
अमेरिकी हमले रुके, ईरान से तनाव कम; कूटनीति को मिला बढ़ावा
लगातार 13 दिनों के हवाई हमलों के बाद अमेरिका ने विराम लगाया, ईरान ने भी जवाबी हमले रोके, और होरमुज पर बातचीत के लिए ओमान की पहल पर नया अवसर बना।
लगातार 13 रातों तक ईरान पर हवाई हमले करने के बाद अमेरिकी सेना ने पिछले दो दिनों से कोई नया हमला नहीं किया है, जिसके बाद ईरान ने भी खाड़ी देशों पर अपनी जवाबी कार्रवाइयां रोक दी हैं। इस ठहराव ने कूटनीति के लिए नई गुंजाइश पैदा की है, खासकर होरमुज जलसंधि में नौवहन सुरक्षा को लेकर ओमान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत के बीच।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य अभियान को व्यापक रूप से बढ़ाने की योजना को फिलहाल टाल दिया है क्योंकि पेंटागन ने चेतावनी दी कि इससे मध्य पूर्व में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य वायु रक्षा सामग्री का भंडार खतरनाक स्तर तक घट सकता है। व्हाइट हाउस की शुक्रवार की बैठक में उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने युद्ध के विस्तार को लेकर चिंता जताई; केन ने कहा कि सेना उपलब्ध विकल्पों को अंजाम दे सकती है, लेकिन इससे भंडार पर दबाव बढ़ेगा। हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत, जब एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी वायु रक्षा को भेद गई, ने इस कमजोरी को उजागर किया।
ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि उनकी रणनीति अनिवार्यतः जवाबी है, इसलिए अमेरिकी हमले रुकने पर उन्होंने भी अभियान स्थगित कर दिया, लेकिन चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी हमले दोबारा शुरू हुए तो युद्ध का दायरा भौगोलिक रूप से और बढ़ेगा। इस बीच, ईरान और ओमान के बीच होरमुज जलसंधि में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है; ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इन्हें उपयोगी बताया और कहा कि प्रगति हुई है। दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जिज़ान और यानबू में अरामको तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे लाल सागर मार्ग पर भी संकट गहरा गया है।
करीब पांच महीने से चल रहे इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को हिला दिया है, पिछले दो सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 27 प्रतिशत बढ़ गई हैं। दक्षिण एशियाई देशों, खासकर भारत के लिए, तेल की बढ़ती कीमतें और क्षेत्रीय अस्थिरता ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा करती है। वाशिंगटन का कूटनीतिक रुख नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से भी प्रभावित है, जहां रिपब्लिकन पार्टी की लोकप्रियता पर युद्ध का असर पड़ रहा है। अगले सप्ताह इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्हाइट हाउस यात्रा प्रस्तावित है, जो अमेरिकी रणनीति को और आकार दे सकती है। फिलहाल अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी बरकरार है, और सभी की निगाहें ओमान वार्ता पर टिकी हैं।
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