथी दिखाना एक जानी-पहचानी चाल है। व्हाइट हाउस ने एक्स पर लिखा, 'आप या तो साम्यवादी हो सकते हैं या देशभक्त, दोनों नहीं।' यह संदेश स्वतंत्र मतदाताओं और परंपरावादी डेमोक्रेट समर्थकों को लुभाने की कोशिश है, जो आर्थिक असंतोष के बीच सत्ता विरोधी लहर पैदा कर सकता है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर इस रणनीति को लेकर चिंता और आंतरिक तनाव दोनों हैं। पार्टी के उदारवादी धड़े ने खुले पत्र में स्पष्ट किया है कि 'हम पूंजीवादी हैं, समाजवादी नहीं' और 'हमें अमेरिका पर गर्व है।' वहीं, ममदानी जैसे नेताओं ने अमेरिका को 'मूलनिवासी विरोधी' और 'कुलीनतंत्र' से ग्रस्त बताया है, जिससे रिपब्लिकन को हमले का मौका मिला है। प्रिंसटन विश्वविद्यालय के इतिहासकार जूलियन ज़ेलिज़र इसे 'रेड बेटिंग' की पुरानी परंपरा मानते हैं, जो प्रथम विश्व युद्ध के बाद की पहली 'लाल डर' और शीत युद्ध काल के मैक्कार्थीवाद से जुड़ी है।
हालांकि, अमेरिकी विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक थॉमस ज़ीट्ज़ॉफ़ के अनुसार, शीत युद्ध समाप्त हुए 33 वर्ष हो चुके हैं और सोवियत संघ के बिना मतदाताओं को इस 'ख़तरे' के ख़िलाफ़ लामबंद करना कठिन है। संचार रणनीतिकार ब्रैड चेस का मानना है कि 50 वर्ष से कम आयु के अमेरिकियों के लिए 'साम्यवाद' शब्द अब पहले जैसी प्रतिध्वनि नहीं रखता। एक कैटो संस्थान सर्वेक्षण में 86 प्रतिशत अमेरिकी देश के प्रति आभारी हैं, लेकिन युवा पीढ़ी पर इस लेबल का डर कम हो सकता है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, शीत युद्ध की यह भाषा अतीत की वैचारिक गुटबंदियों की याद दिलाती है, फिर भी यह मुख्यतः अमेरिकी घरेलू रणनीति है।
मध्यावधि चुनाव नज़दीक आने के साथ यह बयानबाजी और तेज़ होने की संभावना है, लेकिन इसका चुनावी प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है। डेमोक्रेटिक नेतृत्व इसे आर्थिक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बताता है, जबकि रिपब्लिकन खेमा इसे बहुमत हासिल करने का औज़ार मान रहा है। मतदान से पहले दोनों दलों के बीच विचारधारा की यह लड़ाई तय करेगी कि मतदाता आर्थिक चिंताओं को तरजीह देते हैं या सांस्कृतिक पहचान के सवालों को।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
Trump's McCarthyist revival is a dangerous ploy that exploits real but marginal socialist currents to smear the entire Democratic Party. This historical parallel delegitimizes his rhetoric and warns of its corrosive effect on democratic discourse.
The bloc anchors its critique in a historical parallel with McCarthyism, implying that Trump's red scare is a discredited tactic, while simultaneously acknowledging the factual basis of socialist candidates to demonstrate the rhetorical inflation.
The bloc omits the perspective that Trump's red scare resonates with a significant portion of the American electorate, and does not engage with the conservative narrative of a patriotic silent majority opposing left-wing extremism.
Trump revives the red scare with apocalyptic warnings of a communist menace, framing the midterms as a battle for civilization itself. The reporting conveys the intensity of his rhetoric without endorsing or condemning it.
The bloc reproduces Trump's own apocalyptic language and framing, allowing the reader to experience the rhetoric directly, which creates a sense of urgency without explicit editorializing.
The bloc omits any critical analysis of Trump's strategy, the historical parallel to McCarthyism, and the Democratic internal divisions over socialism, presenting the red scare rhetoric as a straightforward campaign tactic.
Trump's red scare is either a desperate and ineffective tactic or a necessary wake-up call against leftist extremism, depending on which side of the Atlantic media you read. The critical outlets see it as a McCarthyist throwback, while the conservative voice champions the patriotic backlash.
The bloc juxtaposes opposing editorial lines without reconciling them, thereby mirroring the actual political polarization in the US and allowing readers to choose their preferred interpretation.
The bloc omits the European historical critique of McCarthyism and the detailed analysis of Democratic socialist primary victories, focusing instead on domestic political commentary. The conservative piece omits any acknowledgment that Trump's rhetoric might be exaggerated or harmful.
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