
अमेरिका ने ईरान पर समुद्री नाकेबंदी फिर शुरू की, होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ा
अमेरिकी सेना 14 जुलाई से ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर जाने वाले सभी जहाजों पर रोक लगाएगी, जबकि तेहरान ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) और नौसेना के नेतृत्व वाले संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (जेएमआईसी) ने सोमवार को घोषणा की कि 14 जुलाई को 20:00 जीएमटी (भारतीय समयानुसार 15 जुलाई, 01:30 बजे) से ईरान के सभी बंदरगाहों, तेल टर्मिनलों और तटीय इलाकों पर समुद्री नाकेबंदी फिर से लागू कर दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य झड़पें तेज हो गई थीं और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सात सप्ताह के न्यूनतम स्तर पर आ गई थी। सेंटकॉम के अनुसार, नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले किसी भी जहाज को रोका जा सकता है, उसका मार्ग बदला जा सकता है या उसे जब्त किया जा सकता है, और अनुपालन न करने पर बल प्रयोग की कानूनी अनुमति होगी। हालांकि, गैर-ईरानी गंतव्यों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से तटस्थ आवागमन बाधित नहीं होगा।
वाशिंगटन के रुख के अनुसार, यह नाकेबंदी ईरान को तेल निर्यात से होने वाली आय से वंचित करने के लिए है, जो उसकी अर्थव्यवस्था का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ‘ईरानी नाकेबंदी’ को बहाल कर रहा है और अब से वह ‘होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक’ होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जलमार्ग से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों से उनके माल के मूल्य का 20 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा, ताकि सुरक्षा प्रदान करने की लागत की भरपाई हो सके। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कुछ सप्ताह पहले ही अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर शुल्क लगाने के विरोध में बयान दे चुके थे, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने यह नीतिगत बदलाव किया है।
तेहरान ने इस कदम को क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संरक्षक हमेशा से ईरान रहा है और आगे भी रहेगा, तथा 20 प्रतिशत शुल्क बहुत अधिक है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने दोहराया है कि किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इससे पहले 13 अप्रैल से 18 जून तक लागू पहली नाकेबंदी के दौरान अमेरिकी सेना ने 140 से अधिक जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया था और नौ गैर-अनुपालक जहाजों को निष्क्रिय किया था। उस नाकेबंदी को एक अंतरिम शांति समझौते के तहत हटाया गया था, लेकिन 8 जुलाई से फिर शुरू हुई लड़ाई के बाद इसे दोबारा लागू किया जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका तत्काल असर दिखा है—सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस का परिवहन होता है, इसलिए भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मूल्य वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है। दक्षिण एशिया के लिए यह संकट ऐसे समय आया है जब क्षेत्र पहले से ही ऊर्जा लागत और व्यापार मार्गों की अनिश्चितता से जूझ रहा है। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, उत्तरी अरब सागर में इस समय दो विमानवाहक पोत और दस से अधिक विध्वंसक सहित 19 युद्धपोत तैनात हैं, जो लंबे समय तक नाकेबंदी बनाए रखने की क्षमता दर्शाते हैं।
फिलहाल कूटनीतिक समाधान की संभावना धूमिल है। पिछले महीने हुए प्रारंभिक शांति समझौते के बावजूद दोनों पक्ष जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हैं। अमेरिकी सेंटकॉम ने कहा है कि वह नाकेबंदी को तब तक जारी रखने के लिए तैयार है जब तक आवश्यक हो, जबकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दुश्मन से जुड़े जहाजों के लिए जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी दी है। अगला ठोस कदम 14 जुलाई को नाकेबंदी का प्रवर्तन शुरू होना है, जिसके बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
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| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.30 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
नौसेना नाकाबंदी की बहाली एक तकनीकी मामला है, जो पहले भी आजमाया जा चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका कहता है कि वह नियमों का पालन करने वाले जहाजों में बाधा नहीं डालेगा।
ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग करके कार्रवाई को सामान्य बनाता है, इसे पहले से लागू उपाय के रूप में प्रस्तुत करता है और इसलिए असाधारण नहीं।
ईरानी प्रतिक्रिया या होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल विवाद का उल्लेख नहीं करता।
ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर 'कब्जा' करने और सुरक्षा के लिए भुगतान की मांग करने की घोषणा की। नौसेना नाकाबंदी एकतरफा वृद्धि का नवीनतम कार्य है।
ट्रम्प के प्रत्यक्ष उद्धरण का उपयोग करके एकतरफापन और उत्तेजना पर जोर दिया जाता है, जिससे कार्रवाई आक्रामकता के रूप में दिखाई देती है।
ईरानी स्थिति या इस तथ्य की रिपोर्ट नहीं करता कि नाकाबंदी पिछले उपाय की बहाली है।
ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी मंगलवार से प्रभावी होगी। अनधिकृत जहाजों को रोका जाएगा, मोड़ा जाएगा और पकड़ा जाएगा।
कार्रवाई को एक तकनीकी और नौकरशाही प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है, बिना राजनीतिक संदर्भ के, इसे एक नियमित उपाय बनाता है।
ट्रम्प के बयान और पिछली नाकाबंदी के ऐतिहासिक संदर्भ के साथ-साथ ईरानी प्रतिक्रिया को छोड़ देता है।
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