
कैरिबियन में अमेरिकी हमले में दो की मौत, छह बचे; नशा-विरोधी अभियान पर सवाल
अमेरिकी सेना ने कैरिबियन सागर में एक संदिग्ध नशा तस्कर नौका पर हमला कर दो लोगों को मार गिराया, जिससे सितंबर 2025 से जारी इस अभियान में मरने वालों की संख्या 210 से अधिक हो गई है।
अमेरिकी दक्षिणी कमान (साउथकॉम) ने 21 जून को कैरिबियन सागर में एक पोत पर हमला कर दो लोगों को मार गिराया और छह अन्य को बचा लिया गया। साउथकॉम के अनुसार, खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई थी कि यह पोत ‘नामित आतंकवादी संगठनों’ द्वारा संचालित था और ज्ञात नशा तस्करी मार्गों पर सक्रिय था। यह कार्रवाई ‘जॉइंट टास्क फोर्स सदर्न स्पीयर’ के तहत की गई, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने लैटिन अमेरिकी कार्टेल के खिलाफ ‘सशस्त्र संघर्ष’ का हिस्सा बताया है।
वाशिंगटन का तर्क है कि ये हमले अमेरिकी धरती पर मादक पदार्थों के प्रवाह और घातक ओवरडोज़ से होने वाली मौतों को रोकने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, प्रशासन ने अब तक यह सबूत नहीं दिया है कि लक्षित नौकाओं पर वास्तव में ड्रग्स थे। मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने इन हमलों को ‘न्यायेतर हत्याएं’ करार दिया है। अमेरिकी सीनेटर रैंड पॉल सहित कुछ सांसदों ने भी बिना उचित प्रक्रिया के लोगों को मारने और निर्दोषों के हताहत होने की आशंका पर चिंता जताई है। पॉल ने तटरक्षक बल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नशा तस्करी के संदेह में रोकी गई नौकाओं का एक बड़ा हिस्सा निर्दोष पाया जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ये हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और सशस्त्र संघर्ष के नियमों पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। विशेष रूप से सितंबर 2025 के पहले हमले में बचे दो लोगों पर किए गए दूसरे हमले को लेकर विवाद गहराया है, जिसे व्हाइट हाउस ने ‘आत्मरक्षा’ बताया था, लेकिन कानूनविदों ने इसे हर स्थिति में अवैध ठहराया है। पेंटागन के आंतरिक निगरानीकर्ता ने मई में घोषणा की थी कि वह हमलों में ‘जॉइंट टार्गेटिंग साइकिल’ के पालन की समीक्षा करेगा, लेकिन यह जांच हमलों की वैधता पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया पर केंद्रित है।
भारत जैसे समुद्री हितों वाले देशों के लिए यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय जल में बल प्रयोग की मिसाल के रूप में चिंता का विषय है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका में ओवरडोज़ का प्रमुख कारण फेंटानिल मुख्यतः मैक्सिको से स्थल मार्ग से आता है, न कि समुद्री मार्ग से, जिससे इन हमलों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं। लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों की सरकारों ने अब तक औपचारिक रूप से इस अभियान पर सीमित प्रतिक्रिया दी है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया में इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया जा रहा है।
फिलहाल, अमेरिकी प्रशासन ने मारे गए लोगों की पहचान या नौका पर ड्रग्स होने का कोई साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है। कांग्रेस के सदस्यों ने पहले हमले का ‘असंपादित वीडियो’ जारी करने की मांग की है। पेंटागन की समीक्षा के नतीजे आने तक यह अभियान जारी रहने की संभावना है, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों पर इसकी चुनौती के संकेत मिल रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी सेना ने कैरिबियन में नशीली दवाओं की तस्करी के संदेह में एक जहाज पर हमला किया, जिसमें दो कथित नार्को-आतंकवादी मारे गए और छह लोग बच गए। यह कार्रवाई एक जारी अभियान का हिस्सा है जिसमें अब तक 210 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। किसी अमेरिकी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
अमेरिका ने नशीली दवाओं के परिवहन के संदेह में एक जहाज पर हमला कर दो लोगों को मार डाला। अमेरिका अब तक 60 से अधिक ऐसे हमले कर चुका है, जिनमें 210 से अधिक लोग मारे गए हैं, लेकिन उसने अपने आरोपों के लिए कभी सबूत पेश नहीं किए। मानवाधिकार संगठन इन कार्रवाइयों को न्यायेतर हत्याएं बताकर निंदा करते हैं।
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