
लाहौर में ट्यूशन सेंटर की छत ढहने से 14 बच्चों की मौत, कई अब भी मलबे में दबे होने की आशंका
पाकिस्तान के पूर्वी शहर लाहौर में मंगलवार को एक निजी ट्यूशन सेंटर की निर्माणाधीन छत गिर गई, जिसमें कम से कम 14 बच्चों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर के कहना इलाके में मंगलवार दोपहर एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत अचानक ढह गई। स्थानीय पुलिस और बचाव अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में कम से कम 14 बच्चों की मौत हो गई, जिनकी उम्र अधिकांश स्रोतों के अनुसार 5 से 16 वर्ष के बीच थी, हालांकि कुछ चिकित्सा सूत्रों ने मृतकों की आयु 4 से 12 वर्ष बताई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना के समय केंद्र में 30 से 40 बच्चे मौजूद थे।
पंजाब आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता ने बताया कि मलबे से अब तक 14 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि आठ से बीस के बीच घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया है—विभिन्न सरकारी और चिकित्सा सूत्रों ने घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। एक 30 वर्षीय महिला शिक्षिका भी घायल हुई हैं। बचाव दल अभी भी मलबे में दबे अन्य बच्चों की तलाश कर रहे हैं, हालांकि लाहौर पुलिस ने एक बयान में कहा कि शाम 7 बजे तक बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया था।
पंजाब के सूचना मंत्री आज़मा बोखारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह ट्यूशन सेंटर बिना पंजीकरण के एक निजी आवासीय भवन में चल रहा था, जिसकी छत जर्जर हालत में थी और दूसरी मंजिल का निर्माण कार्य अधूरा था। पुलिस ने भवन मालिक और ठेकेदार सहित दो लोगों को हिरासत में ले लिया है और लापरवाही की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने मानसून से पहले पूरे प्रांत में असुरक्षित भवनों का सर्वेक्षण करने और बिना पंजीकरण वाले शिक्षण केंद्रों के लिए सख्त नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।
पाकिस्तान में भवन ढहने की घटनाएं असामान्य नहीं हैं। दक्षिण एशियाई देशों में निर्माण मानकों का कमजोर प्रवर्तन, घटिया सामग्री का उपयोग और लागत कम करने के लिए सुरक्षा नियमों की अनदेखी आम बात है। पिछले वर्ष कराची में एक पांच मंजिला इमारत गिरने से 27 लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी मानसून सीजन ऐसे ढांचों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर सकता है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे पर शोक व्यक्त किया है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता देने के निर्देश दिए हैं। पंजाब सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि स्थानीय प्रशासन जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दावा कर रहा है। फिलहाल मृतकों की संख्या को अंतिम नहीं माना जा रहा, क्योंकि कुछ स्रोतों के अनुसार अभी भी बच्चों के मलबे में फंसे होने की सूचनाएं मिल रही हैं।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
The Lahore incident shows that safety regulations are systematically ignored; the international community must step in to protect children.
It generalizes a single case into a structural problem, appeals to collective moral responsibility, and calls for external intervention.
It omits any existing safety measures or specific causes like heavy rainfall that may have contributed.
The event is a tragic accident; it relies on official investigations to assign blame without pre-judging.
It maintains a descriptive tone and avoids attributing blame, reporting bare facts and deferring to local authorities for explanation.
It does not delve into possible systemic causes nor links the incident to similar past events in the region.
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