
ट्रंप ने ईरान समझौता कांग्रेस को भेजने का वादा किया, सांसद अब भी अंधेरे में
जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि वह अंतरिम समझौते को मंजूरी के लिए भेजेंगे, लेकिन रिपब्लिकन सांसदों सहित कई लोगों को इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि वह ईरान के साथ हुए अंतरिम समझौते को कांग्रेस के समक्ष समीक्षा और मतदान के लिए भेजेंगे। यह कदम उन्होंने लगभग एक अनिच्छुक स्वीकृति के रूप में उठाया, यह स्वीकार करते हुए कि शुरू में उन्होंने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं था। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे यह विचार पसंद आया, कृपया इसे कांग्रेस को भेजें।" यह समझौता, जिसे रविवार को औपचारिक रूप दिया गया, अप्रैल में घोषित नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त करता है, जो फरवरी से प्रभावी रूप से अवरुद्ध था। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि समझौता स्पष्ट रूप से कहता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा, और उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान में परमाणु धूल वाले एक स्थल को नष्ट कर दिया था।
हालांकि, कांग्रेस के सदस्य, विशेषकर ट्रंप के अपने रिपब्लिकन सहयोगी, इस समझौते के विवरण से काफी हद तक अनभिज्ञ हैं। सीनेट बहुमत नेता जॉन थून, जो शीर्ष-स्तरीय खुफिया जानकारी प्राप्त करने वाले 'गैंग ऑफ एट' के सदस्य हैं, ने स्वीकार किया कि इस मामले पर बारीकी से नजर रखने वाले लोग भी इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते। सीनेटर जॉन कैनेडी और बिल कैसिडी जैसे प्रभावशाली रिपब्लिकनों ने स्पष्ट किया कि यदि अंतिम समझौता एक संधि का रूप लेता है, तो उसे सीनेट की मंजूरी की आवश्यकता होगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को मीडिया के माध्यम से समझौते की रूपरेखा प्रस्तुत करने का प्रयास किया, लेकिन सांसदों को सीधे जानकारी देने की मांग बनी हुई है। यह स्थिति प्रशासन और विधायिका के बीच एक संभावित टकराव का संकेत देती है, क्योंकि कई सांसद चाहते हैं कि कोई भी अंतिम सौदा उनके वोट के बिना लागू न हो।
मध्य पूर्व और वैश्विक परिप्रेक्ष्य से देखें तो यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक नाजुक लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। ट्रंप ने कतर की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि दोहा ने 'साहसपूर्ण' भूमिका निभाई। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है, को 60 दिनों की बातचीत अवधि के दौरान और उसके बाद भी शुल्क-मुक्त खोलने का वादा किया गया है। ट्रंप ने ओबामा प्रशासन के जेसीपीओए की आलोचना करते हुए दावा किया कि केवल एक मजबूत अमेरिकी राष्ट्रपति ही भविष्य में इस मार्ग को खुला रख सकता है। ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है, लेकिन ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने परमाणु हथियार की कोशिश की तो 'उस पर नरक टूट पड़ेगा'। यह समझौता 14 बिंदुओं पर आधारित है और शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, होर्मुज जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से राहत लेकर आ सकता है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। हालांकि, समझौते की अनिश्चितता और कांग्रेस की अनदेखी से उत्पन्न राजनीतिक जोखिम वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 60 दिनों की बातचीत की अवधि में संवेदनशील मुद्दों—यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में ढील और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं—पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा। ट्रंप ने भले ही अगले चरण को 'आसान' बताया हो, लेकिन कांग्रेस की भूमिका और क्षेत्रीय शक्तियों के परस्पर विरोधी हित इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं। फिलहाल, दुनिया की निगाहें शुक्रवार के हस्ताक्षर और उसके बाद सामने आने वाले समझौते के पूर्ण पाठ पर टिकी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रिपब्लिकन सीनेटर ईरान समझौते का पाठ मांग रहे हैं लेकिन इसके विवरण से अनभिज्ञ हैं। ट्रंप इसे कांग्रेस के वोट के लिए प्रस्तुत करने को सहमत हैं, जबकि समझौते की वास्तविक सीमा को लेकर गहरा संदेह बना हुआ है।
ट्रंप समझौते को कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत करने और इसकी शर्तों का खुलासा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि उपराष्ट्रपति वेंस आश्वासन देते हैं कि ईरान के पास परमाणु क्षमता नहीं होगी। इस समझौते को तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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