
फीफा ने फ्रांस की दलील ठुकराई, ओलिसे का पीला कार्ड कायम; मोरक्को के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में तलवार लटकी
फीफा ने फ्रांस की अपील खारिज कर माइकल ओलिसे का पीला कार्ड बरकरार रखा, जिससे वह मोरक्को के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में एक और चेतावनी मिलने पर सेमीफाइनल से चूक सकते हैं; यह फैसला अमेरिकी खिलाड़ी बालोगुन को मिली राहत के विपरीत है।
फीफा ने बुधवार को फ्रांसीसी फुटबॉल महासंघ की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें स्टार विंगर माइकल ओलिसे के पीले कार्ड को रद्द करने की मांग की गई थी। यह कार्ड पैराग्वे के खिलाफ अंतिम-16 मुकाबले के 97वें मिनट में माटियास गालार्सा से हुई झड़प के बाद दिखाया गया था। रीप्ले में साफ नजर आया कि ओलिसे ने सिर्फ विरोधी खिलाड़ी की जर्सी पकड़ी थी और मुंह पर उंगली रखकर चुप रहने का इशारा किया, जबकि गालार्सा चेहरा पकड़कर जमीन पर गिर पड़े। कोच दिदिएर देसां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की, “पीले कार्ड में कोई बदलाव नहीं हुआ, आज सुबह फीफा ने हमें इसके बरकरार रहने की सूचना दे दी।”
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन का लाल कार्ड निलंबन स्थगित कर दिया गया था। बोस्निया के खिलाफ खतरनाक खेल के लिए मिले लाल कार्ड के बाद बालोगुन पर स्वतः एक मैच का प्रतिबंध लगना था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो से फोन पर बात करने के बाद यह सजा टल गई और वह बेल्जियम के खिलाफ खेले। यूरोपीय मीडिया ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दबाव का नतीजा बताया, जबकि मध्य-पूर्व और दक्षिण अमेरिकी आउटलेट्स ने फीफा के अनुशासनात्मक मानकों में स्पष्ट दोहरेपन की ओर इशारा किया। फ्रांसीसी पक्ष ने भी बालोगुन मिसाल का हवाला देते हुए अपील की थी, लेकिन फीफा ने इस बार सख्त रुख अपनाया।
इस निर्णय ने ओलिसे को मोरक्को के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में बेहद सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा असिस्ट देने वाले इस खिलाड़ी को एक और पीला कार्ड मिलने पर संभावित सेमीफाइनल से बाहर बैठना पड़ेगा। फ्रांस के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि ब्रैडली बार्कोला और मानू कोने भी पैराग्वे मैच में बुक हुए थे और वे भी निलंबन की कगार पर हैं। देसां ने हालांकि रेफरी नियुक्तियों पर कोई विवाद खड़ा करने से इनकार करते हुए कहा कि उनका मुकाबला मोरक्को से है, रेफरी से नहीं।
गुरुवार को बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला 2022 विश्व कप सेमीफाइनल की पुनरावृत्ति है, जिसे फ्रांस ने 2-0 से जीता था। फ्रांस लगातार चौथी बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचा है और जीत की स्थिति में लगातार तीसरे सेमीफाइनल में प्रवेश करने वाला तीसरा देश बन सकता है। देसां ने साफ किया कि टूर्नामेंट के बाद पद छोड़ने की घोषणा के बावजूद उनका पूरा ध्यान मोरक्को को हराने पर है। ओलिसे के लिए अगली चुनौती सिर्फ मोरक्को की रक्षापंक्ति नहीं, बल्कि अनुशासन की वह पतली डोर भी है जो उनके विश्व कप सपने को एक झटके में तोड़ सकती है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.80 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
The Paraguayan player simulated, and FIFA rightly kept the card.
By focusing on the simulation, the decision is legitimized and the French player is absolved of blame.
The Balogun case is omitted, which could have raised questions about FIFA's consistency.
FIFA has a double standard: it forgives the US but punishes France.
By comparing the two cases, a narrative of political bias is constructed, where FIFA yields to American pressure but not French.
Differences between the two incidents (red card vs yellow, simulation) are not considered, which could justify different decisions.
FIFA rejected the appeal, but has already shown flexibility with the US.
By juxtaposing the two episodes without explicit comment, the reader is left to conclude unequal treatment.
The context of the Balogun case is not elaborated, which might be different.
FIFA's decision is in stark contrast to the Balogun case, raising doubts about consistency.
By highlighting the contrast without direct accusation, the reader is invited to judge the inconsistency.
The simulation by the Paraguayan player is not mentioned, which could justify the yellow card.
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