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भू-राजनीति और राजनीतिबुधवार, 24 जून 2026

रूते के बयान से इटली में सियासी आंधी: ईरान युद्ध में 500 अमेरिकी उड़ानों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

नाटो प्रमुख के दावे कि ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान के लिए इटली से 500 अमेरिकी विमान उड़े, ने रोम को केवल तकनीकी-साजो-सामान संबंधी अनुमति देने की सफाई देने पर मजबूर कर दिया, जबकि विपक्ष ने संसद में स्पष्टीकरण की मांग तेज कर दी।

नाटो महासचिव मार्क रूते ने फॉक्स न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान के विरुद्ध अमेरिकी-इज़राइली सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान इटली स्थित अमेरिकी ठिकानों से लगभग 500 सैन्य विमानों ने उड़ान भरी। रूते के अनुसार, पूरे यूरोप से 4,000 से 5,000 उड़ानें हुईं, और इटली का योगदान ‘बहुत बड़ा’ था। इस बयान ने इटली में तत्काल राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया, क्योंकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार बार-बार कह चुकी थी कि उसने ईरान के विरुद्ध किसी भी सीधी सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी ज़मीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी।

इतालवी रक्षा मंत्रालय ने रूते के बयान को ‘पूरी तरह भ्रामक’ बताते हुए स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल तकनीकी और साजो-सामान संबंधी (गैर-गतिज) गतिविधियों को मंज़ूरी दी थी, जो द्विपक्षीय संधियों के दायरे में आती हैं। मंत्रालय के अनुसार, जब भी अमेरिका ने युद्धक कार्रवाई से जुड़ी कोई मांग रखी, इटली ने उसे ठुकरा दिया। बाद में नाटो प्रवक्ता ने भी कहा कि रूते का इशारा ‘साजो-सामान या तकनीकी सहायता’ की ओर था। अमेरिकी राजदूत टिलमन फर्टिटा ने मेलोनी के काम को ‘उत्कृष्ट’ बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना द्विपक्षीय समझौता कायम है, जिसके तहत एक-दूसरे को सहयोग दिया जाता है।

विपक्षी दलों ने रूते के बयान को सरकार की विश्वसनीयता पर सीधी चोट बताया। फाइव स्टार मूवमेंट के नेता जूसेप्पे कोंते ने कहा कि ‘सरकार की झूठी कहानियाँ ढह गईं’ और मेलोनी को संसद में स्पष्टीकरण देना चाहिए। वाम-हरित गठबंधन के निकोला फ्रातोयानी ने टिप्पणी की कि या तो सरकार ने सांसदों को गुमराह किया या रूते को ‘लू लग गई’। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी तत्काल सफाई की मांग की। यह विवाद ऐसे समय उभरा जब डोनाल्ड ट्रंप और मेलोनी के बीच सिगोनेला हवाई अड्डे के इस्तेमाल से इनकार को लेकर सार्वजनिक तनाव चल रहा था—ट्रंप ने आरोप लगाया था कि इटली ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया।

इसी दिन बर्लिन में जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, पोलैंड और इटली के नेताओं की ई5 बैठक हुई, जिसमें आगामी अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय रक्षा स्तंभ को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। मेलोनी ने कहा कि ‘ट्रान्साटलांटिक संबंध पश्चिमी एकता का स्तंभ है’ और यूरोप को अपनी रक्षा की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। नेताओं ने यूक्रेन को निरंतर समर्थन और रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ट्स ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अकेले कदम उठाना ‘गलती’ होगी और साझा औद्योगिक सहयोग को गति देनी होगी।

ईरानी मीडिया ने इस प्रकरण को ‘इटली का अमेरिका के साथ गुप्त सहयोग’ करार दिया, जबकि पश्चिमी विश्लेषक इसे नाटो की आंतरिक दरार और ट्रंप प्रशासन के दबाव का लक्षण मान रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि यह दर्शाता है कि किस तरह गठबंधन की राजनीति में सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल घरेलू राजनीति और कूटनीतिक संकट पैदा कर सकता है। इटली के रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने संसद में विमान-दर-विमान जानकारी देने की पेशकश की है, जबकि विपक्ष ने औपचारिक प्रश्न लगाने की तैयारी कर ली है। अगला ठोस कदम 7-8 जुलाई को अंकारा में होने वाला नाटो शिखर सम्मेलन है, जहाँ ट्रंप और एर्दोआन के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी संभावित है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

34%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
व्यावहारिकताअत्यावश्यकतासंदेह

अंकारा शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय सहयोगी एकजुट मोर्चा पेश करने की कोशिश में जुटे हैं। रूटे ट्रंप को शांत करने के लिए इतालवी ठिकानों से भारी सैन्य सहायता—ईरान अभियान के लिए 500 अमेरिकी उड़ानें—का हवाला दे रहे हैं, वहीं बर्लिन में E5 बैठक एक साझा रक्षा रुख तैयार कर रही है। माहौल चिंताजनक व्यावहारिकता का है, बोझ-साझाकरण और ईरान युद्ध पर ट्रान्साटलांटिक दरार की आशंका है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
चेतावनीसंदेह

नाटो पर बढ़ता दबाव है क्योंकि ट्रंप गठबंधन को 'कागज़ी बाघ' करार दे रहे हैं और पेंटागन यूरोप में सैन्य स्तरों की समीक्षा कर रहा है। रूटे की व्हाइट हाउस यात्रा को क्षति-नियंत्रण मिशन के रूप में देखा जा रहा है, ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी अभियानों के लिए सहयोगियों के सीमित समर्थन पर हताशा के बीच। कथा गठबंधन के भीतर बढ़ती विश्वसनीयता की खाई को रेखांकित करती है।

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कांगो में इबोला प्रकोप: अगले सप्ताह दो उपचारों का परीक्षण शुरू, बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए पहला क्लिनिकल ट्रायल·नेतन्याहू ने 98 सुनवाई के बाद भ्रष्टाचार मुकदमे में अपनी गवाही पूरी की·पिता बनने के बाद डोकू की वापसी: बेल्जियम के सामने न्यूज़ीलैंड की चुनौती·साओ पाउलो हवाई अड्डे पर स्पेनिश महिला कर्मचारियों पर नस्लीय टिप्पणी के आरोप में गिरफ़्तार·डिज़नीलैंड में किशोर 50 फुट ऊंची जल सवारी से गिरा, अस्पताल से मिली छुट्टी; सिक्स फ्लैग्स में भी तकनीकी अड़चन·ओलंपिक आंदोलन में ऐतिहासिक मोड़: हर खिलाड़ी को मिलेगा 10,000 डॉलर का अनुदान·वसा की गुणवत्ता, प्याज और पादप आहार: मधुमेह से बचाव के नए संकेत·होंडियस जहाज पर हंतावायरस का प्रकोप 2 जुलाई को समाप्त घोषित होने की संभावना·कांगो में इबोला प्रकोप: अगले सप्ताह दो उपचारों का परीक्षण शुरू, बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए पहला क्लिनिकल ट्रायल·नेतन्याहू ने 98 सुनवाई के बाद भ्रष्टाचार मुकदमे में अपनी गवाही पूरी की·पिता बनने के बाद डोकू की वापसी: बेल्जियम के सामने न्यूज़ीलैंड की चुनौती·साओ पाउलो हवाई अड्डे पर स्पेनिश महिला कर्मचारियों पर नस्लीय टिप्पणी के आरोप में गिरफ़्तार·डिज़नीलैंड में किशोर 50 फुट ऊंची जल सवारी से गिरा, अस्पताल से मिली छुट्टी; सिक्स फ्लैग्स में भी तकनीकी अड़चन·ओलंपिक आंदोलन में ऐतिहासिक मोड़: हर खिलाड़ी को मिलेगा 10,000 डॉलर का अनुदान·वसा की गुणवत्ता, प्याज और पादप आहार: मधुमेह से बचाव के नए संकेत·होंडियस जहाज पर हंतावायरस का प्रकोप 2 जुलाई को समाप्त घोषित होने की संभावना·
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रूते के बयान से इटली में सियासी आंधी: ईरान युद्ध में 500 अमेरिकी उड़ानों पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

नाटो प्रमुख के दावे कि ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान के लिए इटली से 500 अमेरिकी विमान उड़े, ने रोम को केवल तकनीकी-साजो-सामान संबंधी अनुमति देने की सफाई देने पर मजबूर कर दिया, जबकि विपक्ष ने संसद में स्पष्टीकरण की मांग तेज कर दी।

नाटो महासचिव मार्क रूते ने फॉक्स न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान के विरुद्ध अमेरिकी-इज़राइली सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ के दौरान इटली स्थित अमेरिकी ठिकानों से लगभग 500 सैन्य विमानों ने उड़ान भरी। रूते के अनुसार, पूरे यूरोप से 4,000 से 5,000 उड़ानें हुईं, और इटली का योगदान ‘बहुत बड़ा’ था। इस बयान ने इटली में तत्काल राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया, क्योंकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार बार-बार कह चुकी थी कि उसने ईरान के विरुद्ध किसी भी सीधी सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी ज़मीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी।

इतालवी रक्षा मंत्रालय ने रूते के बयान को ‘पूरी तरह भ्रामक’ बताते हुए स्पष्ट किया कि सरकार ने केवल तकनीकी और साजो-सामान संबंधी (गैर-गतिज) गतिविधियों को मंज़ूरी दी थी, जो द्विपक्षीय संधियों के दायरे में आती हैं। मंत्रालय के अनुसार, जब भी अमेरिका ने युद्धक कार्रवाई से जुड़ी कोई मांग रखी, इटली ने उसे ठुकरा दिया। बाद में नाटो प्रवक्ता ने भी कहा कि रूते का इशारा ‘साजो-सामान या तकनीकी सहायता’ की ओर था। अमेरिकी राजदूत टिलमन फर्टिटा ने मेलोनी के काम को ‘उत्कृष्ट’ बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना द्विपक्षीय समझौता कायम है, जिसके तहत एक-दूसरे को सहयोग दिया जाता है।

विपक्षी दलों ने रूते के बयान को सरकार की विश्वसनीयता पर सीधी चोट बताया। फाइव स्टार मूवमेंट के नेता जूसेप्पे कोंते ने कहा कि ‘सरकार की झूठी कहानियाँ ढह गईं’ और मेलोनी को संसद में स्पष्टीकरण देना चाहिए। वाम-हरित गठबंधन के निकोला फ्रातोयानी ने टिप्पणी की कि या तो सरकार ने सांसदों को गुमराह किया या रूते को ‘लू लग गई’। डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी तत्काल सफाई की मांग की। यह विवाद ऐसे समय उभरा जब डोनाल्ड ट्रंप और मेलोनी के बीच सिगोनेला हवाई अड्डे के इस्तेमाल से इनकार को लेकर सार्वजनिक तनाव चल रहा था—ट्रंप ने आरोप लगाया था कि इटली ने युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया।

इसी दिन बर्लिन में जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, पोलैंड और इटली के नेताओं की ई5 बैठक हुई, जिसमें आगामी अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय रक्षा स्तंभ को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। मेलोनी ने कहा कि ‘ट्रान्साटलांटिक संबंध पश्चिमी एकता का स्तंभ है’ और यूरोप को अपनी रक्षा की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। नेताओं ने यूक्रेन को निरंतर समर्थन और रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 3.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ट्स ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर अकेले कदम उठाना ‘गलती’ होगी और साझा औद्योगिक सहयोग को गति देनी होगी।

ईरानी मीडिया ने इस प्रकरण को ‘इटली का अमेरिका के साथ गुप्त सहयोग’ करार दिया, जबकि पश्चिमी विश्लेषक इसे नाटो की आंतरिक दरार और ट्रंप प्रशासन के दबाव का लक्षण मान रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि यह दर्शाता है कि किस तरह गठबंधन की राजनीति में सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल घरेलू राजनीति और कूटनीतिक संकट पैदा कर सकता है। इटली के रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने संसद में विमान-दर-विमान जानकारी देने की पेशकश की है, जबकि विपक्ष ने औपचारिक प्रश्न लगाने की तैयारी कर ली है। अगला ठोस कदम 7-8 जुलाई को अंकारा में होने वाला नाटो शिखर सम्मेलन है, जहाँ ट्रंप और एर्दोआन के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी संभावित है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 27 स्रोत · 5 भाषाएँ

34%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक10%
न्यूनत्र10%
निंदक80%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस/ भूमध्यसागरीय
व्यावहारिकताअत्यावश्यकतासंदेह

अंकारा शिखर सम्मेलन से पहले यूरोपीय सहयोगी एकजुट मोर्चा पेश करने की कोशिश में जुटे हैं। रूटे ट्रंप को शांत करने के लिए इतालवी ठिकानों से भारी सैन्य सहायता—ईरान अभियान के लिए 500 अमेरिकी उड़ानें—का हवाला दे रहे हैं, वहीं बर्लिन में E5 बैठक एक साझा रक्षा रुख तैयार कर रही है। माहौल चिंताजनक व्यावहारिकता का है, बोझ-साझाकरण और ईरान युद्ध पर ट्रान्साटलांटिक दरार की आशंका है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
चेतावनीसंदेह

नाटो पर बढ़ता दबाव है क्योंकि ट्रंप गठबंधन को 'कागज़ी बाघ' करार दे रहे हैं और पेंटागन यूरोप में सैन्य स्तरों की समीक्षा कर रहा है। रूटे की व्हाइट हाउस यात्रा को क्षति-नियंत्रण मिशन के रूप में देखा जा रहा है, ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी अभियानों के लिए सहयोगियों के सीमित समर्थन पर हताशा के बीच। कथा गठबंधन के भीतर बढ़ती विश्वसनीयता की खाई को रेखांकित करती है।

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