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अर्थव्यवस्थासोमवार, 15 जून 2026

AI का दोहरा श्रम बाजार: नौकरियों का सृजन और विनाश एक साथ

वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक साथ लाखों पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर रही है और नए कौशल-आधारित अवसर पैदा कर रही है, जिससे शिक्षा से लेकर कॉरपोरेट रणनीति तक सब कुछ बदल रहा है।

दुनिया भर के श्रम बाजार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक गहरी दरार पैदा कर रही है। परामर्श फर्म पीडब्ल्यूसी की एक नई रिपोर्ट, जिसने छह महाद्वीपों के एक अरब से अधिक नौकरी विज्ञापनों का विश्लेषण किया, ‘दो-पटरी श्रम बाजार’ की चेतावनी देती है। एक पटरी पर AI विशेषज्ञों के लिए ‘बल-गुणक’ बन रहा है, जहाँ नियमित कार्य स्वचालित हो जाते हैं और मानवीय निर्णय पर जोर बढ़ता है। दूसरी पटरी पर यह गैर-विशेषज्ञों के लिए जटिल काम आसान बना रहा है, जिससे कुछ भूमिकाएँ ‘लोकतांत्रिक’ हो रही हैं। लेकिन इस परिवर्तन की एक छिपी कीमत है। एएमडी के मुख्य सूचना अधिकारी हसमुख रंजन ने गणना की कि एक कर्मचारी को AI एजेंटों पर निर्भर रहने के लिए प्रशिक्षित करने पर टोकन खर्च लगभग 200 डॉलर प्रति सप्ताह आता है—यानी प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर सालाना। 90,000 कर्मचारियों वाली कंपनी के लिए यह बिल 900 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, एक ऐसी लागत जो कुछ साल पहले अस्तित्व में ही नहीं थी। यह आँकड़ा उन सीईओ के लिए सोचने पर मजबूर करता है जो AI के नाम पर छँटनी कर रहे हैं।

इस बदलाव के मद्देनजर शिक्षा जगत में अभूतपूर्व फेरबदल देखने को मिल रहा है। चीन ने अपने विश्वविद्यालयों से कला, मानविकी और भाषाओं की 12,000 डिग्रियाँ हटा दी हैं—कुल कार्यक्रमों का लगभग एक-तिहाई—और उनकी जगह ‘सन्निहित बुद्धिमत्ता’ जैसे 10,200 तकनीकी-केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। यह कदम चीन की AI-संचालित अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। भारत, संयुक्त अरब अमीरात, कजाकिस्तान, स्पेन और ब्रिटेन भी अपने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में AI को शामिल कर रहे हैं। अमीरात में ‘तमकीन 5.0’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को एजेंटिक AI हैकाथॉन के जरिए भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर रहे हैं, जबकि इटली में डिजिटल विश्वविद्यालयों के दाखिले पिछले दशक में 470 प्रतिशत बढ़े हैं। वहाँ 86.8 प्रतिशत स्नातक मानते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा ने उन्हें नई तकनीकी माँगों के लिए बेहतर तैयार किया, और 45.1 प्रतिशत का कहना है कि इसके बिना डिग्री एक अप्राप्य सपना ही रहती।

कॉरपोरेट जगत में AI एक साथ राजस्व का स्रोत और आंतरिक तनाव का कारण बन रहा है। मेटा ने फेसबुक सर्च में ‘AI मोड’ लॉन्च किया, जो म्यूज स्पार्क मॉडल की मदद से ग्रुप्स और रील्स के सार्वजनिक कंटेंट से सीधे जवाब देता है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषक के अनुसार, यह सुविधा कंपनी के लिए सालाना 10 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व जुटा सकती है। लेकिन इसी मेटा के तकनीकी प्रमुख एंड्रयू बॉसवर्थ ने आंतरिक ज्ञापन में AI पुनर्गठन को ‘बहुत खराब’ बताया और स्वीकार किया कि इससे कर्मचारियों का अपने पेशेवर मूल्य और करियर विकास पर से भरोसा उठ गया है। कंपनी अब प्रबंधकों के अधीन कर्मचारियों की संख्या 20 तक सीमित करने, ‘AI कोचिंग’ उपकरण देने और कार्यालय में सामाजिक मेलजोल बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि AI का सबसे बड़ा झटका उन मध्यम-स्तरीय कार्यालयीन नौकरियों पर पड़ रहा है जो अक्सर चर्चा में नहीं आतीं: ग्राहक सेवा, बहीखाता, पेरोल और मानव संसाधन विशेषज्ञ। ये करोड़ों पद, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ कार्यरत हैं, मध्यम वर्गीय आय या उस तक पहुँचने की सीढ़ी प्रदान करते थे। अब ये सीढ़ियाँ टूट रही हैं। दूसरी ओर, अमीरात के आँकड़े बताते हैं कि 95 प्रतिशत नई रोजगार संभावनाएँ AI और डिजिटल बुनियादी ढाँचे से जुड़ी हैं, और 4 प्रतिशत नौकरियाँ सीधे AI क्षेत्र में हैं। मशीन लर्निंग, सांख्यिकीय विश्लेषण और आईटी नेटवर्किंग जैसे उन्नत कौशलों की माँग तेजी से बढ़ रही है।

आगे का रास्ता संतुलन की माँग करता है। अमीरात ने AI को केवल तकनीकी औजार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम बताते हुए एक संघीय AI एवं डेटा प्राधिकरण बनाया है और मानवीय कार्यों में पूर्वानुमानी क्षमता विकसित कर रहा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जहाँ युवा आबादी बहुत बड़ी है और पारंपरिक नौकरियाँ अब भी रोजगार का मुख्य आधार हैं, यह दोहरी चुनौती है: एक ओर AI अपनाने की लागत और कौशल अंतराल को पाटना, दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना कि तकनीकी छलांग करोड़ों लोगों को पीछे न छोड़ दे। एनवीडिया के जेन्सन हुआंग की चेतावनी—‘AI आपकी नौकरी नहीं लेगा, लेकिन AI जानने वाला व्यक्ति ले सकता है’—अब हर अर्थव्यवस्था के लिए एक नीतिगत सच्चाई बन चुकी है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

64%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa del Golfo araboStampa latinoamericana
Stampa del Golfo arabo
pragmatismoscetticismo

एआई लागत में कटौती नहीं कर रहा है, बल्कि साइबर सुरक्षा में कुल स्वामित्व लागत को नया आकार दे रहा है। इस बीच, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, जो कभी तकनीकी क्षेत्र का सबसे मुनाफ़े वाला पेशा था, एआई मॉडलों द्वारा बदला जा रहा है जो जटिल प्रोग्रामिंग कार्य कर सकते हैं, जिससे इस भूमिका के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। कथा व्यावहारिक बनी हुई है, बिना किसी अलार्म के।

Stampa latinoamericana/ mercato
pragmatismotrionfo

एआई छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए खेल का मैदान समतल कर रहा है, उन उन्नत क्षमताओं को सुलभ बना रहा है जो कभी केवल तकनीकी दिग्गजों के लिए आरक्षित थीं। यह लोकतंत्रीकरण पहले के विभेदकों को मानक उपकरणों में बदल देता है, जिससे छोटे खिलाड़ियों को ठोस लाभ मिलता है। दृष्टिकोण समावेशी विकास को लेकर आशावादी है।

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सोमवार, 15 जून 2026

AI का दोहरा श्रम बाजार: नौकरियों का सृजन और विनाश एक साथ

वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक साथ लाखों पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर रही है और नए कौशल-आधारित अवसर पैदा कर रही है, जिससे शिक्षा से लेकर कॉरपोरेट रणनीति तक सब कुछ बदल रहा है।

दुनिया भर के श्रम बाजार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक गहरी दरार पैदा कर रही है। परामर्श फर्म पीडब्ल्यूसी की एक नई रिपोर्ट, जिसने छह महाद्वीपों के एक अरब से अधिक नौकरी विज्ञापनों का विश्लेषण किया, ‘दो-पटरी श्रम बाजार’ की चेतावनी देती है। एक पटरी पर AI विशेषज्ञों के लिए ‘बल-गुणक’ बन रहा है, जहाँ नियमित कार्य स्वचालित हो जाते हैं और मानवीय निर्णय पर जोर बढ़ता है। दूसरी पटरी पर यह गैर-विशेषज्ञों के लिए जटिल काम आसान बना रहा है, जिससे कुछ भूमिकाएँ ‘लोकतांत्रिक’ हो रही हैं। लेकिन इस परिवर्तन की एक छिपी कीमत है। एएमडी के मुख्य सूचना अधिकारी हसमुख रंजन ने गणना की कि एक कर्मचारी को AI एजेंटों पर निर्भर रहने के लिए प्रशिक्षित करने पर टोकन खर्च लगभग 200 डॉलर प्रति सप्ताह आता है—यानी प्रति व्यक्ति 10,000 डॉलर सालाना। 90,000 कर्मचारियों वाली कंपनी के लिए यह बिल 900 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है, एक ऐसी लागत जो कुछ साल पहले अस्तित्व में ही नहीं थी। यह आँकड़ा उन सीईओ के लिए सोचने पर मजबूर करता है जो AI के नाम पर छँटनी कर रहे हैं।

इस बदलाव के मद्देनजर शिक्षा जगत में अभूतपूर्व फेरबदल देखने को मिल रहा है। चीन ने अपने विश्वविद्यालयों से कला, मानविकी और भाषाओं की 12,000 डिग्रियाँ हटा दी हैं—कुल कार्यक्रमों का लगभग एक-तिहाई—और उनकी जगह ‘सन्निहित बुद्धिमत्ता’ जैसे 10,200 तकनीकी-केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। यह कदम चीन की AI-संचालित अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। भारत, संयुक्त अरब अमीरात, कजाकिस्तान, स्पेन और ब्रिटेन भी अपने राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में AI को शामिल कर रहे हैं। अमीरात में ‘तमकीन 5.0’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को एजेंटिक AI हैकाथॉन के जरिए भविष्य का नेतृत्व करने के लिए तैयार कर रहे हैं, जबकि इटली में डिजिटल विश्वविद्यालयों के दाखिले पिछले दशक में 470 प्रतिशत बढ़े हैं। वहाँ 86.8 प्रतिशत स्नातक मानते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा ने उन्हें नई तकनीकी माँगों के लिए बेहतर तैयार किया, और 45.1 प्रतिशत का कहना है कि इसके बिना डिग्री एक अप्राप्य सपना ही रहती।

कॉरपोरेट जगत में AI एक साथ राजस्व का स्रोत और आंतरिक तनाव का कारण बन रहा है। मेटा ने फेसबुक सर्च में ‘AI मोड’ लॉन्च किया, जो म्यूज स्पार्क मॉडल की मदद से ग्रुप्स और रील्स के सार्वजनिक कंटेंट से सीधे जवाब देता है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषक के अनुसार, यह सुविधा कंपनी के लिए सालाना 10 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व जुटा सकती है। लेकिन इसी मेटा के तकनीकी प्रमुख एंड्रयू बॉसवर्थ ने आंतरिक ज्ञापन में AI पुनर्गठन को ‘बहुत खराब’ बताया और स्वीकार किया कि इससे कर्मचारियों का अपने पेशेवर मूल्य और करियर विकास पर से भरोसा उठ गया है। कंपनी अब प्रबंधकों के अधीन कर्मचारियों की संख्या 20 तक सीमित करने, ‘AI कोचिंग’ उपकरण देने और कार्यालय में सामाजिक मेलजोल बढ़ाने जैसे कदम उठा रही है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि AI का सबसे बड़ा झटका उन मध्यम-स्तरीय कार्यालयीन नौकरियों पर पड़ रहा है जो अक्सर चर्चा में नहीं आतीं: ग्राहक सेवा, बहीखाता, पेरोल और मानव संसाधन विशेषज्ञ। ये करोड़ों पद, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ कार्यरत हैं, मध्यम वर्गीय आय या उस तक पहुँचने की सीढ़ी प्रदान करते थे। अब ये सीढ़ियाँ टूट रही हैं। दूसरी ओर, अमीरात के आँकड़े बताते हैं कि 95 प्रतिशत नई रोजगार संभावनाएँ AI और डिजिटल बुनियादी ढाँचे से जुड़ी हैं, और 4 प्रतिशत नौकरियाँ सीधे AI क्षेत्र में हैं। मशीन लर्निंग, सांख्यिकीय विश्लेषण और आईटी नेटवर्किंग जैसे उन्नत कौशलों की माँग तेजी से बढ़ रही है।

आगे का रास्ता संतुलन की माँग करता है। अमीरात ने AI को केवल तकनीकी औजार नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम बताते हुए एक संघीय AI एवं डेटा प्राधिकरण बनाया है और मानवीय कार्यों में पूर्वानुमानी क्षमता विकसित कर रहा है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जहाँ युवा आबादी बहुत बड़ी है और पारंपरिक नौकरियाँ अब भी रोजगार का मुख्य आधार हैं, यह दोहरी चुनौती है: एक ओर AI अपनाने की लागत और कौशल अंतराल को पाटना, दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना कि तकनीकी छलांग करोड़ों लोगों को पीछे न छोड़ दे। एनवीडिया के जेन्सन हुआंग की चेतावनी—‘AI आपकी नौकरी नहीं लेगा, लेकिन AI जानने वाला व्यक्ति ले सकता है’—अब हर अर्थव्यवस्था के लिए एक नीतिगत सच्चाई बन चुकी है।

स्रोतों में मतभेद

अर्थव्यवस्था · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

64%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक20%
न्यूनत्र40%
निंदक40%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa del Golfo araboStampa latinoamericana
Stampa del Golfo arabo
pragmatismoscetticismo

एआई लागत में कटौती नहीं कर रहा है, बल्कि साइबर सुरक्षा में कुल स्वामित्व लागत को नया आकार दे रहा है। इस बीच, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, जो कभी तकनीकी क्षेत्र का सबसे मुनाफ़े वाला पेशा था, एआई मॉडलों द्वारा बदला जा रहा है जो जटिल प्रोग्रामिंग कार्य कर सकते हैं, जिससे इस भूमिका के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। कथा व्यावहारिक बनी हुई है, बिना किसी अलार्म के।

Stampa latinoamericana/ mercato
pragmatismotrionfo

एआई छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए खेल का मैदान समतल कर रहा है, उन उन्नत क्षमताओं को सुलभ बना रहा है जो कभी केवल तकनीकी दिग्गजों के लिए आरक्षित थीं। यह लोकतंत्रीकरण पहले के विभेदकों को मानक उपकरणों में बदल देता है, जिससे छोटे खिलाड़ियों को ठोस लाभ मिलता है। दृष्टिकोण समावेशी विकास को लेकर आशावादी है।

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