
वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में एशियाई दबदबा: सिंगापुर शीर्ष पर, भारत 44वें स्थान पर स्थिर
आईएमडी रैंकिंग में सिंगापुर ने स्विट्जरलैंड से पहला स्थान छीना, जबकि ऊर्जा संक्रमण सूचकांक में वैश्विक प्रगति ठहर गई।
वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा के नक्शे पर इस साल एशिया की चमक और यूरोप की निराशा साफ दिखी। स्विट्जरलैंड स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (आईएमडी) की ताजा रैंकिंग में सिंगापुर ने एक साल बाद फिर पहला स्थान हासिल किया, जबकि हांगकांग दूसरे और ताइवान रिकॉर्ड चौथे पायदान पर पहुंच गया। स्विट्जरलैंड, जो पिछले साल शीर्ष पर था, तीसरे नंबर पर खिसक गया। अमेरिकी आयात शुल्क, मजबूत स्विस फ्रैंक और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट ने उसकी आर्थिक प्रदर्शन रेटिंग को झटका दिया। शीर्ष दस में संयुक्त अरब अमीरात पांचवें, डेनमार्क छठे, आयरलैंड सातवें, नीदरलैंड आठवें, स्वीडन नौवें और अमेरिका दसवें स्थान पर लौटा।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ताकत मलेशिया की छलांग में भी झलकी, जो आठ स्थान चढ़कर 15वें पायदान पर पहुंच गया—एक दशक में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन। सरकारी दक्षता में 11 पायदान की उछाल ने ‘मदानी’ सुधारों को बल दिया; मलेशिया ने 2030 तक 12वीं रैंक का लक्ष्य रखा है। इसके विपरीत, चीन 12वें स्थान पर स्थिर रहा, जबकि भारत 44वें स्थान पर ठहर गया—दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए एक चेतावनी, जहां बुनियादी ढांचे और शासन सुधारों की रफ्तार अब भी क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों से पीछे है।
लैटिन अमेरिका की तस्वीर उदास रही। मेक्सिको सात स्थान लुढ़ककर 62वें, कोलंबिया पांच गिरकर 59वें और ब्राजील 65वें स्थान पर आ गया। केवल चिली 43वें स्थान के साथ कुछ राहत दे सका, जबकि वेनेजुएला सबसे निचले 70वें पायदान पर रहा। मेक्सिको की बुनियादी ढांचा और सरकारी दक्षता रेटिंग विशेष रूप से कमजोर आंकी गई। यूरोप में जर्मनी चार स्थान गिरकर 23वें पर आ गया, जो व्यापार तनावों और घरेलू ढांचागत चुनौतियों का शिकार हुआ।
इसी बीच, विश्व आर्थिक मंच के ऊर्जा संक्रमण सूचकांक ने एक और चिंता उजागर की: स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की वैश्विक तैयारी 0.76 प्रतिशत गिरी, जो एक दशक से अधिक की सबसे बड़ी गिरावट है। 120 देशों के औसत अंक 57.3 पर स्थिर रहे। स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क जैसे नॉर्डिक देश शीर्ष पर बने रहे, जबकि चीन 14वें और भारत इस सूची में उल्लेखनीय स्थान नहीं बना सका। मेक्सिको यहां भी चार पायदान फिसलकर 59वें स्थान पर आ गया।
दोनों रैंकिंग मिलाकर देखें तो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, संरक्षणवाद और निवेश प्रवाह में बदलाव का दौर साफ है। एशियाई अर्थव्यवस्थाएं खुले कारोबार, डिजिटल बुनियादी ढांचे और शासन सुधारों के बल पर आगे बढ़ रही हैं, जबकि यूरोप और लैटिन अमेरिका पीछे खिसक रहे हैं। भारत के लिए मलेशिया की सफलता एक नीतिगत सबक है: सरकारी दक्षता और बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार ही प्रतिस्पर्धात्मकता को ऊपर ले जा सकते हैं। ऊर्जा संक्रमण की सुस्त रफ्तार यह भी बताती है कि हरित निवेश में तेजी लाए बिना दीर्घकालिक आर्थिक लचीलापन अधूरा रहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
Hong Kong shines with a dual achievement: second place in global competitiveness and two universities in the world's top twenty for the first time. The city's education system is Asia's most improved for the second year running, while its economy shows resilience, reaching a seven-year high.
Switzerland loses its competitiveness crown, slipping from first to third, while Singapore reclaims the top spot and Hong Kong rises to second. Europe's decline is clear: Germany also falls back, hurt by trade conflicts and economic weakness. Hong Kong advances for the third straight year, driven by strong economic performance.
संबंधित लेख
स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान तकनीकी वार्ता स्थगित, लेबनान में इज़रायली हमलों से युद्धविराम समझौते पर अनिश्चितता
11 भाषाएँ · 47 स्रोत
भू-राजनीति और राजनीतिट्रंप के 'भीख मांगने' वाले दावे पर मेलोनी का पलटवार, इटली ने अमेरिकी यात्रा रद्द की
12 भाषाएँ · 41 स्रोत
न्याय और कानूनफ्रांसीसी अदालत ने मोरक्को के स्टार हकीमी पर बलात्कार मामले में मुकदमा चलाने का फैसला बरकरार रखा
9 भाषाएँ · 33 स्रोत