
पासपोर्ट नागरिकता प्रमाण नहीं, यात्रा दस्तावेज है: विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण और चुनावी सूची विवाद
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा के लिए है, जबकि विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान नागरिकता साबित करने की बाध्यता ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 15 जुलाई 2026 को दोहराया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी दस्तावेज नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों के विदेश प्रस्थान को विनियमित करने वाला यात्रा दस्तावेज है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया जब निर्वाचन आयोग कई राज्यों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कर रहा है, जिसके तहत बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों से करोड़ों नाम हटाए गए हैं। एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि देश की आठ प्रतिशत से भी कम आबादी के पास पासपोर्ट है और इसे स्थापित सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही जारी किया जाता है, लेकिन इसका वैधानिक उद्देश्य केवल विदेश यात्रा को सुगम बनाना है।
विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने इस व्याख्या पर आपत्ति जताई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता प्रमाण नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज यह सिद्ध करेगा, और आरोप लगाया कि इससे मतदान अधिकार छीने जा सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने इसके जवाब में 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट नागिकता का संपूर्ण प्रमाण नहीं है। साथ ही, पासपोर्ट अधिनियम की उस धारा की ओर इशारा किया गया जो ‘सार्वजनिक हित में’ गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देती है। इस बीच, स्क्रॉल.इन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जन्म या वंश के आधार पर नागरिकता रखने वाले अधिकांश लोगों के पास कोई एकल, निर्णायक नागरिकता दस्तावेज मौजूद नहीं है—न आधार, न मतदाता पहचान पत्र, न राशन कार्ड।
एसआईआर प्रक्रिया ने इस कानूनी रिक्तता को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। निर्वाचन आयोग ने प्रारंभिक गणना के लिए आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को मान्य दस्तावेजों की सूची से बाहर रखा तथा नागरिकों पर अपनी नागरिकता सिद्ध करने का भार डाला। बिहार में यह प्रक्रिया मात्र एक माह में पूरी करने की समय-सीमा ने प्रवासी श्रमिकों और दस्तावेज विहीन लोगों के लिए संकट उत्पन्न किया। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में बताया कि भारत में लगभग दो करोड़ अवैध बांग्लादेशी प्रवासी रह रहे हैं, जो जनगणना या मतदाता सूची में किसी न किसी रूप में दर्ज हो सकते हैं, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
वैश्विक स्तर पर यात्रा दस्तावेजों और नागरिकता के बीच संबंध भिन्न-भिन्न हैं। अमेरिकी वीज़ा वेवर कार्यक्रम के तहत 43 देशों के नागरिक बिना वीज़ा अमेरिका की यात्रा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें ईएसटीए अनुमोदन लेना होता है। थाईलैंड ने भारतीय पर्यटकों के लिए वीज़ा-मुक्त प्रवेश बरकरार रखा है, हालांकि ठहरने की अवधि 60 से घटाकर 30 दिन कर दी गई। स्पेन के आव्रजन अधिकारियों ने इक्वाडोर, कोलंबिया और वेनेजुएला के नागरिकों के लिए पासपोर्ट की वैधता संबंधी सख्त नियम लागू किए हैं। हेनले पासपोर्ट सूचकांक में भारत 80वें स्थान पर खिसक गया है, जो 56 गंतव्यों तक वीज़ा-मुक्त या वीज़ा-ऑन-अराइवल पहुंच प्रदान करता है। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि यात्रा दस्तावेज और नागरिकता की परिभाषा हर देश की अपनी कानूनी व्यवस्था पर निर्भर करती है। भारत में फिलहाल एसआईआर का दूसरा और तीसरा चरण जारी है, और आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सिलसिला राजनीतिक टकराव को और गहरा सकता है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
The Indian opposition denounces the government's move as an attack on citizenship and voting rights.
The bloc builds its position by emphasizing the political implications and accusing the government of manipulating legal definitions for electoral purposes.
The bloc omits the fact that less than 8% of Indians hold a passport, which downplays the document's importance as proof of citizenship.
The Indian government and neutral media present the clarification as a normal bureaucratic procedure, without political implications.
The bloc depoliticizes the issue by focusing on technical and legal aspects, ignoring the electoral context.
The bloc omits the opposition's accusations and the debate on electoral rolls, presenting the statement as isolated.
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