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भू-राजनीति और राजनीतिबुधवार, 24 जून 2026

दक्षिण लेबनान में अमेरिकी पायलट परियोजना: इज़राइली वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती पर वाशिंगटन वार्ता

वाशिंगटन में पाँचवें दौर की सीधी वार्ता में इज़राइल और लेबनान अमेरिकी प्रशिक्षित लेबनानी सेना को कुछ क्षेत्र सौंपने पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि हिज़्बुल्लाह पूर्ण वापसी की माँग पर अड़ा है।

वाशिंगटन में मंगलवार से शुरू हुई इज़राइल-लेबनान की पाँचवीं दौर की सीधी वार्ता में एक अमेरिकी-समर्थित पायलट परियोजना पर चर्चा केंद्र में है, जिसके तहत इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान के कुछ हिस्सों से हटकर उनका नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपेगी। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में शामिल लेबनानी सैनिकों को अमेरिकी प्रशिक्षण और जाँच से गुज़रना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह से संबंध नहीं हैं। इज़राइल सीमा पर एक सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा।

लेबनानी पक्ष ने इस पहल को लेकर सतर्क रुख़ अपनाया है। एक वरिष्ठ लेबनानी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि वार्ता में सैन्य-से-सैन्य स्तर पर पायलट क्षेत्रों और वापसी की समय-सीमा पर बात होगी, और कोई भी योजना बृहस्पतिवार को अंतिम दिन के बाद ही सामने आएगी। वहीं हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम क़ासिम ने एक टेलीविज़न संबोधन में स्पष्ट किया कि समूह पूर्ण और समयबद्ध इज़राइली वापसी की माँग करता है, जिसमें “एक इंच भी ज़मीन” न रखी जाए और लेबनानी सेना विशेष रूप से लीतानी नदी के दक्षिण में तैनात हो। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ आउन ने भी इज़राइली कब्ज़े और विदेशी संरक्षण—जिसे ईरान की ओर इशारा माना जा रहा है—को अस्वीकार करते हुए पूर्ण संप्रभुता की बहाली को वार्ता का लक्ष्य बताया।

यह द्विपक्षीय वार्ता एक समानांतर अमेरिकी-ईरानी कूटनीतिक प्रक्रिया की छाया में चल रही है। स्विट्ज़रलैंड में हालिया वार्ता के बाद अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और क़तर ने लेबनान में तनाव कम करने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” गठित की है, जिसमें इज़राइल शामिल नहीं है। वाशिंगटन के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस ढाँचे की आलोचना इस आधार पर हो रही है कि यह ईरान को लेबनान के सुरक्षा मामलों में वैध हिस्सेदार बना सकता है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही इस मुद्दे पर विभाजन दिखता है: विदेश मंत्री मार्को रूबियो और लेबनान में अमेरिकी राजदूत सीधी इज़राइल-लेबनान वार्ता का समर्थन कर रहे हैं, जबकि उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस का खेमा एक ऐसे समाधान के प्रति अधिक उत्सुक बताया जाता है जिसे अमेरिका और ईरान मिलकर थोपें और जो पूर्ण लेबनानी संप्रभुता की माँग न करे।

ज़मीनी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। रविवार से युद्धविराम मोटे तौर पर क़ायम है, लेकिन मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइली गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद हिज़्बुल्लाह ने इसे “विश्वासघाती हमला” बताया। इज़राइली सेना का कहना है कि उसने अपने घोषित सुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हथियारबंद लड़ाकों को निशाना बनाया। इस बीच इज़राइल ने दक्षिण लेबनान में नए युद्ध नियम लागू किए हैं, जो एक निर्धारित “पीली रेखा” के भीतर किसी भी हथियारबंद तत्व पर बिना तत्काल ख़तरे के भी गोली चलाने की अनुमति देते हैं। इज़राइली मीडिया के अनुसार, सेना कुछ सीमित क्षेत्रों से आंशिक वापसी की तैयारी कर रही है, जिनमें से कुछ को “वार्ता के उद्देश्य” से हाल में कब्ज़ाया गया था।

लेबनानी और अमेरिकी आकलन इस दौर की वार्ता से दो ठोस परिणामों की संभावना जता रहे हैं: एक “इरादों की घोषणा” जो पिछले वाशिंगटन वक्तव्य का विस्तार हो, और पायलट क्षेत्रों पर सहमति जहाँ इज़राइली वापसी के बाद लेबनानी सेना तैनात होगी और हिज़्बुल्लाह के हथियार हटाए जाएँगे। फिर भी बुनियादी अंतर बरक़रार है—इज़राइल लेबनानी सेना द्वारा पहले रणनीतिक पहाड़ियों पर तैनाती और हिज़्बुल्लाह की सुरंगों की तलाशी की गारंटी चाहता है, जबकि लेबनान बिना शर्त पूर्ण वापसी की समय-सीमा पर ज़ोर दे रहा है। वार्ता का सैन्य आयाम बुधवार को जारी रहा और इसके नतीजे बृहस्पतिवार को अपेक्षित हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

38%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

रिपोर्ट में लेबनान से इजरायल की पूर्ण वापसी की हिजबुल्लाह की मांग को नोट किया गया है, साथ ही राष्ट्रपति औन द्वारा विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार करने पर प्रकाश डाला गया है। इसमें पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान डी-कॉन्फ्लिक्ट सेल की स्थापना का उल्लेख है, जो व्यापक मध्य पूर्व संदर्भ में एक कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में कहानी को प्रस्तुत करता है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

कवरेज वाशिंगटन में चल रही वार्ताओं पर केंद्रित है, जहां लेबनान दक्षिण से पूर्ण इजरायली वापसी की मांग करता है। हालांकि, इजरायल इस बात की गारंटी पर जोर देता है कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर सकती है, जो वापसी तंत्र पर गतिरोध को उजागर करता है।

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घाना के जादूगर का 'श्राप' और केन का चूका मौका: इंग्लैंड को गोलरहित ड्रॉ·अमेरिकी सेना के यूरोप-अफ्रीका कमांडर जनरल डोनाह्यू का अचानक इस्तीफा, पेंटागन में सफ़ाई की लहर जारी·स्पेसएक्स की शेयरों में लगातार गिरावट, एलन मस्क का ट्रिलियनेर दर्जा 12 दिनों में खत्म·अमेरिका ने 'गोल्डन डोम' मिसाइल रक्षा प्रणाली का पहला सफल परीक्षण किया·जंगल की सिहरन और फैशन की चकाचौंध: दो दशक बाद लौट रही हैं वो कहानियाँ जिन्होंने एक पीढ़ी को गढ़ा·खाड़ी में AI की लहर: निवेशक तकनीक पर भरोसा करते हैं, लेकिन अंतिम मुहर इंसानों की·डॉलर की मजबूती और फेड दर वृद्धि की आशंका से सोना दो सप्ताह के निचले स्तर पर·शिक्षकों पर यौन अपराध के आरोप: मलेशिया, ब्राज़ील और स्वीडन में कानूनी कार्रवाई तेज़·घाना के जादूगर का 'श्राप' और केन का चूका मौका: इंग्लैंड को गोलरहित ड्रॉ·अमेरिकी सेना के यूरोप-अफ्रीका कमांडर जनरल डोनाह्यू का अचानक इस्तीफा, पेंटागन में सफ़ाई की लहर जारी·स्पेसएक्स की शेयरों में लगातार गिरावट, एलन मस्क का ट्रिलियनेर दर्जा 12 दिनों में खत्म·अमेरिका ने 'गोल्डन डोम' मिसाइल रक्षा प्रणाली का पहला सफल परीक्षण किया·जंगल की सिहरन और फैशन की चकाचौंध: दो दशक बाद लौट रही हैं वो कहानियाँ जिन्होंने एक पीढ़ी को गढ़ा·खाड़ी में AI की लहर: निवेशक तकनीक पर भरोसा करते हैं, लेकिन अंतिम मुहर इंसानों की·डॉलर की मजबूती और फेड दर वृद्धि की आशंका से सोना दो सप्ताह के निचले स्तर पर·शिक्षकों पर यौन अपराध के आरोप: मलेशिया, ब्राज़ील और स्वीडन में कानूनी कार्रवाई तेज़·
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दक्षिण लेबनान में अमेरिकी पायलट परियोजना: इज़राइली वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती पर वाशिंगटन वार्ता

वाशिंगटन में पाँचवें दौर की सीधी वार्ता में इज़राइल और लेबनान अमेरिकी प्रशिक्षित लेबनानी सेना को कुछ क्षेत्र सौंपने पर चर्चा कर रहे हैं, जबकि हिज़्बुल्लाह पूर्ण वापसी की माँग पर अड़ा है।

वाशिंगटन में मंगलवार से शुरू हुई इज़राइल-लेबनान की पाँचवीं दौर की सीधी वार्ता में एक अमेरिकी-समर्थित पायलट परियोजना पर चर्चा केंद्र में है, जिसके तहत इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान के कुछ हिस्सों से हटकर उनका नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपेगी। इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में शामिल लेबनानी सैनिकों को अमेरिकी प्रशिक्षण और जाँच से गुज़रना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके ईरान-समर्थित हिज़्बुल्लाह से संबंध नहीं हैं। इज़राइल सीमा पर एक सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा।

लेबनानी पक्ष ने इस पहल को लेकर सतर्क रुख़ अपनाया है। एक वरिष्ठ लेबनानी सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि वार्ता में सैन्य-से-सैन्य स्तर पर पायलट क्षेत्रों और वापसी की समय-सीमा पर बात होगी, और कोई भी योजना बृहस्पतिवार को अंतिम दिन के बाद ही सामने आएगी। वहीं हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम क़ासिम ने एक टेलीविज़न संबोधन में स्पष्ट किया कि समूह पूर्ण और समयबद्ध इज़राइली वापसी की माँग करता है, जिसमें “एक इंच भी ज़मीन” न रखी जाए और लेबनानी सेना विशेष रूप से लीतानी नदी के दक्षिण में तैनात हो। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ आउन ने भी इज़राइली कब्ज़े और विदेशी संरक्षण—जिसे ईरान की ओर इशारा माना जा रहा है—को अस्वीकार करते हुए पूर्ण संप्रभुता की बहाली को वार्ता का लक्ष्य बताया।

यह द्विपक्षीय वार्ता एक समानांतर अमेरिकी-ईरानी कूटनीतिक प्रक्रिया की छाया में चल रही है। स्विट्ज़रलैंड में हालिया वार्ता के बाद अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और क़तर ने लेबनान में तनाव कम करने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” गठित की है, जिसमें इज़राइल शामिल नहीं है। वाशिंगटन के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस ढाँचे की आलोचना इस आधार पर हो रही है कि यह ईरान को लेबनान के सुरक्षा मामलों में वैध हिस्सेदार बना सकता है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही इस मुद्दे पर विभाजन दिखता है: विदेश मंत्री मार्को रूबियो और लेबनान में अमेरिकी राजदूत सीधी इज़राइल-लेबनान वार्ता का समर्थन कर रहे हैं, जबकि उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस का खेमा एक ऐसे समाधान के प्रति अधिक उत्सुक बताया जाता है जिसे अमेरिका और ईरान मिलकर थोपें और जो पूर्ण लेबनानी संप्रभुता की माँग न करे।

ज़मीनी स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। रविवार से युद्धविराम मोटे तौर पर क़ायम है, लेकिन मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इज़राइली गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद हिज़्बुल्लाह ने इसे “विश्वासघाती हमला” बताया। इज़राइली सेना का कहना है कि उसने अपने घोषित सुरक्षा क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश कर रहे हथियारबंद लड़ाकों को निशाना बनाया। इस बीच इज़राइल ने दक्षिण लेबनान में नए युद्ध नियम लागू किए हैं, जो एक निर्धारित “पीली रेखा” के भीतर किसी भी हथियारबंद तत्व पर बिना तत्काल ख़तरे के भी गोली चलाने की अनुमति देते हैं। इज़राइली मीडिया के अनुसार, सेना कुछ सीमित क्षेत्रों से आंशिक वापसी की तैयारी कर रही है, जिनमें से कुछ को “वार्ता के उद्देश्य” से हाल में कब्ज़ाया गया था।

लेबनानी और अमेरिकी आकलन इस दौर की वार्ता से दो ठोस परिणामों की संभावना जता रहे हैं: एक “इरादों की घोषणा” जो पिछले वाशिंगटन वक्तव्य का विस्तार हो, और पायलट क्षेत्रों पर सहमति जहाँ इज़राइली वापसी के बाद लेबनानी सेना तैनात होगी और हिज़्बुल्लाह के हथियार हटाए जाएँगे। फिर भी बुनियादी अंतर बरक़रार है—इज़राइल लेबनानी सेना द्वारा पहले रणनीतिक पहाड़ियों पर तैनाती और हिज़्बुल्लाह की सुरंगों की तलाशी की गारंटी चाहता है, जबकि लेबनान बिना शर्त पूर्ण वापसी की समय-सीमा पर ज़ोर दे रहा है। वार्ता का सैन्य आयाम बुधवार को जारी रहा और इसके नतीजे बृहस्पतिवार को अपेक्षित हैं।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 10 स्रोत · 5 भाषाएँ

38%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक25%
न्यूनत्र75%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

रिपोर्ट में लेबनान से इजरायल की पूर्ण वापसी की हिजबुल्लाह की मांग को नोट किया गया है, साथ ही राष्ट्रपति औन द्वारा विदेशी हस्तक्षेप को अस्वीकार करने पर प्रकाश डाला गया है। इसमें पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका-ईरान डी-कॉन्फ्लिक्ट सेल की स्थापना का उल्लेख है, जो व्यापक मध्य पूर्व संदर्भ में एक कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में कहानी को प्रस्तुत करता है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

कवरेज वाशिंगटन में चल रही वार्ताओं पर केंद्रित है, जहां लेबनान दक्षिण से पूर्ण इजरायली वापसी की मांग करता है। हालांकि, इजरायल इस बात की गारंटी पर जोर देता है कि लेबनानी सेना हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर सकती है, जो वापसी तंत्र पर गतिरोध को उजागर करता है।

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