
पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान से समझौता ज्ञापन पर कायम रहने की अपील की, ट्रंप ने बताया ‘खत्म’
इस्लामाबाद ने मध्यस्थता वाले 14-सूत्रीय अंतरिम समझौते को बचाने का आग्रह किया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे समाप्त घोषित कर दिया और संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल तनाव कम करने के उपायों की बात कही।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में अमेरिका और ईरान से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के तहत अपनी-अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह किया। मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता ज्ञापन ‘क्षेत्र और उससे परे आपसी समझ, सम्मान और साझा समृद्धि के लिए एक स्थायी आधार’ बना हुआ है। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के कुछ घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा कि पिछले महीने हुआ यह अंतरिम समझौता ‘खत्म’ हो चुका है। पाकिस्तान ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने को भी कहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अंकारा में पत्रकारों से बातचीत में ईरान को क्षेत्रीय समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ने तेहरान से निपटने में ‘बहुत समय बर्बाद’ किया। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, ट्रंप ने नए सैन्य टकराव की संभावना से इनकार किया और वर्तमान ईरानी नेतृत्व को ‘अधिक तर्कसंगत’ बताया। यह बयान ऐसे समय आया जब दोनों पक्षों के बीच ताजा सैन्य कार्रवाइयों की खबरें आई थीं।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने पिछले वर्ष 9 मार्च को ईरान के खिलाफ आक्रमण शुरू किया, जिसके जवाब में ईरान ने ‘ऑपरेशन वादा सादिक 4’ के तहत क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और निर्दिष्ट लक्ष्यों पर हमले किए। ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया, विशेषकर लेबनान से जुड़ी शर्तों और दक्षिणी ईरानी शहरों पर हमलों के मामले में। इन रिपोर्टों में कहा गया कि युद्धविराम की गंभीरता से पालन न होने के कारण समझौते का भविष्य अनिश्चित है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि महासचिव सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, किसी भी अतिरिक्त तनावपूर्ण कदम से बचने और तनाव कम करने के लिए तत्काल उपाय करने का आह्वान करते हैं। यह बयान क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बहुपक्षीय राजनयिक दबाव को दर्शाता है।
इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन, जो पिछले महीने 100 दिनों के अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद संपन्न हुआ था, का उद्देश्य युद्ध को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना था। पाकिस्तान ने इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। वर्तमान में, आपसी आरोपों और युद्धविराम उल्लंघनों के कारण यह ढांचा कमजोर पड़ गया है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता जारी रखने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन अभी तक किसी ठोस अगले कदम की घोषणा नहीं हुई है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.30 | critical |
We report the facts: Pakistan urged compliance, Trump said the deal is over. No judgment is offered.
We use balanced attribution and direct quotes to create an appearance of objectivity, letting the reader decide.
We omit any context of US violations or Iran's grievances, focusing only on the immediate statements.
Pakistan's mediation is vital; we urge all parties to respect the MoU and exercise restraint. The UN also calls for immediate measures.
We highlight Pakistan's role and quote the UN Secretary-General to lend authority to the call for calm, framing the situation as requiring multilateral action.
We omit Trump's statement that the deal is 'over' and any criticism of US actions, focusing solely on de-escalation.
Pakistan calls on both sides to adhere to the MoU. Trump says the deal is over and blames Iran. We report both positions without taking sides.
We include Trump's accusation alongside Pakistan's call, presenting a balanced but slightly more detailed account that implies the US position is part of the story.
We omit any mention of US violations of the MoU, focusing on the current standoff and Trump's remarks.
Pakistan urges adherence to the MoU, but the US has repeatedly violated it. The deal is not over; the US is the aggressor. We stand with Iran.
We cite past US violations and frame the current situation as a continuation of US aggression, creating a narrative of victimhood and justifying Iran's position.
We omit any mention of Iran's potential role in the escalation or Trump's specific accusations, focusing solely on US violations.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
राजकोषीय अनुशासन और डेटा-आधारित नीतियों से उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिल रहा सहारा
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Technology सेसरकारी जांच के बाद ओपनएआई का GPT-5.6 लॉन्च, वर्क एजेंट से ऑफिस पर फोकस
7 भाषाएँ · 12 स्रोत
Science & Health सेसऊदी अरब की इज़राइल को दरकिनार करने की योजना, कनाडा का व्यापारिक रुख और खाड़ी में स्वास्थ्य-तकनीकी विस्तार
2 भाषाएँ · 5 स्रोत