
यूनेस्को ने खतरे की सूची में डाले वेस्ट बैंक और लेबनान के स्थल, इज़राइल ने जताई आपत्ति
यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने आपात प्रक्रिया के तहत सेबेस्टिया और लेबनान के पाँच किलों को विश्व धरोहर सूची और संकटग्रस्त धरोहर सूची में शामिल किया, जिसका इज़राइल ने राजनीतिक फ़ैसला बताकर विरोध किया।
दक्षिण कोरिया के बुसान में शुक्रवार को यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में मध्य-पूर्व के कई स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जिनमें वेस्ट बैंक का पुरातात्विक स्थल सेबेस्टिया और दक्षिणी लेबनान के पाँच किले प्रमुख हैं। समिति ने इन दोनों को विश्व धरोहर सूची के साथ-साथ ‘संकटग्रस्त विश्व धरोहर’ सूची में भी रखने का निर्णय लिया। यह कार्रवाई इज़राइल के कड़े विरोध के बावजूद आपात प्रक्रिया के तहत हुई, जिसका आधार क्षेत्र में जारी सशस्त्र संघर्षों और सांस्कृतिक स्थलों के लिए उत्पन्न गंभीर ख़तरों को बताया गया। इसी बैठक में ट्यूनीशिया के पर्यटक गाँव सीदी बू सईद को भी विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, हालाँकि उसे ख़तरे वाली सूची में नहीं रखा गया।
फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि यह इज़राइल द्वारा सेबेस्टिया के आस-पास लगभग 1,800 डुनम भूमि अधिग्रहण और वहाँ राष्ट्रीय उद्यान बनाने की योजना को रोकने में सहायक होगा। फ़लस्तीनी विदेश एवं पर्यटन मंत्रालयों ने कहा कि यूनेस्को की मान्यता से इज़राइली कार्रवाइयों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी। वहीं इज़राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे ‘यहूदी संबंधों को मिटाने का फ़लस्तीनी प्रयास’ करार दिया और कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन का मतदान इतिहास नहीं बदल सकता। इज़राइली विदेश मंत्रालय ने पहले ही समिति से इन प्रस्तावों को ‘सांस्कृतिक विरासत का हथियारीकरण’ बताते हुए अस्वीकार करने का आग्रह किया था। लेबनानी प्रतिनिधि ने दावा किया कि 2000 में इज़राइली सेना की वापसी के बाद से इन किलों का केवल सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिए उपयोग किया गया है।
यूनेस्को के इस कदम के ठोस प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। संकटग्रस्त सूची में शामिल किए जाने से इन स्थलों की निगरानी और संरक्षण के लिए त्वरित अंतरराष्ट्रीय सहायता का रास्ता खुलता है। फ़लस्तीन के सेबेस्टिया गाँव के उप-महापौर निज़ार कायद के अनुसार, यह निर्णय उस भूमि अधिग्रहण योजना का मुक़ाबला करने में अहम हो सकता है, जिसे इज़राइल ने 2025 के अंत में घोषित किया था और जिसे बस्ती विस्तार का हिस्सा माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, फ़लस्तीनी अधिकारी एक प्रस्तावित इज़राइली विधेयक पर भी चिंता जता रहे हैं, जो वेस्ट बैंक के पुरातात्विक स्थलों पर इज़राइली नागरिक नियंत्रण बढ़ाने का प्रावधान करता है—जिससे ओस्लो समझौते के तहत फ़लस्तीनी प्राधिकरण की सीमित स्वशासन वाली भूमिका कमज़ोर पड़ सकती है। लेबनान में भी पिछले मई में इज़राइली सेना द्वारा बोफ़ोर किले पर कब्ज़ा करने के बाद यह मुद्दा संवेदनशील बना हुआ है।
यह निर्णय यूनेस्को और इज़राइल के बीच जारी तनाव को और गहराता है। इज़राइल 2019 में ही संगठन से अलग हो गया था और वह बुसान बैठक में केवल पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ। यूनेस्को की इस बैठक में कुल 30 स्थलों पर विचार किया जाना है, जो 29 जुलाई तक चलेगी। इनमें लेबनान का प्राचीन शहर टायर भी शामिल है जिसे बुधवार को सूची में रखा गया। आगे की राह में इन स्थलों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तेज़ होने की संभावना है, और फ़लस्तीनी पक्ष इसे व्यापक राजनयिक मंचों पर भुनाने की कोशिश कर सकता है।
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