
तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी मुद्रास्फीति के बीच वैश्विक बाजारों की कसौटी
ईरान-अमेरिका तनाव से जुड़ी होरमुज की बाधाओं ने कच्चे तेल को ऊपर धकेला है, जबकि निवेशक अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और फेड अध्यक्ष की गवाही पर टिके हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को एक साथ कई मोर्चों पर चुनौती दे दी है। ईरान द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड 5% उछलकर 76 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई 71 डॉलर के आसपास पहुंच गया। इस भू-राजनीतिक झटके ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम पैदा कर दिया है और साथ ही केंद्रीय बैंकों के सामने मुद्रास्फीति का पुराना दबाव फिर से खड़ा कर दिया है।
ऊर्जा कीमतों का यह दबाव विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में अलग-अलग रंग दिखा रहा है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई आर्थिक आयोग (सेपाल) के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 67% तक की वृद्धि होती है तो अकेले अर्जेंटीना की वार्षिक मुद्रास्फीति में 2.5 प्रतिशत अंक तक का इजाफा हो सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने नाइजीरिया के लिए आगाह किया है कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत गरीबी और खाद्य असुरक्षा को और गहरा कर सकती है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े इस सप्ताह आने वाले हैं, जो दिखाएंगे कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों का दबाव घरेलू स्तर पर कितना पहुंचा है।
केंद्रीय बैंकों का रुख इस सप्ताह की धुरी बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श मंगलवार और बुधवार को कांग्रेस के समक्ष अपनी पहली मौद्रिक नीति गवाही देंगे। निवेशक उनके संकेतों पर टकटकी लगाए हुए हैं कि क्या ब्याज दरों में और वृद्धि होगी या नरमी का दौर आएगा। सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक अभी सितंबर में दर वृद्धि की 69% संभावना जताई जा रही है। इस अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों में पिछले सप्ताह 1.7% की गिरावट आई, क्योंकि भू-राजनीतिक जोखिम के बावजूद ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने सुरक्षित निवेश की चमक को फीका कर दिया।
कॉर्पोरेट जगत से भी इस हफ्ते अहम संकेत मिलेंगे। वॉल स्ट्रीट पर जेपी मॉर्गन, गोल्डमैन सैश और सिटीग्रुप जैसे बड़े बैंकों के साथ-साथ टीएसएमसी और एएसएमएल जैसी चिप निर्माता कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी। भारत में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और यूनियन बैंक के नतीजे आने वाले हैं। इसके अलावा मंगलवार को चीन की जीडीपी और व्यापार आंकड़े भी वैश्विक मांग की सेहत का पता देंगे। ये सभी घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे, लेकिन सबसे अहम रहेगा मंगलवार का अमेरिकी सीपीआई डेटा जो तय करेगा कि फेड पर दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ता है या नहीं।
| इज़राइली प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
The Israeli market enters the week under the shadow of Hormuz, but expectations on domestic data keep a margin of maneuver open.
It ties geopolitical risk to local fundamentals, dampening panic with expected data that could offset the external shock.
The strong US earnings season, seen elsewhere as a positive factor countering tensions, is omitted.
Wall Street cashes in on earnings season and listens to Warsh, leaving Hormuz in the background.
Positive data (earnings) are emphasized and geopolitical risks are minimized, framed as a variable to monitor but not dominant.
The immediate impact of the Hormuz closure on oil prices and inflation, central in other coverages, is omitted.
Gold yields under the weight of oil and inflation, awaiting Fed signals.
A linear causal relationship between energy and precious metals is established, excluding other variables such as safe-haven demand or central bank policies.
The possibility that gold may act as a safe haven in case of escalation is omitted, as is the earnings season dominating other coverages.
US inflation and Warsh's words hold emerging markets in check.
The warning from a single investment bank is generalized to the entire market, amplifying the threat of an inflationary data point and overshadowing other positive factors.
The positive momentum of US corporate earnings, seen elsewhere as a counterweight to inflation risk, is omitted.
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