
अल नीनो का दोहरा प्रहार: जलविद्युत उत्पादन में गिरावट और कॉफी की कीमतों में उछाल से अर्थव्यवस्था पर दबाव
कमजोर मानसून और वैश्विक जिंस बाजारों में उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने फसल बीमा नामांकन तेज करने और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा की है।
प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिघटना ने जून में भारत के जलविद्युत उत्पादन को पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21 प्रतिशत नीचे गिरा दिया—फरवरी 2024 के बाद की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर कॉफी वायदा कीमतों में एक ही दिन में 18.5 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जिसे वित्तीय सेवा समूह स्टोनएक्स ने ‘मीम-स्टॉक क्षेत्र’ की संज्ञा दी। ये दो आंकड़े एक साथ बताते हैं कि मौसम का यह पैटर्न ऊर्जा आपूर्ति से लेकर खाद्य कीमतों तक, अर्थव्यवस्था के कई मोर्चों पर एक साथ दबाव डाल रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह तक देशभर में मानसून की संचयी वर्षा सामान्य से 38 प्रतिशत कम रही, जिससे खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। केंद्रीय जल आयोग द्वारा निगरानी किए जा रहे 166 जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता का केवल एक-चौथाई पानी बचा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। इस दोहरी मार—घटती जलविद्युत आपूर्ति और बढ़ती शीतलन मांग—के चलते सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) का अनुमान है कि भारत को जुलाई 2026 से जून 2027 के बीच लगभग 18 टेरावॉट-घंटे की उत्पादन कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी भरपाई संभवतः कोयला आधारित उत्पादन बढ़ाकर की जाएगी।
कृषि क्षेत्र पर प्रभाव को सीमित करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें कृषि, विद्युत, स्वास्थ्य और उपभोक्ता मामलों के सचिवों ने भाग लिया। वित्त मंत्रालय ने बीमा कंपनियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नामांकन में तेजी लाने का निर्देश दिया, विशेषकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित 315 संवेदनशील जिलों में। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 7 जुलाई तक केवल 2.18 लाख किसानों ने इस वर्ष नामांकन कराया था, जबकि पिछले खरीफ सीजन में यह संख्या 2.02 करोड़ थी। साथ ही, कृषि मंत्रालय ने राज्यों को आकस्मिक योजनाओं को अद्यतन करने और जलवायु-सहिष्णु किस्मों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं।
वैश्विक स्तर पर, ब्राजील में अल नीनो के कारण जलविद्युत उत्पादन में कमी की आशंका है, लेकिन राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली संचालक (ओएनएस) का कहना है कि सौर और पवन ऊर्जा की बढ़ी हुई क्षमता—2021 के मुकाबले 82.2 गीगावॉट अधिक—इस कमी की भरपाई कर सकती है, हालांकि गैस और कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों को भी सक्रिय रहना होगा। इंडोनेशिया में, इंस्टीट्यूट फॉर एसेंशियल सर्विसेज रिफॉर्म (आईईएसआर) ने जलविद्युत संयंत्रों की बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रिड संहिता को अद्यतन करने और पारेषण नेटवर्क के विस्तार की सिफारिश की है। मलेशिया के अग्निशमन विभाग ने नवंबर से जनवरी के बीच अपेक्षित शुष्क मौसम और जंगल की आग से निपटने के लिए 200 हल्के परिचालन वाहन, 26 ड्रोन और दो अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की खरीद की योजना बनाई है।
अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव मानसून की प्रगति और जुलाई में वर्षा की बहाली पर होगा, क्योंकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई के लिए दीर्घकालिक औसत का 94 प्रतिशत वर्षा रहने का अनुमान लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रीय समुद्रीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के अनुसार, अल नीनो के नवंबर से जनवरी के बीच चरम पर होने की 60 प्रतिशत से अधिक संभावना है, जिससे उत्तरी गोलार्ध के देशों में शीतकालीन फसलों और ऊर्जा मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.20 | neutral |
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वित्तीय बाजार जलवायु खतरों पर सट्टा घबराहट के साथ प्रतिक्रिया करता है, कॉफी को एक अस्थिर परिसंपत्ति में बदल देता है।
मीम-स्टॉक और ऐतिहासिक लाभ की भाषा का उपयोग करके तात्कालिकता और नाटकीयता की भावना पैदा करता है, वास्तविक उत्पादन से ध्यान सट्टेबाजी की ओर स्थानांतरित करता है।
एल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए कृषि अनुकूलन उपायों या सरकारी नीतियों का उल्लेख नहीं करता, न ही ब्राजील जैसे अन्य क्षेत्रों में मूल्य गिरावट का।
भारत सरकार एल नीनो के प्रभावों से अर्थव्यवस्था और किसानों को बचाने के लिए जुटती है, प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन करती है।
उच्च स्तरीय बैठकों और मंत्रिस्तरीय निर्देशों पर जोर देकर नियंत्रण और तैयारी की छवि बनाती है, अनिश्चितता को कम करती है।
जलविद्युत प्रणाली की संरचनात्मक कमजोरियों या तेल आयात निर्भरता, या खाद्य कीमतों के संभावित सामाजिक परिणामों में गहराई से नहीं जाती।
ब्राजील एल नीनो के आगमन को चिंता के साथ देखता है, लेकिन तकनीकी अनुकूलन और फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर देता है।
विपरीत आंकड़े (मूल्य गिरावट बनाम जलवायु खतरा) प्रस्तुत करके एक जटिल तस्वीर बनाता है जो एक व्यावहारिक, गैर-अलार्मिस्ट दृष्टिकोण को उचित ठहराता है।
कॉफी फ्यूचर्स पर वित्तीय सट्टेबाजी या अन्य देशों के सरकारी तैयारी उपायों का उल्लेख नहीं करता, केवल स्थानीय संदर्भ पर ध्यान केंद्रित करता है।
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