
बालोगुन मामले में फीफा के एक अधिकारी ने अकेले लिया फैसला, विवाद गहराया
अमेरिकी स्ट्राइकर की सजा माफ करने का निर्णय अनुशासन समिति के अध्यक्ष ने बिना सदस्यों की सलाह के लिया, ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद उठे सवाल
अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में गंभीर फाउल के लिए सीधा लाल कार्ड दिखाया गया। नियमों के मुताबिक यह स्वतः एक मैच का प्रतिबंध था, जिससे उनका बेल्जियम के खिलाफ अंतिम-16 मुकाबले से बाहर होना तय था। लेकिन फीफा ने अचानक यह प्रतिबंध हटा लिया और बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ शुरुआती ग्यारह में उतरे।
अब यूरोपीय मीडिया में आई खबरों से खुलासा हुआ है कि यह विवादास्पद फैसला फीफा की अनुशासन समिति के अध्यक्ष मोहम्मद अल-कमाली ने अकेले लिया। ब्रिटिश अखबार द टाइम्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के इस अधिकारी ने समिति के अन्य 17 सदस्यों से कोई सलाह नहीं ली। हालांकि फीफा में अकेले निर्णय लेना असामान्य नहीं है—फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक पिछले 110 सार्वजनिक फैसले अध्यक्ष ने ही किए—लेकिन अहम मामलों में आमतौर पर तीन सदस्यीय पैनल बनता है।
इस पूरे प्रकरण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप ने आग में घी डाला। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन कर बालोगुन के लाल कार्ड की समीक्षा का अनुरोध किया था। इन्फेंटिनो ने कहा कि अनुशासन समिति स्वतंत्र है और उन्होंने ट्रंप को भी यही बताया। लेकिन अकेले लिए गए फैसले और अब तक पूर्ण लिखित निर्णय सार्वजनिक न होने से भ्रष्टाचार के आरोपों को बल मिला है। बीबीसी ने जब अल-कमाली से सवाल पूछे तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
इस बीच, इंग्लैंड के जेरेल क्वांसा को मेक्सिको के खिलाफ इसी तरह के गंभीर फाउल पर दो मैचों का प्रतिबंध मिला, जिससे फैसलों में एकरूपता की कमी उजागर हुई। बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ खेले, लेकिन अमेरिकी टीम 1-4 से हारकर विश्व कप से बाहर हो गई। अब यह मामला फीफा की विश्वसनीयता पर गहरी छाया डाल चुका है और आगामी प्रतियोगिताओं में पारदर्शिता की मांग और तेज होगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.60 | critical |
Europe denounces the FIFA disciplinary committee chairman's arbitrariness, acting alone, and highlights suspicion of political interference by Trump.
By repeating the number of unconsulted members and the contrast with rules, it creates an impression of illegality and corruption.
It omits Article 27 of the FIFA disciplinary code that allows replacing a suspension with probation, which could justify the decision.
Russia reports the decision as an administrative act in line with the disciplinary code, without emphasizing scandal.
By citing Article 27, it presents the decision as standard procedure, downplaying its exceptional nature.
It omits Trump's phone call and corruption allegations, central in other coverage.
Anglophone Africa challenges FIFA, demanding transparency and highlighting the refusal to answer, insinuating a cover-up.
By reporting the refusal to answer BBC questions, it builds an image of guilt by omission.
It does not delve into Article 27 or the possibility that the decision was legitimate, focusing only on opacity.
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