
तेल की उम्मीदों पर पानी: ब्रेंट 100 डॉलर पार कर फिर लुढ़का, मध्य पूर्व तनाव से आपूर्ति का जोखिम बरकरार
शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.7% टूटकर 97 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि एक दिन पहले 6% से अधिक उछलकर 100 डॉलर पार कर गया था; अमेरिकी हमलों, हूती हमलों और आपूर्ति बाधाओं से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है।
वैश्विक तेल बाजार में शुक्रवार को जोरदार बिकवाली देखी गई, जिससे ब्रेंट क्रूड का सितंबर वायदा 3.7% गिरकर 96.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एक दिन पहले ही यह 6.3% उछलकर 100.69 डॉलर पर बंद हुआ था – मई अंत के बाद पहली बार 100 डॉलर पार। अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई भी 2.5% टूटकर 90 डॉलर के करीब आ गया। यह गिरावट गुरुवार की तेजी के बाद स्वाभाविक मुनाफावसूली बताई जा रही है, लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य टकराव और आपूर्ति मार्गों पर मंडराता खतरा कीमतों को सहारा दे रहा है।
तेजी का केंद्र अमेरिकी-ईरान तनाव रहा। अमेरिकी सेना ने लगातार 13वीं रात ईरान पर हमले किए, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि वे बड़े पैमाने पर हमले के करीब हैं। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप को अब शांति वार्ता की सफलता पर संदेह है और उनके सलाहकारों को डर है कि यह युद्ध चुनावों में रिपब्लिकन की स्थिति कमजोर कर सकता है। इस बीच, रूस के विश्लेषकों ने इसे ‘सुधार’ करार दिया, जबकि खाड़ी क्षेत्र की नजरों ने हूती विद्रोहियों की लाल सागर में सक्रियता को रेखांकित किया।
आपूर्ति संकट के और आयाम खुले। ईरान समर्थित यमनी हूतियों ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया, जिससे बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों का जोखिम बढ़ा। ओरमुज जलडमरूमध्य से गुरुवार को महज एक टैंकर गुजरा – यह सामान्य यातायात का एक अंश है। साथ ही कजाखस्तान के कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम (सीपीसी) टर्मिनल पर ड्रोन हमलों के कारण लदान रोक दिया गया, जिससे कजाख तेल निर्यात प्रभावित हुआ। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का अनुमान है कि हर अतिरिक्त महीने की आपूर्ति बाधा ब्रेंट में 7-8 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर सकती है।
भारत जैसे प्रमुख आयातकों के लिए यह अस्थिरता दोहरी मार है। आयात बिल बढ़ने के साथ मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है और राजकोषीय घाटा गहराता है। हालांकि शुक्रवार की गिरावट से थोड़ी राहत मिली, लेकिन ओरमुज और लाल सागर मार्गों पर लगातार खतरा बना हुआ है। अगला पड़ाव अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप का फैसला और ओरमुज में जहाजों की आवाजाही के आंकड़े होंगे, जो यह तय करेंगे कि 100 डॉलर का स्तर जल्द फिर टूटता है या नहीं।
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