
रेजियो एमिलिया के बच्चों ने राजकुमारी को दिखाया डिजिटल दुनिया में असली जुड़ाव का रास्ता
एक शाही यात्रा, बच्चों की मुस्कान और स्क्रीन की लत पर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच, राजकुमारी केट ने प्रेम और सुनने को असली जुड़ाव बताया।
इटली के रेजियो एमिलिया शहर के पियाज़ा ग्रांदे में एक शाही मेहमान बच्चों के सामने झुकी। वेल्स की राजकुमारी केट मिडलटन ने वहाँ एक अपाहिज लड़की को गले लगाया, नब्बे साल की शिक्षिकाओं की कहानियाँ सुनीं और एक छोटे से विद्यार्थी से वादा किया, “मैं लौटूंगी।” पर जो चीज़ सबसे गहरी छाप छोड़ गई, वह थी बच्चों की सहज खुली हुई अभिव्यक्ति — बिना शब्दों के, बिना किसी औपचारिकता के, एक अजनबी को पूरे भरोसे और खुशी के साथ अपना लेना। राजकुमारी ने बाद में अपने निबंध में लिखा कि उन बच्चों में “स्वाभाविक खुलापन, सरल चीज़ों के प्रति जिज्ञासा और अचरज, सपने देखने और खेलने की क्षमता” थी, जो मानवता की सर्वोत्तम गुणवत्ता की याद दिलाती है।
यह यात्रा महज़ एक शाही दौरा नहीं थी। कैंसर से उबरने के बाद यह राजकुमारी का पहला विदेशी कार्यक्रम था, और उन्होंने इसे अपने प्रारंभिक बाल्यावस्था अभियान की वैश्विक शुरुआत के रूप में लिया। रेजियो एमिलिया का शैक्षिक दर्शन, जिसे ‘सौ भाषाओं का नज़रिया’ कहा जाता है, बच्चों को समाज का बराबर का सदस्य मानता है और उन्हें सुनने, समझने और सम्मान देने पर टिका है। केट ने अपने निबंध में इसी से प्रेरणा लेते हुए कहा कि “तेज़ी से डिजिटल होती दुनिया में, जहाँ ज़िंदगी का इतना बड़ा हिस्सा स्क्रीनों के ज़रिए गुज़रता है, सच्चे इंसानी जुड़ाव की ज़रूरत पहले कभी इतनी प्रबल नहीं थी।” उन्होंने प्रकृति में समय बिताने, रचनात्मक काम करने और प्रेम को प्राथमिकता देने की बात की — वे गुण जिन्हें डिजिटलीकृत नहीं किया जा सकता: जागरूकता, सहानुभूति, विनम्रता और प्रेम।
राजकुमारी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में बच्चों के स्क्रीन के इस्तेमाल को लेकर चिंता गहरा रही है। संयुक्त अरब अमीरात ने हाल ही में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया। वहाँ के डॉक्टरों ने बताया कि क्लीनिकों में किशोरों की पीठ और गर्दन के दर्द, नींद की गड़बड़ी, ध्यान की कमी और भावनात्मक परेशानियों के मामले बढ़ रहे हैं। राक हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल मेहता ने समझाया कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पूरी तरह विकसित नहीं होता, जिससे वे डिजिटल उत्तेजना के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म डोपामिन रिवॉर्ड लूप बनाते हैं, जो व्यवहारिक निर्भरता पैदा कर सकता है। वहीं, एक हालिया पुस्तक ने चेताया कि दो साल की उम्र तक 90 प्रतिशत बच्चे टैबलेट का मध्यम इस्तेमाल करने लगते हैं, और डिवाइस छीनने पर ‘टेक टैंट्रम’ यानी तकनीकी गुस्सा आम हो गया है। भारत में भी अभिभावक इसी दुविधा से जूझ रहे हैं, जहाँ स्क्रीन टाइम को लेकर कोई राष्ट्रीय दिशानिर्देश अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।
इसी डिजिटल थकान के बीच, युवा पीढ़ी एक अनोखा रास्ता निकाल रही है: दो फ़ोन रखना। एक ‘डम्ब फ़ोन’ सिर्फ़ परिवार और नज़दीकी दोस्तों के लिए, दूसरा स्मार्टफ़ोन सोशल मीडिया और काम के लिए, जो ज़्यादातर बंद रहता है। एक शोध के अनुसार, 2025 में 18 प्रतिशत लोगों के पास दो स्मार्टफ़ोन थे, जो 2024 में 15 प्रतिशत था। यह कोशिश ध्यान और रिश्तों को स्क्रीन की पकड़ से वापस लेने की एक व्यक्तिगत रणनीति है।
रेजियो एमिलिया से लौटने के कुछ दिनों बाद, राजकुमारी केट ने अपने बच्चों के स्कूल में एक अभिभावक से हुई बातचीत का ज़िक्र किया। उस अभिभावक ने पूछा था कि अगर हम सब सिर्फ़ एक काम कर सकें, तो वह क्या हो? राजकुमारी का जवाब था: “प्रेम को प्राथमिकता देना।” वह कोई भावुक या रूमानी इशारा नहीं, बल्कि “शांत और बिना शर्त वाला प्रेम, जो समय और धैर्य पर बना हो: साधारण चीज़ों में मिलने वाली खुशी; ज़िंदगी का रोज़मर्रा का जादू।” यह वाक्य एक ऐसी दुनिया में गूंजता है जहाँ स्क्रीन की चमक अक्सर आँखों के उस संपर्क को ढक लेती है जिसमें बिना किसी ऐप के सब कुछ कहा जा सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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राजकुमारी की रेजियो एमिलिया यात्रा स्क्रीन-संतृप्त दुनिया में वास्तविक मानवीय जुड़ाव को फिर से खोजने का आह्वान बन जाती है। उनका निबंध चेतावनी देता है कि बच्चों को पनपने के लिए वास्तविक दुनिया के अनुभवों की ज़रूरत है, जो डिजिटल अधिभार की बढ़ती चिंताओं को प्रतिध्वनित करता है। कथा प्रौद्योगिकी के प्रति एक संतुलित, व्यावहारिक दृष्टिकोण सुझाती है, आशा और मानवीय गुणों पर जोर देती है।
वेल्स की राजकुमारी की रेजियो एमिलिया यात्रा शहर के प्रसिद्ध प्रारंभिक बचपन दर्शन का उत्सव मनाती है। यात्रा के बाद प्रकाशित उनका निबंध बच्चों के स्वाभाविक खुलेपन और इसे बढ़ावा देने वाले शैक्षिक मॉडल पर प्रकाश डालता है। कहानी शाही परिवार और खुशहाल बचपन की एक स्थानीय परंपरा के बीच मुलाकात पर केंद्रित है।