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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: उम्रदराज़ आबादी के स्वास्थ्य पर योग की पकड़ताजा इजरायली हमलों से दक्षिण लेबनान में पांच की मौत, युद्धविराम पर संकटअमेरिकी दूत विटकॉफ स्विट्जरलैंड में, ईरान से परमाणु समझौते की वार्ता की तैयारीलेबनान में संघर्षविराम के बाद यूएस-ईरान परमाणु समझौते की दिशा में नया मोड़ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराया, कुन्हा के दो गोल और विनीसियस का जलवापिता की दूरी, मन की स्वीकृति और सीखते रहने की चुपचाप उम्मीदविश्व कप: हैती पर 3-0 से जीत के बाद भी रफिन्हा की चोट ने ब्राजील को चिंता में डालानेमार की वापसी: स्कॉटलैंड के खिलाफ उतरेंगे मैदान में, ब्राज़ील को मिलेगा बलअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: उम्रदराज़ आबादी के स्वास्थ्य पर योग की पकड़ताजा इजरायली हमलों से दक्षिण लेबनान में पांच की मौत, युद्धविराम पर संकटअमेरिकी दूत विटकॉफ स्विट्जरलैंड में, ईरान से परमाणु समझौते की वार्ता की तैयारीलेबनान में संघर्षविराम के बाद यूएस-ईरान परमाणु समझौते की दिशा में नया मोड़ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराया, कुन्हा के दो गोल और विनीसियस का जलवापिता की दूरी, मन की स्वीकृति और सीखते रहने की चुपचाप उम्मीदविश्व कप: हैती पर 3-0 से जीत के बाद भी रफिन्हा की चोट ने ब्राजील को चिंता में डालानेमार की वापसी: स्कॉटलैंड के खिलाफ उतरेंगे मैदान में, ब्राज़ील को मिलेगा बल
अर्थव्यवस्था और बाजाररविवार, 14 जून 2026

ईरान में युद्ध और शांति का फैसला अब सर्वोच्च नेता के हाथ: राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का स्पष्ट संदेश

अमेरिका-इज़राइल के साथ तनाव के बीच, ईरानी राष्ट्रपति ने आंतरिक बहस को विराम देते हुए कहा कि सभी रणनीतिक निर्णय सर्वोच्च नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद लेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने रविवार को एक विस्तृत मीडिया बैठक में देश की सबसे बड़ी आंतरिक बहस पर विराम लगा दिया: युद्ध और शांति का अंतिम निर्णय किसके हाथ में है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 'युद्ध और बातचीत का फैसला सर्वोच्च नेता और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पास है, और सभी को इसका पालन करना होगा।' यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान के भीतर कुछ गुट अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर नाराजगी जता रहे थे और सरकारी टेलीविजन दिवंगत सर्वोच्च नेता के उन बयानों को बार-बार प्रसारित कर रहा था जिनमें बातचीत का विरोध था। पेज़ेश्कियान ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मीडिया हमेशा सर्वोच्च नेता के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करता, और खुलासा किया कि उन्होंने स्वयं पूर्व नेता से 'न युद्ध, न शांति' की थकाऊ स्थिति से बाहर निकलने की अनुमति ली थी। राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

तेहरान के इस रुख को यरुशलम और वाशिंगटन से भिन्न नजरिये से देखा जा रहा है। इज़राइली विश्लेषक मानते हैं कि अकेला सैन्य बल ईरान और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को परास्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन ईरानी शासन सीरिया खोने के बाद भी हिज़्बुल्लाह, यमन के हूती और इराकी शिया मिलिशिया के साथ समन्वय बनाए हुए है और 'प्रतिरोध की धुरी' को जीवित रखने के लिए संघर्ष जारी रखना चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिकी टिप्पणीकार इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प का प्रशासन, जो अब तक का सबसे इज़राइल-समर्थक माना जाता था, निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरानी मुल्लाओं और हिज़्बुल्लाह से बातचीत को प्राथमिकता दे रहा है। यह मतभेद इस क्षेत्र की रणनीतिक दिशा को लेकर एक गहरी दरार की ओर इशारा करता है।

ईरान के भीतर, पेज़ेश्कियान ने राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए आर्थिक दबाव कम करने, उत्पादन और उद्योग को समर्थन देने, पड़ोसी देशों से संबंध मजबूत करने और सशस्त्र बलों की पूरी पीठ थपथपाने की बात की। उन्होंने मीडिया प्रबंधकों से कहा कि देश अपने सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और सफलता के लिए सभी संस्थानों का समन्वय, सामाजिक पूंजी की मजबूती और द्विध्रुवीकरण से बचना अनिवार्य है। यह संदेश ऐसे वक्त में आया जब विदेशी फारसी-भाषा मीडिया और विपक्षी धड़े ईरानी नेतृत्व में 'दरार' और 'आंतरिक संघर्ष' की झूठी तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहे थे। सरकारी मीडिया ने स्पष्ट किया कि यह उत्साह दरअसल दुश्मन की नाकामी को दर्शाता है, क्योंकि ईरानी समाज बुनियादी सिद्धांतों पर एकजुट है।

दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के सवालों से जुड़ा है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे कच्चे तेल की कीमतों और चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन इज़राइल की सैन्य प्राथमिकता और ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क की सक्रियता किसी भी कूटनीतिक प्रगति को पटरी से उतार सकती है। फिलहाल, तेहरान ने आंतरिक मोर्चे पर अनुशासन कायम करते हुए बातचीत का दरवाजा खुला रखा है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता के कार्यालय से ही आएगा—यह एक ऐसी वास्तविकता है जिसे वाशिंगटन, यरुशलम और नई दिल्ली सभी को अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

61%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa iraniana e affiniStampa arabo levante-Maghreb
Stampa iraniana e affini/ regime
pragmatismovittimismo

राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने वार्ता को दृढ़ता से मंजूरी दे दी है, और युद्ध और शांति के सभी रणनीतिक निर्णय केवल सर्वोच्च नेता के हाथों में हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और शत्रु मीडिया द्वारा आंतरिक कलह की छवि गढ़ने के प्रयासों के प्रति आगाह किया।

Stampa arabo levante-Maghreb
distaccoscetticismo

ईरानी राष्ट्रपति ने यह कहकर आंतरिक बहस को विराम दिया कि युद्ध और वार्ता के निर्णय विशेष रूप से सर्वोच्च नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकार में हैं। उन्होंने सभी गुटों से संस्थागत निर्णयों का पालन करने का आग्रह किया, जबकि अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर घरेलू असंतोष की खबरें थीं।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: उम्रदराज़ आबादी के स्वास्थ्य पर योग की पकड़·ताजा इजरायली हमलों से दक्षिण लेबनान में पांच की मौत, युद्धविराम पर संकट·अमेरिकी दूत विटकॉफ स्विट्जरलैंड में, ईरान से परमाणु समझौते की वार्ता की तैयारी·लेबनान में संघर्षविराम के बाद यूएस-ईरान परमाणु समझौते की दिशा में नया मोड़·ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराया, कुन्हा के दो गोल और विनीसियस का जलवा·पिता की दूरी, मन की स्वीकृति और सीखते रहने की चुपचाप उम्मीद·विश्व कप: हैती पर 3-0 से जीत के बाद भी रफिन्हा की चोट ने ब्राजील को चिंता में डाला·नेमार की वापसी: स्कॉटलैंड के खिलाफ उतरेंगे मैदान में, ब्राज़ील को मिलेगा बल·अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: उम्रदराज़ आबादी के स्वास्थ्य पर योग की पकड़·ताजा इजरायली हमलों से दक्षिण लेबनान में पांच की मौत, युद्धविराम पर संकट·अमेरिकी दूत विटकॉफ स्विट्जरलैंड में, ईरान से परमाणु समझौते की वार्ता की तैयारी·लेबनान में संघर्षविराम के बाद यूएस-ईरान परमाणु समझौते की दिशा में नया मोड़·ब्राजील ने हैती को 3-0 से हराया, कुन्हा के दो गोल और विनीसियस का जलवा·पिता की दूरी, मन की स्वीकृति और सीखते रहने की चुपचाप उम्मीद·विश्व कप: हैती पर 3-0 से जीत के बाद भी रफिन्हा की चोट ने ब्राजील को चिंता में डाला·नेमार की वापसी: स्कॉटलैंड के खिलाफ उतरेंगे मैदान में, ब्राज़ील को मिलेगा बल·
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रविवार, 14 जून 2026

ईरान में युद्ध और शांति का फैसला अब सर्वोच्च नेता के हाथ: राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का स्पष्ट संदेश

अमेरिका-इज़राइल के साथ तनाव के बीच, ईरानी राष्ट्रपति ने आंतरिक बहस को विराम देते हुए कहा कि सभी रणनीतिक निर्णय सर्वोच्च नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद लेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने रविवार को एक विस्तृत मीडिया बैठक में देश की सबसे बड़ी आंतरिक बहस पर विराम लगा दिया: युद्ध और शांति का अंतिम निर्णय किसके हाथ में है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 'युद्ध और बातचीत का फैसला सर्वोच्च नेता और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पास है, और सभी को इसका पालन करना होगा।' यह बयान ऐसे समय आया जब ईरान के भीतर कुछ गुट अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर नाराजगी जता रहे थे और सरकारी टेलीविजन दिवंगत सर्वोच्च नेता के उन बयानों को बार-बार प्रसारित कर रहा था जिनमें बातचीत का विरोध था। पेज़ेश्कियान ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मीडिया हमेशा सर्वोच्च नेता के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करता, और खुलासा किया कि उन्होंने स्वयं पूर्व नेता से 'न युद्ध, न शांति' की थकाऊ स्थिति से बाहर निकलने की अनुमति ली थी। राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

तेहरान के इस रुख को यरुशलम और वाशिंगटन से भिन्न नजरिये से देखा जा रहा है। इज़राइली विश्लेषक मानते हैं कि अकेला सैन्य बल ईरान और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को परास्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन ईरानी शासन सीरिया खोने के बाद भी हिज़्बुल्लाह, यमन के हूती और इराकी शिया मिलिशिया के साथ समन्वय बनाए हुए है और 'प्रतिरोध की धुरी' को जीवित रखने के लिए संघर्ष जारी रखना चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिकी टिप्पणीकार इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प का प्रशासन, जो अब तक का सबसे इज़राइल-समर्थक माना जाता था, निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरानी मुल्लाओं और हिज़्बुल्लाह से बातचीत को प्राथमिकता दे रहा है। यह मतभेद इस क्षेत्र की रणनीतिक दिशा को लेकर एक गहरी दरार की ओर इशारा करता है।

ईरान के भीतर, पेज़ेश्कियान ने राष्ट्रीय एकता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए आर्थिक दबाव कम करने, उत्पादन और उद्योग को समर्थन देने, पड़ोसी देशों से संबंध मजबूत करने और सशस्त्र बलों की पूरी पीठ थपथपाने की बात की। उन्होंने मीडिया प्रबंधकों से कहा कि देश अपने सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और सफलता के लिए सभी संस्थानों का समन्वय, सामाजिक पूंजी की मजबूती और द्विध्रुवीकरण से बचना अनिवार्य है। यह संदेश ऐसे वक्त में आया जब विदेशी फारसी-भाषा मीडिया और विपक्षी धड़े ईरानी नेतृत्व में 'दरार' और 'आंतरिक संघर्ष' की झूठी तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रहे थे। सरकारी मीडिया ने स्पष्ट किया कि यह उत्साह दरअसल दुश्मन की नाकामी को दर्शाता है, क्योंकि ईरानी समाज बुनियादी सिद्धांतों पर एकजुट है।

दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के सवालों से जुड़ा है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे कच्चे तेल की कीमतों और चाबहार बंदरगाह जैसी रणनीतिक परियोजनाओं पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन इज़राइल की सैन्य प्राथमिकता और ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क की सक्रियता किसी भी कूटनीतिक प्रगति को पटरी से उतार सकती है। फिलहाल, तेहरान ने आंतरिक मोर्चे पर अनुशासन कायम करते हुए बातचीत का दरवाजा खुला रखा है, लेकिन अंतिम निर्णय सर्वोच्च नेता के कार्यालय से ही आएगा—यह एक ऐसी वास्तविकता है जिसे वाशिंगटन, यरुशलम और नई दिल्ली सभी को अपनी रणनीति में शामिल करना होगा।

स्रोतों में मतभेद

अर्थव्यवस्था और बाजार · 3 स्रोत · 2 भाषाएँ

61%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक43%
न्यूनत्र43%
निंदक14%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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Stampa iraniana e affini/ regime
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राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने वार्ता को दृढ़ता से मंजूरी दे दी है, और युद्ध और शांति के सभी रणनीतिक निर्णय केवल सर्वोच्च नेता के हाथों में हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और शत्रु मीडिया द्वारा आंतरिक कलह की छवि गढ़ने के प्रयासों के प्रति आगाह किया।

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ईरानी राष्ट्रपति ने यह कहकर आंतरिक बहस को विराम दिया कि युद्ध और वार्ता के निर्णय विशेष रूप से सर्वोच्च नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अधिकार में हैं। उन्होंने सभी गुटों से संस्थागत निर्णयों का पालन करने का आग्रह किया, जबकि अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर घरेलू असंतोष की खबरें थीं।

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