
अमेरिकी दूत विटकॉफ़ स्विट्ज़रलैंड रवाना, लेबनान युद्धविराम के बाद ईरान से परमाणु वार्ता की उम्मीद
लेबनान में इसराइल-हिज़्बुल्लाह संघर्षविराम की घोषणा के बाद अमेरिका और ईरान के शीर्ष वार्ताकार तकनीकी बातचीत शुरू करने के लिए स्विस धरती पर पहुँच रहे हैं, जहाँ 60 दिनों के भीतर अंतिम परमाणु समझौते पर मुहर लगानी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ईरान के साथ पहले दौर की बातचीत के लिए स्विट्ज़रलैंड जा रहे हैं। एक्सियोस और सीएनएन ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी। उधर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची भी आज स्विट्ज़रलैंड रवाना होने की योजना पर हैं, हालाँकि ईरानी सूत्रों के अनुसार यह कार्यक्रम बदल भी सकता है। यह घटनाक्रम उस दिन सामने आया जब इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच शुक्रवार को युद्धविराम की घोषणा हुई। इससे पहले, लेबनान में जारी लड़ाई के कारण 19 जून को होने वाली औपचारिक वार्ता स्थगित कर दी गई थी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस ने अपनी यात्रा रद्द कर दी थी। बाद में व्हाइट हाउस ने इसे ‘प्रशासनिक जटिलताएँ’ बताया।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, मध्यस्थता में जुटे अधिकारी 18 जून को दोनों देशों के बीच हुए समझौता-ज्ञापन (एमओयू) को तकनीकी बातचीत के ज़रिये आगे बढ़ाना चाहते हैं। वहीं, मध्यस्थ देशों के सूत्रों ने एक्सियोस को बताया कि विदेश मंत्री अराक़ची ने क्षेत्रीय साझेदारों से स्पष्ट किया है कि लेबनान में युद्धविराम ईरान के लिए ‘गंभीर और निर्णायक मुद्दा’ है। तेहरान वार्ता में शामिल होने से पहले संघर्षविराम को ज़मीन पर लागू होते देखना चाहता है। पाकिस्तानी गृह मंत्री की तेहरान यात्रा भी इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय मध्यस्थ बातचीत की रफ़्तार बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, 14 जून को तैयार हुए और 18 जून की रात दूरस्थ रूप से हस्ताक्षरित एमओयू ने 28 फरवरी को इसराइल-अमेरिकी हमलों से शुरू हुए सैन्य टकराव को विराम देने की रूपरेखा तय की। इसमें 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अमेरिकी प्रतिबंधों, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाली और डी-एस्केलेशन गारंटियों पर अंतिम समझौता करने की समय-सीमा तय हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इसे ‘ईरान का बिना शर्त आत्मसमर्पण’ कहा, साथ ही चेतावनी दी कि समझौता न होने पर ऐसे कदम उठाए जाएँगे जो तेहरान के लिए सुखद नहीं होंगे। वहीं, ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि अंतिम समझौते पर बातचीत एमओयू के विशिष्ट प्रावधानों के कार्यान्वयन से जुड़ी होगी और तेहरान को कोई जल्दी नहीं है।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से देखें तो पाकिस्तान और क़तर जैसे मध्यस्थ देशों की सक्रियता बताती है कि यह वार्ता केवल अमेरिका-ईरान द्विपक्षीय मामला नहीं रह गई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारत सहित पूरे एशिया की गहरी हिस्सेदारी है। फिलहाल, स्विट्ज़रलैंड में अमेरिकी दूतों और ईरानी विदेश मंत्री के पहुँचने की उम्मीद है, लेकिन नए सिरे से बातचीत की तारीख़ अभी तय नहीं है। वार्ता की सफलता इस बात पर टिकी होगी कि लेबनान में युद्धविराम कितनी मज़बूती से कायम रहता है और दोनों पक्ष निर्धारित 60-दिवसीय समय-सीमा के भीतर संवेदनशील मुद्दों पर कैसे सहमति बनाते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान परमाणु वार्ता स्विट्जरलैंड में पुनः शुरू, अमेरिकी दूत विटकॉफ़ पहुंचे। तेहरान ने देरी के लिए इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया, लेबनान में बमबारी का हवाला दिया। 14-सूत्रीय प्रारंभिक समझौते से तनाव के बीच नई उम्मीद जगी।
विशेष दूत विटकॉफ़ ईरान के साथ परमाणु वार्ता को पुनर्जीवित करने स्विट्जरलैंड जा रहे हैं। देरी इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लड़ाई के कारण हुई। इस सप्ताह हस्ताक्षरित अस्थायी समझौता युद्ध समाप्त करने के लिए व्यापक वार्ता का मार्ग प्रशस्त करता है।
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