
नेतन्याहू का दावा: लेबनान के ईसाई गांवों ने इज़राइल में विलय की मांग की, स्थानीय अधिकारियों ने किया खंडन
इज़राइली प्रधानमंत्री के बयान के बाद लेबनानी मेयर और 15 गांवों ने संयुक्त बयान में इसे पूरी तरह निराधार बताया, जबकि दक्षिणी लेबनान में सैन्य उपस्थिति और अमेरिकी दबाव जारी है।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को फॉक्स न्यूज़ के कार्यक्रम 'द संडे ब्रीफिंग' में दावा किया कि दक्षिणी लेबनान के कुछ ईसाई गांवों ने हिज़्बुल्लाह से सुरक्षा के लिए इज़राइल में विलय का अनुरोध किया है। नेतन्याहू ने किसी गांव का नाम नहीं लिया और न ही इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ प्रस्तुत किया। यह बयान ऐसे समय आया है जब इज़राइली सेना दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती इलाकों में मौजूद है और अमेरिका की मध्यस्थता वाला युद्धविराम समझौता पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
लेबनानी पक्ष ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, ईसाई बहुल गांव रमीश के मेयर हन्ना अल-अमील ने कहा कि यह बात 'पूरी तरह निराधार' है और ऐसा विचार करना भी 'बिल्कुल असंभव' है। उन्होंने बताया कि 15 ईसाई बहुल कस्बों ने दो दिन पहले एक संयुक्त बयान जारी कर इन आरोपों का खंडन किया था। उस बयान में गांवों ने अपनी ज़मीन पर बने रहने के संकल्प को दोहराते हुए 'राष्ट्रीय पहचान के प्रति निष्ठा' और 'लेबनानी ध्वज के प्रति लगाव' पर ज़ोर दिया। लेबनानी सरकार भी लगातार कह रही है कि केवल लेबनानी सेना को ही पूरे राष्ट्रीय क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करना चाहिए।
क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू का यह बयान बिना सबूत के एक राजनीतिक बयान है जो दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैन्य उपस्थिति को वैध ठहराने और लेबनान के भीतर सांप्रदायिक विभाजन को भुनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। लेबनानी कानून के तहत किसी भी नगर पालिका को संप्रभुता से जुड़ा कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है, और न ही अब तक किसी गांव की ओर से ऐसा कोई औपचारिक अनुरोध सामने आया है। इज़राइली सेना ने युद्ध के दौरान कई ईसाई बहुल गांवों को फोन करके 'अजनबियों' यानी हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को प्रवेश न देने की चेतावनी दी थी, लेकिन अधिकांश गांवों ने निकासी के आदेशों के बावजूद अपने घर, चर्च और खेत बचाने के लिए वहीं रहना चुना।
यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ईरान समझौते और लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद सार्वजनिक हुए हैं। ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा था कि नेतन्याहू 'जानते हैं कि बॉस कौन है'। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि 99 प्रतिशत समय वे दोनों सहमत रहते हैं, लेकिन कभी-कभी मतभेद होते हैं जिन्हें खुलकर सुलझा लिया जाता है। इज़राइली सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में तैनात सैनिकों का दौरा करते हुए कहा कि सेना 'लेबनानी क्षेत्र से खतरों को खत्म करने के लिए निर्णायक रूप से काम करती रहेगी'। नेतन्याहू के जल्द ही वाशिंगटन दौरे पर जाने की उम्मीद है, जहां इन मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Israeli Prime Minister Netanyahu claims that some Lebanese Christian villages have requested annexation to Israel, but local mayors categorically deny this. The story is framed as a false Israeli statement, baseless and strongly rejected by Lebanese authorities. The focus is on the local community's refusal.
Netanyahu states that Lebanese Christian villages have asked to be annexed to Israel for protection from Hezbollah. The news is reported without comment or verification, presenting the statement as matter-of-fact. Local denials are not included.
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